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रविश के fb पेज से

क्या आपको अमित शाह की पर्सनल भाजपा के बारे में पता है ?

Assocation of Billion Minds, ABM, यह वो संगठन और नेटवर्क है जो बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह की पर्सनल टीम की तरह काम करती है। बीजेपी अपने आप में एक विशाल संगठन है। निष्ठावान कार्यकार्ताओं की फौज है। इसके बाद भी ABM पार्टी के समानांतर सिर्फ अध्यक्ष की मर्ज़ी से काम करने वाला ऐसा नेटवर्क है जिसके बारे में ज़्यादातर कार्यकर्ताओं को पता भी नहीं होगा। सांसदों को भी पता नहीं होगा। जिन्हें पता होगा उन्हें बस इतना कि यह अमित शाह की पर्सनल टीम है।
हफपोस्ट न्यूज़ वेबसाइट के संपादक अमन सेठी ने महीनों सैंकड़ों पन्नों के दस्तावेज़ की खाक छानने और कई लोगों से मिलने के बाद पाया है कि 166 लोगों की यह टीम देश के 12 जगहों पर अपना दफ्तर रखती है। इसका काम है व्हाट्स एप के लिए मीम तैयार करना, चुनावों के समय न्यूज़ वेबसाइट की शक्ल में प्रोपेगैंडा वेबसाइट लांच करना, बदनाम करने और अफवाह फैलाने का अभियान चलाना, अपने नेता के समर्थन में फेसबुक पेज चलाना, राजनीतिक अभियान चलाना जैसे भारत के मन की बात और मैं भी चौकीदार। यहाँ यह सवाल उठता है कि क्या भारत में सबसे बड़े फेक न्यूज़ नेटवर्क के मुखिया अमित शाह ही हैं ?
इस लंबी रिपोर्ट को इसलिए भी पढ़ें ताकि आप यह देख सकें कि हमारे राजनीतिक दल किस तरह से बदल रहे हैं। वे दिनों दिन रहस्य होते जा रहे हैं। आपके सामने बीजेपी का एक कार्यकर्ता खड़ा है। जिसे आप जानते हैं, पहचानते हैं। गले लगाते हैं और नाराज़गी ज़ाहिर करते हैं। मगर अब वो सिर्फ एक इंसानी रोबोट है। बल्कि वो कुछ भी नहीं है। प्लास्टिक के खिलौने की तरह उसका काम है चौराहे पर लगाए गए शामियाने या किसी धरना प्रदर्शन में जाकर खड़े हो जाना चाकि लगे कि वहां कोई पार्टी है। दरअसल अब पार्टी वहां नहीं हैं। पार्टी वहां हैं जहां ABM जैसे नेटवर्क हैं।
दुनिया भर में ऐसे गुप्त संगठन जिनके पास डेटा को समझने और हासिल करने की ताकत होती है, अब चुनावों को प्रभावित कर रहे हैं। अभी ही ये नेटवर्क जीवंत कार्यकर्ताओं से लैस पार्टी को विस्थापित कर चुके हैं। पार्टी इनके ही बनाए प्लान के हिसाब से काम करती है। काम में आप यह शामिल करें कि कार्यकर्ता सिर्फ इनके बनाए व्हाट्एस एप मीम को फार्वर्ड करने और फेसुबक पेज को लाइक करने का एजेंट बनकर रह जाता है।
यह बदलाव सभी दलों में धीरे-धीरे आ रहा है मगर बीजेपी के पास संसाधन बहुत है इसलिए उसका नेटवर्क कहीं ज़्यादा परिपक्व हो चुका है। पार्टी के भीतर भी कुछ नेता छोटे स्तर पर ऐसे नेटवर्क बना रहे हैं। अगली बार जब वर्चस्व की लड़ाई होगी तो इन नेताओं के बीच इन नेटवर्क की भूमिका ख़तरनाक हो जाएगी। हफ पोस् की इस रिपोर्ट को ज़रूर पढ़िए कि कैसे 2014 से पहले एक एन जी ओ बनाया जाता है। तीन साल वह बेकार रहता है फिर उसका नाम बदल कर Assocation of Billion Minds, ABM कर दिया गया। इसका कुछ भी पब्लिक में नहीं है। कानून के नियम ऐसे हैं जिसका लाभ उठाकर इस तरह का संगठन बनाया गया है। आप नहीं जान सकेंगे कि इसे चलाने के लिए कौन पैसा दे रहा है। बीजेपी पैसा दे रही है तो वह भी जान सकेंगे जिससे कि इस ख़र्च को आप चुनावी ख़र्च में जोड़ा जा सके।
अमन सेठी की यह रिपोर्ट मौजूदा समय में राजनीतिक दलों के भीतर फाइनांस की तस्वीर को भी सामने लाती है। इनका एक ही काम है। मुद्दों को गढ़ना, हवा बनाना और पार्टी या व्यक्ति के हाथ में सत्ता सौंप देना ताकि वह फिर सत्ता में आकर बिजनेस घरानों पर सरकारी खज़ाना लुटा सके। सोचिए अमित शाह से संबंधित एक ऐसी टीम है जो फेक न्यूज़ फैलाती है। फर्ज़ी वेबसाइट लांच करती है। यह नए दौर की अनैतिकता है। जिसके बारे में सामान्य पाठकों को पता नहीं है। अंग्रेज़ी में इस रिपोर्ट को आप ध्यान से पढ़ें। हो सके तो दो बार पढ़ें।
हिन्दी के एक पाठक ने सवाल किया कि हिन्दी में ऐसी रिपोर्ट क्यों नहीं होती। जवाब में कई कारण बता सकता हूं लेकिन हिन्दी में ऐसी रिपोर्ट नहीं हो सकती है। हिन्दी पत्रकारिता का मानव संसाधन औसत से 99 अंक नीचे है। शून्य से एक पायदान ऊपर मगर अहंकार में सबसे ऊपर। आप पिछले पांच साल के दौरान एक खबर नहीं बता सकते हैं जो इस तरह की हो और उसे किसी हिन्दी पत्रकार ने की हो।
भविष्य के हिन्दी पत्रकारों के लिए यह सवाल बहुत शानदार है कि हिन्दी में ऐसी रिपोर्ट क्यों नहीं होती है। जवाब के लिए ज़रूरी है कि जो छात्र हिन्दी पत्रकारिता पढ़ रहे हैं, उन्हें ऐसी रिपोर्ट को बार बार पढ़नी चाहिए और इस पर नोट्स बनाने चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि कोई न कोई बंदा निकलेगा जो अमन सेठी के स्तर की पत्रकारिता करेगा। आने वाले समय में वही अच्छा पत्रकार बनेगा जो कानून, डेटा और अकाउंट की बारीक समझ रखता हो। मुझे कोई कंपनी के पेपर्स दे जाता है तो हाथ-पांव फूल जाते हैं। समझ ही नहीं आता है कि कहां क्या हो रहा है। कैसे उन कागज़ात से चोरी पकड़नी है।
अगर आप पाठक हैं तो हफिंगटन पोस्ट के इस लंबी रिपोर्ट को पढ़िए। अंग्रेज़ी नहीं आती है तब भी पढ़िए। जानने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि हमारे राजनीतिक दल किस तरह रहस्यमयी और निजी संगठनों की जेब में चले गए हैं। उस जेब में हाथ सिर्फ एक या दो ही नेता डाल सकते हैं। लाखों कार्यकर्ताओं को अंधेरे में रखा जा रहा है ताकि वे सिर्फ नारे लगाने की मशीन बने रहें। एक मतदाता को यह जानने के लिए पढ़ना चाहिए कि वह जिन मुद्दों को देश के भविष्य के लिए समझता है क्या वे मुददे वास्तिवक हैं या उसके अपने मुद्दों को गोबर से ढंक देने के लिए गढ़े गए हैं। अच्छी रिपोर्ट वही होती है जिसे पढ़ने में सबका भला हो। आमीन।

यहाँ पर क्लिक करके अमन सेठी द्वारा लिखे गए हफिंग्टन पोस्ट के उस अंग्रेज़ी लेख को पढ़ सकते हैं

नोट: यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार की फ़ेसबुक वाल से लिया गया है

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इलेक्शन अपडेट्स

कांग्रेस सत्ता में आई तो पाकिस्तान में जश्न मानेगा – विजय रूपाणी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ( Vijay Rupani ) ने मेहसाणा की एक सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधटे हुये कहा कि यदि 2019 में कांग्रेस सत्ता में वापस आई तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे.
रूपाणी ने नेता सैम पित्रोदा द्वारा बालाकोट हवाई हमले वाले बयान पर हमला करते हुए कहा, ‘पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की शरणस्थली है और राहुल गांधी के शिक्षक सैम पित्रोदा कहते हैं कि पांच-सात युवकों (जिन्होंने पुलवामा हमला किया) के लिए पाकिस्तान को दोष देना गलत है. कांग्रेस नेता पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं.’
बाद में रूपानी ने कहा कि जब 23 मई को रिज़ल्ट आएगा तो नरेंद्र भाई की जीत पक्की हो जाएगी, जिसके बाद पाकिस्तान में शोक मनाया जायेगा.

ये पहली बार नहीं है, जब भाजपा नेताओं द्वारा पकिस्तान के नाम पर वोट मांगे गए हों

दरअसल ये बात बहुत ज़्यादा फ़ेमस हो चुकी है, कि चुनाव आते ही भाजपा नेताओं को पाकिस्तान याद आने लगता है. इसके पहले भी अमित शाह कई बार विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा की हार पर पाकिस्तान में जश्न वाला बयान दे चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात विधानसभा चुनावों के समय दिया गया वो बयान तो याद होगा,, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान में उन्हें सत्ता से हटाने की साज़िश रची जा रही है.
बिहार में गिरिराज सिंह हों या फिर गृहमंत्री राजनाथ सिंह. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बयानों में अब पाकिस्तान सामान्य शब्द बन चुका है, या यूं कहिये पाकिस्तान वो बटन है, जिसे दबाने पर भाजपा के लिए वोटों का बल्ब जल उठता है.

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इलेक्शन अपडेट्स

कांग्रेस की आठवी सूची में मध्यप्रदेश के 9 उम्मीदवारों के नाम

नई दिल्ली: कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र अपनी आठवी सूची जारी कर दी है. इस सूची में जहाँ कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के नाम हैं. वहीं मध्यप्रदेश के उमीदवारों के पहली बार नाम आये हैं. इस सूची में कुल 38 नाम हैं, जिसमें से 9 नाम मध्यप्रदेश के हैं.

भोपाल से लड़ेंगे दिग्विजय सिंह

वैसे तो इस लिस्ट के आने के पहले ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बात का ख़ुलासा कर दिया था, कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ( Digvijay Singh ) भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. जब यह सूची आई तो इसमें मध्यप्रदेश के उम्मीदारों के नामों में भोपाल से दिग्विजय सिंह का नाम देखकर कोई नहीं चौंका. क्योंकि यह ख़बर पहले ही बाहर आ चुकी थी.
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मीनाक्षी नटराजन मंदसौर से तो कांतिलाल भूरिया रतलाम से

इस सूची में मध्यप्रदेश के दो और बड़े नामों का ऐलान हुआ है. राहुल गाँधी की क़रीबी, राजीव गाँधी पंचायती राज संगठन की प्रमुख और मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natrajan) को पुनः मंदसौर से उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ( Kntilal Bhuria ) को रतलाम से उम्मीदवार बनाया गया है. कांतिलाल भूरिया फ़िलहाल रतलाम से सांसद हैं. प्रदेश के बड़े आदिवासी चहरों में से एक कांतिलाल भूरिया मध्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और मनमोहन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. ये दोनों ही नाम मालवांचल के बड़े राजनीतिक नाम हैं.

बालाघाट से मधु भगत बनाये गए हैं उम्मीदवार

बालाघाट लोकसभा क्षेत्र से परसवाड़ा के पूर्व विधायक मधु भगत ( Madhu Bhagat ) को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है. मधु भगत पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही लोकसभा के प्रमुख दावेदारों में से एक माने जा रहे थे. वो लगातार क्षेत्र में घूम रहे थे.

 
वहीं मध्यप्रदेश की अन्य सीटों में बैतूल से रामू टेकाम, खजुराहो से कविता सिंह, शहडोल से प्रमिला सिंह, टीकमगढ़ से किरण अहिरवार, होशंगाबाद से शैलेंद्र दीवान को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है.

