विकल्प के न होने की अवधारणा लोकतंत्र विरोधी है

विकल्प के न होने की अवधारणा लोकतंत्र विरोधी है

लोकसभा चुनाव 2019 के छह चरण पूर्ण हो चुके हैं, और अब केवल अंतिम चरण जो 19 मई को समपन्न होगा शेष है। अभी तक जो चुनाव हुए हैं, उनके बारे में सोशल मीडिया पर अलग अलग लोग अलग अलग तरह से अपना अनुमान बता रहे हैं। चूंकि आदर्श आचार संहिता के अनुसार न्यूज़ चैनल […]

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 क्या आप इन ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते?

क्या आप इन ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते?

अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में भूमिका निभाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। अगर आप अपने बच्चों को सांप्रदायिकता से बचाना से बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना […]

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 जर्मनी, हिटलर और दोनों का त्रासद अंत

जर्मनी, हिटलर और दोनों का त्रासद अंत

1937 तक आते आते नाज़ी पार्टी खत्म हो गयी थी और अगर कुछ बचा था, तो हिटलर, उन्माद और गोएबेल। लोकतांत्रिक माध्यम से पाई सत्ता कैसे शनैः शनैः झूठ, जुमलों, घृणा, दुष्प्रचार, मिथ्या अहंकार आदि आदि के लबादों में छिपते छिपाते एक बर्बर तानाशाही का रूप ले लेती है, यह जर्मनी के इतिहास का यह […]

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 हमारा लोकतांत्रिकरण कब होगा ?

हमारा लोकतांत्रिकरण कब होगा ?

विभिन्न राजनीतिक दलों में कार्यरत कार्यकर्ताओं को बहुजन दलों से जुड़े कार्यकर्ता बहुत ही हेय दृष्टि से देखते है. उनके प्रति भयानक हिकारत का भाव दिखलाई पड़ता है,ये लोग अपने ही समुदाय में उपेक्षित और अत्यधिक गरियाये हुये नजर आते है. इनके लिए विशेषणात्मक सम्बोधन भी सुनाई पड़ते है,ये विशेषण लिखे और बोले भी जाते […]

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 जानिए, चारों जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को क्या लिखा था

जानिए, चारों जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को क्या लिखा था

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने शीर्ष अदालत के कामकाज को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, […]

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 आप कैसे कह सकते हैं, कि कोई विरोध न हो

आप कैसे कह सकते हैं, कि कोई विरोध न हो

केसे विरोध न हो… कैसे कोई विरोध न हो,विरोध करता हूँ आपका,आपकी राजनीति का, तो क्या आप टेढ़ी आंखों से देखेंगे मुझे? लेकिन क्यों क्या आप विरोध को खत्म कर देना चाहते है? क्या आप “विपक्ष” को खत्म कर देना चाहते हो? अगर विरोध ही न होगा तो फिर कैसे समाज मे “मार्क्स” पैदा होगा? […]

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 सिस्टम बदलने के लिये लगातार मेहनत की ज़रूरत है

सिस्टम बदलने के लिये लगातार मेहनत की ज़रूरत है

“लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है” इत्यादि-इत्यादि…. यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें बनी हुई हैं। जब लोग लोकतंत्र के […]

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