सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने शीर्ष अदालत के कामकाज को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसे चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.
जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा को लिखे एक लेटर को भी सार्वजनिक किया. जानिए इस लेटर में जस्टिस चेलमेश्वर सहित चारों जजों ने क्या प्रमुख बातें कही:
आजतक के अनुसार उस पत्र में लिखा है कि  

  • रोस्टर बनाने का अधिकार सही कामकाज के लिए, न कि वरिष्ठ बनने के लिए
  • जस्टिस चेलमेश्वर सहित 4 जजों ने जो महत्वपूर्ण आरोप लगाया है, उसमें यह‍ भी शामिल है कि मौजूदा न्यायालय व्यवस्था में मुकदमों को उनकी योग्यता के अनुसार नहीं डील किया गया. जस्टिस चेलमेश्वर सहित 4 जजों ने लेटर में लिखा है कि यह जरूरी सिद्धांत है कि रोस्टर में मुकदमों को उनकी मेरिट के हिसाब से उन्हें सही बेंच को सौंपा जाए.
  • जस्टिस चेलमेश्वर समेत सभी जजों ने अपने लेटर में यह भी जिक्र किया कि वह इस बारे में ज्यादा डिटेल में सिर्फ इसलिए जानकारी नहीं दे रहे हैं, क्योंकि इससे सुप्रीम कोर्ट को ज्यादा शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है
  • जस्टिस चेलमेश्वर और अन्य जजों ने अपने लेटर में आरपी लूथरा केस का जिक्र किया है. 4 जजों ने मांग की है कि लोकहित में यह जरूरी है कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर फाइनल करने में और देरी न की जाए.
  • जस्टिस चेलमेश्वर और अन्य जजों ने अपने लेटर में सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के लिए 6 महीने जेल की सजा काटने के बाद रिहा हुए रिटायर्ड जस्टिस कर्णन के मामले का भी जिक्र इस पत्र में किया है.
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