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हरियाणा

हरियाणा: परिवार को लाठी डंडे से पीटा और कहा पाकिस्तान जाओ

द इंडियन एक्सप्रेस में शनिवार (23 मार्च 2019) को एक ख़बर पब्लिश हुई, उस ख़बर के अनुसार अज्ञात लोगों के एक समूह ने गुरुवार को गुरुग्राम ( गुडगाँव ) के भोंडसी में एक मुस्लिम परिवार के साथ उनके ही घर में मारपीट की. जिस परिवार के साथ मारपीट की गई उसने अपनी पुलिस शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उन्हें “पाकिस्तान जाने” के लिए कहा और उन्हें अपना घर खाली करने की धमकी दी.
न्यूज 18 के मुताबिक, छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सहायक पुलिस आयुक्त शमशेर सिंह ने कहा, “हमने भोंडसी पुलिस स्टेशन में हमलावरों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य प्रासंगिक धाराओं पर मामला दर्ज किया है,” घर के किसी सदस्य द्वारा वीडियो तैयार किया गया था, उस वीडियो के आधार पर ही आरोपियों को गिरफ़्तार किया और लोगों को पहचाना जा रहा है. घटना का वीडियो वायरल हो चुका है.
https://twitter.com/syedfarmanahmed/status/1109036078021763072
अपनी शिकायत में, 28 वर्षीय मोहम्मद दिलशाद ने कहा कि वह घर के पास अपने कज़िन भाइयों के साथ क्रिकेट खेल रहा था. दो मोटरसाइकिल वालों ने गाड़ी रोका और उनके खिलाफ सांप्रदायिक गालियों और शब्दों  का उपयोग करना शुरू कर दिया. जब उनके चाचा मोहम्मद साजिद ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो उन लोगों ने उन्हें कथित रूप से थप्पड़ मारा और चले गए. उसके बाद वो ढेर सारे लोगों के साथ मोटरसाईकिल में लाठी और लोहे की छड़ के साथ वापस आये.अंग्रेज़ी अखबार द इन्डियन एक्सप्रेस को मोहम्मद दिलशाद ने बताया कि जब वो लोग आये तो घर के बाहर से आवाज़ लगाकर हमें बाहर आने के लिए बोलने लगे, और ये कहने लगे कि बाहर नहीं आये तो वो हमें मार डालेंगे. जब हम लोग बाहर नहीं गए तो उन्होंने घर में घुसने की कोशिश की और कामयाब हो गए. अंदर पहुँचते ही उन्होंने मारपीट शुरू कर दी.
Gurgaon Muslim family beaten video
मोहम्मद साजिद की पत्नी ने कहा कि आरोपी कीमती सामान और नकदी लेकर कारों और खिड़कियों को क्षतिग्रस्त कर भाग गए. पुलिस ने दंगा भड़काने, गैरकानूनी तौर पे इकठ्ठा होने, हत्या की कोशिश, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, घर में उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के लिए मामला दर्ज किया है. गुरुग्राम पुलिस के अनुसार यह झगड़ा क्रिकेट मैच से शुरू हुआ था.

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राजनीति

ख़त्म हुआ आडवानी युग, गांधीनगर से अमित शाह लड़ेंगे चुनाव

लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनज़र आज भाजपा ने अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में भारतीय जनता पार्टी ने 184 उम्मीदवारों का ऐलान किया है. पर इस लिस्ट में कई चौकाने वाली बातें सामने आई हैं. भाजपा ने गुजरात के गांधीनगर से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का टिकट काट दिया है, वहां से अमित शाह को उम्मीदवार बनाया गया है. ज्ञात होकि गांधीनगर से फ़िलहाल लालकृष्ण आडवाणी सांसद हैं. उत्तर प्रदेश में कुल 80 सीटें हैं लेकिन पहली लिस्ट में सिर्फ़ 28 नामों की घोषणा की गई है. इस लिस्ट के अनुसार भाजपा ने अपने छह मौजूदा सांसदों की टिकट काट दी है.
लोकसभा चुनाव
लोकसभा चुनाव
इस लिस्ट में उत्तरप्रदेश की अन्य सीटों से भी नए नाम हैं. वहीं अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ़ स्मृति ईरानी फिर से टाल ठोकती नज़र आएंगी. तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से ही एक बार फिर किस्मत आज़माएंगे. वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से उम्मीदवार बनाये गए हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपनी घरेलू सीट से नागपुर से एक बार फिर चुनावी मैदान में होंगे.
इस लिस्ट में मध्यप्रदेश के एक भी उमीदवार का ऐलान नहीं किया गया है. वहीं साथ ही ये ऐलान भी किया गया है, कि बिहार के 17 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान बिहार के गठबंधन के साथियों के साथ किया जायेगा. इस लिस्ट में यूपी, उत्तरखंड, राजस्थान, गुजरात, छतीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम, जम्मू एवं कश्मीर, केरल, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक , अंडमान निकोबार व अरुणांचल प्रदेश के कुल 184 उम्मीदारों के नाम का ऐलान किया गया है.
लोकसभा चुनाव

 
गुरुवार ( 21 मार्च 2019 ) को देर शाम बीजेपी के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के केंद्रीय चुनाव समीति के सचिव जेपी नड्डा ने 184 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की. नामों की घोषणा से पहले क़यास लगाए जा रहे थे कि इस बार बीजेपी के कई बड़े नामों को उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा. जैसे ही जेपी नड्डा ने नाम पढ़ना शुरू किया सबसे चौंकाने वाला नाम था भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का. अमित शाह गांधीनगर से चुनाव लड़ेंगे.
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भाजपा की इस लिस्ट पर लालकृष्ण आडवानी का नाम न आने पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने कहा – पहले श्री लाल कृष्ण अडवाणी को ज़बरन ‘मार्ग दर्शक’ मंडल में भेज दिया, अब उनकी संसदीय सीट भी छीन ली. जब मोदीजी बुज़ुर्गों का आदर नहीं करते, वह जनता के विश्वास का आदर कहाँ करेंगे? भाजपा भगाओ, देश बचाओ.

