उद्योगपति कोई किसान या मज़दूर की तरह विशाल संख्या वाला समुदाय नहीं है। उद्योगपति के साथ जब नरेन्द्र मोदी खड़े होने की बात करते हैं तो आप उंगलियों पर गिन सकते हैं कि वो किनके साथ खड़े हैं। ये कौन लोग हैं, इनका रिकॉर्ड क्या रहा है? इन्होंने ‘देश के लिए’ क्या किया और सिस्टम को कितना बर्बाद किया और अपने रसूख के आधार पर सरकारों को कैसे नचाया?
नरेन्द्र मोदी ने ख़ुद अपने मुंह से क्रोनी कैपिटलिज़्म का समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री और उद्योगपति-2: मुकेश अंबानी

  1. 2016 में जस्टिस एपी शाह समिति ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी कि रिलायंस केजी बेसिन में सरकारी कंपनी ONGC की गैस चुराता रहा है। 10 हज़ार करोड़ रुपए का हर्जाना भरने को कहा था। अभी अंतरराष्ट्रीय पंचाट इस मामले को देख रहा है।
  2. सरकारी गैस चुराने वाले अंबानी के साथ दिखने में मोदी जी कोई ऐतराज नहीं है।
  3. 2015 में मुकेश अंबानी की RGTIL कंपनी 10 हज़ार करोड़ रुपए के घाटे में चली गई थी। सरकारी बैंकों का इस पर लोन था। 2020 तक चुकता करना था, मोदी जी की सरकार ने इसे बढ़ाकर 2030 कर दिया।
  4. नीरव मोदी जब PNB का पैसे लेकर भागे तो एक व्यक्ति गिरफ़्तार हुआ- विपुल अंबानी। ये आदमी मुकेश अंबानी का चचेरा भाई है। माना जाता है कि धीरूभाई अंबानी के कारोबार का एक टुकड़ा विपुल के खाते में गया और मुकेश अंबानी के साथ उनकी तगड़ी सेटिंग है।
  5. चार-पांच साल पहले मुकेश अंबानी के बेटे ने कार से दो लोगों को उड़ा दिया। चंद घंटों की सुगबुहाट के बाद मीडिया में ये ख़बर कहीं नहीं चली।
  6. मुकेश अंबानी और नीता अंबानी प्रधानमंत्री की पीठ पर ऐसे हाथ फेरते हैं जैसे वो उनके सेवक हों। प्रधानमंत्री को इससे भी कोई आपत्ति नहीं है।
  7. जियो के एडवरटीज़मेंट में नरेन्द्र मोदी की फुल पेज की तस्वीर छाप दी गई। जियो का मॉडल बनाकर प्रधानमंत्री को पेश किया गया, प्रधानमंत्री को इससे भी आपत्ति नहीं है। BSNL और MTNL मरे तो मरें।

यह भी पढ़ें

प्रधानमंत्री और उद्योगपति- पार्ट 1 “गौतम अडानी”

About Author

Dilip Khan

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *