पिछली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर मोदी सरकार के रुख पर सवाल उठाया है. चिदंबरम ने कश्मीर में कठोर सैन्य कार्रवाई के बाद भी हालात बेहतर ना होने को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है.
कांग्रेस नेता ने नए साल से पहले पुलवामा में CRPF कैंप पर आतंकी हमले का हवाला देते हुए कहा कि समय-समय पर हमें बड़ी निर्ममता से ये याद दिलाया जाता है कि जम्मू-कश्मीर राज्य से भी जुड़ा एक मुद्दा है.


चिदंबरम ने सिलसिले वार कई ट्वीट किया, ‘इस तरह का वाकया 30-31 दिसंबर, 2017 की रात को हुआ, जब आतंकियों ने पुलवामा जिले के लेथपोरा स्थित CRPF ट्रेनिंग सेंटर पर हमला किया, जिसमें सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हुए और तीन घायल हो गए. गुजरात चुनाव से पहले सरकार ने दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया, लेकिन ये स्पष्ट नहीं किया गया कि उनसे क्या करने को कहा गया है.’
 


कांग्रेस नेता के मुताबिक इसके बाद ये बताया गया कि दिनेश्वर शर्मा उन सभी से बातचीत के लिए तैयार हैं, जो उनसे मिलने के इच्छुक है. चिदंबरम ने सवाल किया, ‘ये दावा किया गया था कि कठोर और सख्त सैन्य गतिविधियों से घुसपैठ और आतंक का खात्मा होगा, क्या ऐसा हुआ?’


चिदंबरम के मुताबिक बुद्धिमानी इसमें होगी कि सक्रिय तौर पर जम्मू-कश्मीर मसले का राजनीतिक हल निकाला जाए. कश्मीर मसले का समाधान निकालने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी और डॉक्टर मनमोहन सिंह के कोशिशों को याद किया जाएगा. सभी पक्षों से बातचीत के जरिए ही आगे का रास्ता निकाला जा सकता है.


पूर्व वित्त मंत्री ने कहा है कि अभी भी सब कुछ नहीं खत्म हुआ है और वे सभी वार्ताकारों के विचारों का समर्थन करते हैं, पर ये कदम एक समग्र एजेंडे का हिस्सा होना चाहिए.


चिदंबरम ने एक टेबल का हवाला देते हुए सरकार कि वर्तमान नीति पर सवाल उठाया है. चिदंबरम ने पूछा है कि क्या मोदी सरकार की कठोर और सैन्यवादी नीति को मौका मिलना चाहिए.

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