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अंतर्राष्ट्रीय

न्यूज़ीलैंड हमले का जश्न मनाने वाले भारतीय को नौकरी से निकाला

दुबई  स्थित ट्रांसगार्ड ग्रुप के एक कर्मचारी को न्यूजीलैंड में आतंकवादी हमलों का जश्न मनाते हुए फेसबुक पर एक टिप्पणी पोस्ट करने के लिए बर्खास्त और निर्वासित किया गया है. 15 मार्च को क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के दौरान हुए आतंकी हमलों में 50 लोग मारे गए थे.
“सप्ताहांत में, एक ट्रांसगार्ड ग्रुप के कर्मचारी ने अपने व्यक्तिगत फेसबुक अकाउंट पर क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड की मस्जिद में हुए आतंकी हमले का जश्न मनाया और भड़काऊ टिप्पणियां कीं. उसके बाद उस व्यक्ति की आंतरिक जांच की गई, जिससे बाद यह तथ्य सामने आया कि यह व्यक्ति सोशल मीडिया में अपनी पहचान छुपाकर अपने विचार व्यक्त कर रहा था.
इस व्यक्ति की वास्तविक पहचान की पुष्टि करने के बाद, उसे ट्रांसगार्ड द्वारा पकड़ा गया, उसकी सुरक्षा क्रेडेंशियल्स छीन ली गई, साथ ही उसे नौकरी से निकाल दिया गया. कंपनी की नीति और यूएई के सायबर क्राईम सम्बंधित क़ानून नंबर 5, 2012 के तहत संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया.
https://twitter.com/ibizavillasrent/status/1108279396215840768
ट्रांसगार्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर ग्रेग वार्ड ने मंगलवार को गल्फ न्यूज को दिए एक बयान में कहा, “सोशल मीडिया के अनुचित उपयोग के लिए हमारे पास शून्य-सहिष्णुता की नीति है, और इसलिए उक्त व्यक्ति को तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया और संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया।”
ट्रांसगार्ड द्वारा दिए गए बयान में कहा गया है कि “यूएई के कड़े साइबर क्राइम नियमों के समर्थन में ट्रांसगार्ड द्वारा दीर्घकालिक सोशलमीडिया नीति स्थापित की गई थी, जिसके अनुसार नियमित निगरानी, ​​मूल्यांकन और यदि आवश्यक हो, तो संघीय कानून के अनुसार, जुर्माना, समाप्ति और निर्वासन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
https://twitter.com/mir_shuaib/status/1106811348296581120
उस ट्रांसगार्ड स्टाफ ने अपनी फ़ेसबुक टिपण्णी में केवल नरसंहार पर खुशी व्यक्त नहीं की थी, बल्कि उसने शुक्रवार की प्रार्थना के दौरान अन्य मस्जिदों पर भी इसी तरह के हमलों का आह्वान किया था.
यह पहली बार नहीं है जब किसी को सोशल मीडिया पोस्ट के कारण निकाल दिया गया हो. पिछले साल दुबई में एक 56 वर्षीय व्यक्ति को फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड करने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था, जिसमें उसने केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन को मारने और उनके परिवार का बलात्कार करने की धमकी दी थी.2017 में, एक अन्य व्यक्ति को पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ आपत्तिजनक फेसबुक संदेश पोस्ट करने के लिए बर्खास्त कर दिया गया था. 31 वर्षीय वह व्यक्ति दुबई में एक पेंट कंपनी कंपनी में कार्य करता था.

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महाराष्ट्र

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोषित तबकों की आवाज़ बन चुकी हैं मनीषा बांगर

14 अप्रैल 2013 का वह एक खास क्षण था. जब डॉ. मनीषा बांगर ( Dr Manisha Bnagar ) उस कोलम्बिया युनिवर्सिटी ( Columbia University ) में मौजूद थीं जहां कोई सौ वर्ष पहले बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर ( Dr Bhimrao Ambedkar ) उच्च शिक्षा प्राप्त करने पहुंचे थे. डॉ मनीषा, ‘हंडरेड ईयर्स ऑफ कोलम्बियन एक्सपीरियेंस ऑफ बीआर अम्बेडकर’ नामक समारोह का हिस्सा बनीं थीं और वहां उन्होंने अपने विचार रखे थे. कोलम्बिया युनिवर्सिटी के लेक्चर थिएटर्स, हास्टल और तमाम दरो दीवार जहां बाबा साहब ने अपना समय बिताया था, उन्हें स्पर्श कर, उन्हें महसूस कर और पल भर के लिए जी कर मनीषा की संवेदनायें उत्प्रेरित और ऊर्जान्वित हो गयी थीं. यही वह विश्वविद्यालय था जहां से उच्च शिक्षा प्राप्त कर बाबा साहब जब भारत लौटे थे तो दशकों के संघर्ष के बाद उन्होंने देश के शोषित समुदायों के लिए संवैधानिक अधिकारों का बड़ा हथियार थमा दिया था.

कोलम्बिया में रहते हुए मनीषा के दिमाग में यह बात कौंध रही थी कि बाबा साहब के प्रयासों से भले ही सदियों की गुलामी के बाद शोषित जातियों को संवैधानिक अधिकार दस्तावेजों में तो मिल गये पर व्यावहारिक तौर पर अब भी वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से वंचित हैं. बाबा साहब के इन अधूरे सपनों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है. उस समय मनीषा के मन में यही विचार आ रहे थे कि बाबा साहब के सपनों को साकार करना बहुजन नेतृत्व पर बाबा साहब का बड़ा कर्ज जैसा है. यूं तो मनीषा ने अपने जीवन के सुख-सुविधाओं को त्याग कर पिछले दो दशकों से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसी दिशा में काम कर रही हैं. लेकिन कोलम्बिया युनिवर्सिटी में बाबा साहब को याद करते हुए अपने संघर्ष के प्रति उनका समर्पन और बढ़ गया.

हैदराबाद के एक विख्यात हास्पिटल में बतौर डॉक्टर अपनी सेवा देकर वैभवशाली जीवन व्यतीत करने वाली मनीषा में जो सबसे बड़ा बदलाव आया वह यह कि उन्होंने हर सुख-सुविधा का त्याग दिया और वंचित समाज के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया. वह देश के विभिन्न मंचों पर ब्रह्मणवादी शोषण के खिलाफ जहां आवाज उठाती रही हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वह अनुसूचित जातियों-जन जातियों, ओबीसी, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बेबाकी से अपना पक्ष रखती रही हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके इन योगदान की न सिर्फ सराहना हुई बल्कि इसका व्यापक प्रभाव भी पड़ा. इतना ही उनके इन योगदान पर  मनटेसा सिटी, कैलिफोर्निया के मेयर ने 2017 में ‘ग्लोबल बहुजन अवार्ड’ से सम्मानित किया. मनीषा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिख समुदाय के लिए भी बड़े योगदान की चर्चा 2018 में तब हुई जब उन्होंने कनाडा के मुख्य गुरुद्वारा से बैसाखी के अवसर पर पांच लाख से ज्यादा सिखों को संबोधित किया.

बामसेफ के ऑफसुट आर्गनाइजेशन मूल निवासी महिला संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष व मूल निवासी संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत अनेक जिम्मेदारियों को निभाने के अलावा दीगर अन्य संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिका में वह संयुक्त राष्ट्र संघ सरीखे दुनिया के शीर्ष प्लेटफॉर्मों पर मजबूती से वंचित समाज की आवाजें उठाती रही हैं. उसी कोलम्बिया युनिवर्सिटी ने उन्हें 2014 में फिर याद किया जहां उन्होंने ‘अंडरस्टैंडिंग कास्ट ग्लोबली’ विषय पर आयोजित कांफ्रेंस में अपने तथ्यपरक वकतव्य से भारतीय जातिवाद की अमानवीय व क्रूर पहलुओं को उजागर करके अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बोटोरीं.

मनीषा बांगर एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोषित समुदायों की आवाज बन चुकी हैं वहीं भारत में रहते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर वंचित वर्ग के शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ लगातार जद्दोजहद कर रही हैं. उनके नेतृत्व क्षमता को सम्मान देते हुए पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में नागपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरा है. मनीषा का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से है. मनीषा की संगठन क्षमता, नेतृत्व और जमीनी संघर्ष का नतीजा है कि उन्हें नागपुर की बहुजन जनता का उन्हें उत्साहवर्धक समर्थन मिल रहा है.

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देश

नफ़रत के कारण होने वाले अपराधों के विरुद्ध जवाबदेही तय हो

नई दिल्ली: सोमवार 18 मार्च को,  दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें कई नागरिक और मानवाधिकार संगठन एक मंच पर साथ आए. स्टेप टूवर्ड्स होप ‘Steps Towards Hope’ शीर्षक के साथ आयोजित इस प्रोग्राम का उद्देश्य संवैधानिक रूप से अनिवार्य नागरिक अधिकारों को मज़बूत करने की आवश्यकता और नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 5 साल में किये गए कार्यों का जायज़ा लेना था. इसका आयोजन युनाइटेड अगेंस्ट हेट के साथ PVCHR, PUCL (दिल्ली), यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम, क्विल फाउंडेशन, रिहाईमंच और APCR द्वारा किया गया था.
कार्यक्रम के वक्ताओं में ऐसे कार्यकर्ता, पत्रकार और वकील शामिल थे, जिन्होंने उन मुद्दों को सामने लाया था, जिनमें वर्तमान शासन के द्वारा अन्याय किया गया था. उन्होंने ऐसी सरकारों के उदाहरण भी दिए जिन्होंने नियम और क़ानून को ताक में रखकर कार्य किया, जैसे यूपी में मुठभेड़ के नाम पर हुई अतिरिक्त क़ानूनी हत्याओं में सरकार की भूमिका और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा में सक्रीय भूमिका निभाने वालों को सत्ता द्वारा की गई मदद, जैसे की बाबू बजरंगी.
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रिहाई मंच, वह संगठन जिसने बड़े पैमाने पर घृणा अपराधों और यूपी में कानून-व्यवस्था की विफलता पर काम किया है. रिहाई मंच के राजीव यादव  ने उन तरीकों की ओर ध्यान दिलाया. जिनमें हिंसा को जानबूझकर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि ऐसी हिंसा के शिकार अधिकांश लोग हाशिए में ला दिए गए (दलित, पिछड़े, शोषित, अल्पसंख्यक) समुदायों से हैं. यूपी में हुई कथित मुठभेड़ों के शिकार ज्यादातर लोग निचली जातियों के थे.
Quil फाउंडेशन के फ़वाज़ शाहीन ने उनके संगठन द्वारा रिसर्च किये गए एक आंकड़े के मुताबिक बताया कि इस सरकार के शासन में किये गए घृणा अपराध ( Hate Crime ) का आंकड़ा 759 है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अनुपात में किया जाने वाला अपराध एक राष्ट्रीय सनाक्त है, जिसे सुनियोजित तरीक़े से किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि धार्मिक घृणा का सरलीकरण या अघोषित रूप से उसे सामाजिक मान्यता मिल जाना ही इस तरह के अपराधों की मुख्य वजह है.
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पत्रकार निरंजन टाकले जिन्होंने जज लोया की संदिग्ध परिस्तिथियों में हुई मृत्यु की ख़बर को बड़े पैमाने में उठाया था, उन्होंने इतिहास के साथ हो रहे खिलवाड़ और पुनर्लेखन के बारे में बताया, उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के सामने वीरता रखने वाले लोगों को इतिहास से बाहर करने का कार्य इस सरकार के द्वारा किया जा रहा है. ये फ़ासीवाद के लक्षण हैं, जोकि हर उस व्यक्ति को प्रभावित करेगा जो उसके रास्ते में आयेगा.
बिहार के सीतामढ़ी में दो मुस्लिम युवकों की हिरासत में मौत के बाद वहां का दौरा करने वाली फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्यों ने उस संदिग्ध माहौल के बारे में बात की, जिसमें गुफरान और तस्लीम की मृत्यु हो गई और उन्हें न्याय देने के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं हुई.
सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अपने संघर्ष के बारे में बताया, साथ ही सही संघर्षशील लोगों की एकता की ज़रूरत पर भी बात की. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों को सिर्फ उन्हें निशाना बनाए जाने के लिए याद नहीं किया जायेगा, बल्कि कुछ बड़े आंदोलनों के लिए भी पिछले कुछ वर्ष याद किये जायेंगे.
AIKS के जनरल सेक्रटरी हन्नान मोल्ला, जिनके नेतृत्व में देश के विभिन्न हिस्सों में कई बड़े और प्रभावी किसान मार्च आयोजित किए गए थे, उन्होंने सभी हाशिए के लोगों को फासीवादी शक्तियों को हराने के लिए एकजुटता बनाने प्रदान की. उन्होंने जन आंदोलनों की आवश्यकता को महत्व दिया और बताया कि किस तरह किसान आंदोलनों के कारण किसानों की दुर्दशा एक केंद्रीय मुद्दा बन गया है. यही बात छत्तीसगढ़ की आदवासी अधिकारों के लिए लड़ने वालीं सामजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी द्वारा भी कही गई, जोकि आदिवासियों को उनकी भूमि और आजीविका बचाने के लिए कार्य कर रही हैं. उन्होंने बताया कि किस तरह से केंद्र और राज्य सरकारों ने छतीसगढ़ में आदिवासियों और मुसलमानों को हाशिये में ला दिया है, ताकि छातीसगढ़ में कार्पोरेट लूट बेरोकटोक जारी रहे.
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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार की कई जनविरोधी नीतियों के बारे में बात की, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर रतनलाल द्वारा बताया गया कि किस तरह से सामूहिक आंदोलनों के माध्यम से, ब्राह्मणवाद और वंशवाद को आगे बढ़ाने के अपने एजेंडे पर सरकार कार्य कर रही है, उनके द्वारा विश्वविद्यालय की नियुक्ति के पदों में 13 अंकों के रोस्टर मुद्दे के रूप में विस्तृत जानकारी दी गई.
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय हेगड़े ने लिंचिंग और घृणा अपराध के मामलों में न्याय हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और उन्हें रोकने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता जताई. कार्यक्रम में विचार-विमर्श का एक प्रमुख हिस्सा हालांकि घृणा और कट्टरता का अपराध था जिसने हमारे नागरिक जीवन को प्रभावित किया है,  इसकी संस्थागत प्रकृति और इससे व्यवस्थित तरीके से मुकाबला करने की आवश्यकता है. यूनाइटेड अगेंस्ट हेट द्वारा तैयार किये गए एक चार्टर पर चर्चा की गई, जोकि ऐसी सुनियोजित घृणा के खिलाफ मांगों और एजेंडे पर आधारित था. इसे मेनिफेस्टो अगेंस्ट हेट का नाम दिया गया था.
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विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को अपने एजेंडे के साथ जवाब देने के लिए कहा गया, कि वो बताये कि कैसे एक निश्चित कार्यक्रम के साथ वो लोकतंत्र की इस तोड़फोड़ का मुक़ाबला करने जा रहे हैं. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिन राव ने कहा कि गांधी की भूमि में, किसी भी क्रांतिकारी आंदोलन को अहिंसा के माध्यम से लड़ना पड़ता है और हर सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन को संवैधानिक नैतिकता पर आधारित होना पड़ता है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अली खान ने  देश की जनता से जुड़े सभी मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया.
योगेंद्रयादव ने प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष ताकतों द्वारा भारत की धर्म और समग्र संस्कृति को पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसे कट्टरपंथी ताकतों द्वारा हाईजेक कर लिया गया है. भाकपा (एमएल) की कविता कृष्णन द्वारा इसे समर्थन दिया गया, उन्होंने यह भी कहा  कि गौ रक्षा अधिनियम जैसे कानून जो नफ़रत की हिंसा के बहाने इस्तेमाल किए जाते हैं, उनका हमारी क़ानून की किताबों में कोई स्थान नहीं होना चाहिए. आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि दिलीप पांडे ने कहा कि भाजपा, जो हिंदुओं की पार्टी होने का दावा करती है, अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है और इसका हिंदुओं के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है.

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देश

मनोहर परिर्कर का निधन, वायरल हुई थी स्कूटर पर घूमने वाली तस्वीर

देश के पूर्व रक्षामंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिर्कर का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया है. मनोहर परिर्कर अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित थे. मनोहर परिर्कर देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जो आईआईटी से पासआउट थे.
मनोहर परिर्कर अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे, गोवा की राजनीति में ख़ासा दखल रखने वाले परिर्कर ( Manohar Parirkar ) की मृत्यु के बाद गोवा की राजनीति में खालीपन आ गया है. गोवा की गलियों में मनोहर परिर्कर को लोगों ने अपनी स्कूटर से घुमते हुए भी देखा है. मनोहर परिर्कर की यही सादगी थी, जिसकी वजह से वो गोवा में मनोहर परिर्कर बेहद ही लोकप्रीय थे. गोवा के मछली मार्केट में स्कूटर से घुमते मनोहर परिर्कर की तस्वीर बहुत वायरल हुई थी.

परिर्कर की मृत्यु की ख़बर आने के बाद देश की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है. वहीं सरकार ने एक दिन के शोक का ऐलान किया है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट करके परिर्कर को श्रृद्धांजलि दी, उन्होंने ट्वीट किया – गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर के निधन के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। उन्होंने दृढ़ता और गरिमा से अपनी बीमारी का सामना किया। सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा और समर्पण के प्रतीक रहे श्री पर्रिकर ने गोवा की और भारत की जो सेवा की है, वह हमेशा याद रखी जाएगी— राष्ट्रपति कोविन्द


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया – श्री मनोहर पर्रिकर एक अद्वितीय नेता थे. एक सच्चे देशभक्त और असाधारण प्रशासक, सभी उनकी प्रशंसा करते थे. राष्ट्र के प्रति उनकी त्रुटिहीन सेवा को पीढ़ियों द्वारा याद किया जाएगा. उनके निधन से गहरा दुख हुआ. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना। ॐ शांति


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया – गोवा के सीएम श्री मनोहर पर्रिकर जी के निधन की खबर से मुझे गहरा दुख हुआ है, वो बेहद गंभीर बीमारी से एक साल से जूझते रहे. वह सभी पार्टियों में सम्मानित और प्रशंसित व्यक्ति थे, वह गोवा के पसंदीदा बेटों में से एक थे. इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना.


उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया – लंबे वक्त से बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर जी का जाना दुखद! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिवार को शक्ति दे. राजनीतिक जीवन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. शत् शत् नमन!


कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया – श्री मनोहर परिर्कर के शोक संतप्त परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं. मैं उनसे केवल एक बार मिली थी, जब उन्होंने अस्पताल में मेरी मां से मुलाक़ात की थी. उनकी आत्मा को शान्ति प्राप्त हो.


गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया – मेरे प्रिय मित्र और गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर के निधन से गहरा दुख हुआ. वह अपनी ईमानदारी, निष्ठा और सादगी के लिए जाने जाते थे. उन्होंने बड़ी लगन के साथ देश और गोवा राज्य की सेवा की. उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना.


उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया – देश के एक कर्मठ कर्मयोगी के असमय जाने से मन व्यथित है. प्रशासनिक कार्यों में कड़क, व्यवहार में सौम्य और मृदुभाषी मनोहर पर्रिकर जी का निधन देश की अपूरणीय क्षति है.


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया – गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रिकर जी के निधन की ख़बर अत्यंत दुखद है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणो में स्थान व पीछे परिजनो को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे.


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया – गोवा के सीएम श्री मनोहर पर्रिकर जी के निधन की खबर पर अत्यंत दु: ख हुआ. राजनीति में सादगी का प्रतीक जिसने विनम्र जीवन व्यतीत किया वह अब हमारे साथ नहीं है. उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन कर सकने की ईश्वर शक्ति दे. उनके लिए प्रार्थना है.https://twitter.com/ArvindKejriwal/status/1107295822121709568
बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट किया है – गोवा के मुख्यमंत्री व पूर्व रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिकर के निधन की खबर अति-दुखःद है. वे काफी लम्बे समय से बीमार चल रहे थे. श्री परिकर बहुत लम्बे समय से राजनीति में सक्रिय रहे तथा चार बार गोवा के मुख्यमंत्री बने. उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना.


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया – गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जी के निधन पर दुख हुआ. उन्होंने धैर्यपूर्वक अपनी बीमारी का सामना किया. उनके परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना.


बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने ट्वीट किया – गोवा के मुख्यमंत्री, प्रख्यात राजनेता एवं समाजसेवी मनोहर पर्रिकर जी का निधन दुःखद. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें.


केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट किया – नि:शब्द हूं. सुशील और सादगीपूर्ण राजनीति का चेहरा आज खो गया. मनोहर भाई सही मायने में हर कार्यकर्ता के हृदय पर राज करने वाले नेता थे. राजनीति में शुरुआती दिनों से वे मेरे साथी और अच्छे मित्र थे. गोवा के विकास के लिए लिए आख़िरी साँस तक संघर्ष करने वाले भारत माँ के इस महान सपूत को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि. ॐ

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विशेष

विशेष रिपोर्ट – कौन हैं ये लोग, जो न्यूज़ीलैंड आतंकी हमले पर ख़ुश हो रहे हैं?

न्यूज़ीलैंड के क्राईस्टचर्च शहर की दो मस्जिदों में हुए आतंकवादी हमले के बाद से पूरी दुनिया स्तब्ध है, दरअसल न्यूज़ीलैंड एक बेहद ही शांतिप्रिय देश माना जाता है. एक ऑस्ट्रेलियाई श्वेत दक्षिणपंथी आतंकवादी द्वारा किये गए इस हमले में 49 लोगों की मृत्यु हुई और लगभग 20 लोग घायल हैं. हमलावर ने एक हैलमेट पहना हुआ था और उसपर कैमेरा लगाया हुआ था. जिससे वह फ़ेसबुक और इन्स्टाग्राम पर इस हमले की लाईव स्ट्रीमिंग कर रहा था, जोकि बेहद ही भयावह था.
एक तरफ़ इस हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है, तो वहीं दूसरी तरफ़ इस्लामोफ़ोबिया से ग्रस्त लोग इस हमले पर अपनी ख़ुशी व्यक्त करने से पीछे नहीं रह रहे हैं. कुछ दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग तो बाक़ायदा वीडियो बनाकर इस हमले को जस्टिफाई करने की कोशिश करते नज़र आ रहे हैं.

हमले को जस्टीफ़ाई कर रहे ऑस्ट्रेलियाई सांसद का हुआ विरोध

एक ऑस्ट्रेलियाई सांसद द्वारा जब मीडिया के सामने इस आतंकी हमले को सही ठहराने की कोशिश हुई, तो एक ऑस्ट्रेलियाई किशोर ने सांसद के सर पर अंडा फोड़कर विरोध जताया. जिसके बाद सांसद और उस किशोर के बीच हल्की फुल्की झड़प भी हुई. आर सुरक्षा गार्ड और वहां मौजूद लोगों के द्वारा दोनों को अलग किया गया. बाद में उस किशोर को पुलिस के द्वारा छोड़ दिया गया.

भारतीय दक्षिणपंथी भी नहीं हैं पीछे

इस पूरे मामले में बेहद ही घिनौना रूप भारतीय दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों का सामने आया. पूरा सोशलमीडिया दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों की घटिया मानसिकता के खिलाफ एक जुट नज़र आया. दरअसल जिस तरह से इस हमले पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए, भारत में भी ऐसे हमले करने की बात करते लोगों के कमेन्ट यह दर्शा रहेहैं, कि इस्लामोफ़ोबिया किस हद्द तक भारतीय जनमानस में समां गया है. किस तरह से ओपन प्लेटफोर्म में हिंसा की बात की जा रही है, अर्थात लोगों के अंदर से क़ानून का भय समाप्त हो चुका है.
ऐसे बहुत से घृणा फैलाने वाले कमेंट्स के स्क्रीनशॉट सोशलमीडिया में फ़ैल रहे थे, हमने ऐसी ही कुछ घटिया मानसिकता के साथ कमेंट करने वालों की पड़ताल की, आखिर कौन हैं ये लोग? जो इस तरह की मानसिकता का प्रदर्शन कर समाज और देश के लिए खतरा बने हुए हैं.

राजस्थान पुलिस में कार्यरत इस पुलिसवाले की सोच पर तरस आता है

हमारी नज़र में एक स्क्रीनशॉट आया जिसमें महावीर परिहार नामक व्यक्ति जोकि पुलिस की कैप लगाया हुआ था, बल्कि पुलिस की ड्रेस में था और नफ़रत फैलाने वाली भाषा का उपयोग करके कमेन्ट कर रहा था. देखें स्क्रीनशॉट और उस कमेन्ट की गंदगी पर गौर करें –


हमने महावीर की फ़ेसबुक आईडी को खंगाला, महावीर की फ़ेसबुक आईडी में साफ़ साफ़ लिखा है कि वो राजस्थान पुलिस में कार्यरत है. माऊंट आबू का रहने वाला है और राजस्थान के सिरोही में रहता है. tribunehindi.com ने राजस्थान पुलिस को ट्वीटर में मेंशन करते हुए उनके इस कर्मचारी के कृत्य की जानकारी ट्वीट के ज़रिये दे दी है.

भाजपा के समर्थन में ट्वीट करने वाला हिंदुत्ववादी लेख़क, पब्लिक स्पीकर और अधिवक्ता द्वारा घटना को सही साबित करने कोशिश करता वायरल वीडियो

एक वीडियो भी सोशलमीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति न्यूज़ीलैंड में हुए इस आतंकी हमले को सही ठहराने की कोशिश करता नज़र आता है, अपने वीडियो में वह शख्स इस आतंकी हमले को रक्षात्मक क्रिया बता रहा है. साथ ही वह इसे क्रिया की प्रतिक्रिया बताने की कोशिश कर रहा है. साथ ही एक चेतावनी भी दे रहा है. इस वीडियो का सबसे घिनौना हिस्सा वही है, जहाँ पर यह व्यक्ति चेतावनी शब्द का उपयोग कर रहा है.


इस व्यक्ति की ट्वीटर प्रोफ़ाईल चैक करने पर हमें इसका नाम पता चला. ट्वीटर में जो जानकारी है उसके मुताबिक नफ़रत फ़ैलाने वाले इस व्यक्ति का नाम प्रशान्त पटेल उमराव है. जोकि एक एडवोकेट है, इसके ट्वीटर बायो के मुताबिक़ यह एक पब्लिक स्पीकर भी है.

उत्तरप्रदेश के फ़तेहपुर का रहने वाले इस शख्स के वीडियो को जिस ट्वीटर हैंडल से शेयर किया गया है, वो हैंडल हैंडल @AhmAsmiYodha है. इस हैंडल की कवर पिक में एक पोस्टर लगा हुआ है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाथ जोड़े खड़े हुए हैं. राईट साईड कोने में मोदी ब्रिगेड का लोगो लगा हुआ है. उसके बाद कुंभ 2019 लिखा हुआ है. पीएम मोदी के लेफ्ट साईड में लिखा हुआ है- दिल से मोदी- फ़िर से मोदी.
इस हैंडल के बायो में लिखा है – धर्मो रक्षति रक्षितः , उसके बाद एड्रेस में लिखा है भगवान राम के चरणों में. इस ट्वीटर हैंडल को चैक करने पर इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के समर्थन में ट्वीट मिलेंगे.

जब हमने प्रशान्त पटेल उमराव की ट्वीटर वाल को चैक किया तो, न सिर्फ भाजपा के समर्थन में बल्कि भाजपा और पीएम मोदी का विरोध करने वालों के विरोध में आपत्तिजनक भाषा के साथ ट्वीट मिल जायेंगे. ऐसे में अंदाज़ा लगाया जा सकता है, कि इस्लामोफोबिया से ग्रसित यह व्यक्ति किस हद तक दूषित मानसिकता से देश व समाज को नुक्सान पहुंचा रहा है.
और भी बहुत से नफ़रत फैलाने वाले कमेन्ट बहुतायात में सोशल मीडिया में देखने को मिल रहे थे. उन्हें देखकर और पढ़कर आपको एक पल के लिए गुस्सा आ सकता है. पर आप इनमें से अधिकतर में से जिसकी भी प्रोफ़ाईल में जायेंगे आपको एक चीज़ कॉमन मिलेगी. सभी के सभी हिंदुत्व का झंडा उठाये हुए हैं. कुछ ही ऐसे लोग थे जो भाजपा विरोधी थे, पर अधिकतर वहीं थे जो  भाजपा और नरेंद्र मोदी के समर्थन में लिख रहे हैं. ऐसे में ये बात साफ़ हो जाती है, कि आखिर हिंदुत्व का झंडा उठाये इन लोगों के दिल व दिमाग में इतना ज़हर आया कहाँ से ? कौन हैं, वो लोग जो इनके मन और मस्तिष्क को दूषित कर रहे हैं?

खुद को नास्तिक बताने वाले आप समर्थक ने पार कर दीं सारी हदें

हरी सिंह नाम के इस शख्स ने आतंकवादी हमले के विरोध में कमेन्ट किया पर कमेन्ट करते हुए उसने सारी हदों को पार करते हुए घटिया कमेन्ट किया. इस शख्स की प्रोफ़ाईल चैक करने में ये पाया गया कि ये मोदी सरकार का परम विरोधी व्यक्ति है. भाजपा को पसंद नहीं करता, हिंदू मुस्लिम झगड़ों के खिलाफ बोलता है. पर यूपी के मेरठ के रहने वाले हरी सिंह ने कमेन्ट करते हुए अपना आपा खो दिया और एक ऐसा कमेंट कर बैठे, जो शायद उन्हें नहीं करना चाहिये था.

भाजपा व अतिदक्षिणपंथी संगठन हिंदू युवा वाहिनी का कार्यकर्ता मना रहा था जश्न

उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के अलावा बजरंग दल और हिन्दू युवा वाहिनी जैसे अति दक्षिणपंथी संगठन भी काफी निचले स्तर तक ज़हर फ़ैलाने में कामयाब रहे हैं. दरअसल ये बात सभी जानते हैं, पर हम यहाँ पर ये बात इसलिए कर रहे हैं. क्योंकि एक  आपत्तिजनक कमेन्ट करने वाली आईडी की जब हमने पड़ताल की तो हमें जो मिला. वो वर्तमान भारत में फ़ैल चुके ज़हर का वास्तविक नमूना था.
क्षत्रीय प्रशान्त सिंह सेंगर नामक आईडी को हमने फ़ेसबुक पर शेयर किया, अति उत्तेजित और भड़काऊ पोस्ट करने वाली उत्तरप्रदेश के बलिया ज़िले की है, साथ ही इसका संचालन करने वाला व्यक्ति रसड़ा नामक स्थान पर रहता है. इस आईडी के बायो में 2019 के चुनावों में भाजपा के मिशन बंगाल और उड़ीसा का ज़िक्र है, जिसके मुताबिक दोनों राज्यों को मिलाकर 45 सीटें जीतने का लक्ष्य भाजपा के द्वारा रखा गया है.
उस व्यक्ति की फ़ेसबुक आईडी को सर्च करने पर हमें पता चला कि यह व्यक्ति हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा दोनों ही से जुड़ा हुआ है. इस व्यक्ति की वाल देखने पर पता चलता है, कि यह भाजपा के समर्थन में पोस्ट करता है. साथ ही कई जगह अपनी भद्दी भाषा का उपयोग करते हुए विरोधी पार्टियों और धर्म विशेष के लोगों को टार्गेट करता है. सबसे आपत्तिजनक चीज़ यह थी, कि यह व्यक्ति खुलेआम हथियार , बंदूक की तस्वीरें पोस्ट करता रहता है.

ऐसे अपतिजनक कमेन्ट करने वालों की एक बड़ी तादाद है, जोकि न्यूज़ीलैंड में हुए आतंकी हमलों पर जश्न मन रहे थे. अगली रिपोर्ट में हम और भी चहरे बेनकाब करेंगे. तब तक आप उन स्क्रीनशॉट को देखकर उस दूषित मानसिकता को पहचाने और देखें की हमारा देश किस तरफ़ जा रहा है.

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