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एलेक्टोरेल बांड एक सुनियोजित घोटाला है ?

एलेक्टोरेल बांड एक सुनियोजित घोटाला है ?

किसी भी राजनीतिक दल को मिलने वाले चंदे इलेक्टोरल बॉन्ड कहा जाता है. ये एक तरह का नोट ही है जो एक हज़ार, 10 हज़ार, एक लाख, 10 लाख और एक करोड़ तक आता है. कोई भी भारतीय नागरिक इसे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से खरीद सकता है और राजनीतिक पार्टी को चंदा दे सकता है। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए थे जिनके ज़रिए उद्योग और कारोबारी और आम लोग अपनी पहचान बताए बिना चंदा दे सकते हैं।
इलेक्टोरल बॉन्ड्स में पारदर्शिता की कमी को लेकर चुनाव आयोग लगातार सवाल उठाता आया है। इसी साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इलेक्टोरल बॉन्ड पर तत्काल रोक लगाए बगैर सभी पार्टियों से अपने चुनावी फ़ंड की पूरी जानकारी देने को कहा था।

  • इलेक्टोरल बॉन्ड 15 दिनों के लिए वैध रहते हैं केवल उस अवधि के दौरान ही अपनी पार्टी के अधिकृत बैंक ख़ाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके बाद पार्टी उस बॉन्ड को कैश करा सकती है।
  • दान देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है और उसे आयकर रिटर्न भरते वक़्त भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं देनी होती।
  • पिछले एक साल में इलेक्टोरल बॉन्डस के जरिए सबसे ज़्यादा चंदा बीजेपी को मिला है।
  • एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पार्टियों को मिले चंदे में 91% से भी ज़्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड एक करोड़ रुपये के थे। इन बॉन्ड्स की क़ीमत 5,896 करोड़ रुपये थी।
  • आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश बत्रा को मिली जानकारी के मुताबिक़, 1 मार्च 2018 से लेकर 24 जुलाई 2019 के बीच राजनीतिक पार्टियों को जो चंदा मिला उसमें, एक करोड़ और 10 लाख के इलेक्टोरल बॉन्ड्स का लगभग 7 हिस्सा था।
  • इस दौरान दिए गए सभी इलेक्टोरल बॉन्ड्स की क़ीमत 6,128.72 करोड़ रुपये थी।
  • इसके उलट एक हज़ार, 10 हज़ार और एक लाख के बॉन्ड्स से पार्टियों को सिर्फ़ 06 करोड़ के बराबर चंदा मिला।
  • इलेक्ट्रोरल बॉन्ड के जरिए मिले चंदे का 83% हिस्सा सिर्फ़ चार शहरों से आया। ये चार शहर हैं: मुंबई, कोलकाता, नई दिल्ली और हैदराबाद. इन चारों शहरों से मिलने वाले बॉन्ड की क़ीमत 5,085 करोड़ रुपये थी।
  • इन बॉन्ड्स का लगभग 80 फ़ीसदी हिस्सा दिल्ली में कैश कराया गया।
  • 30 अगस्त से 27 सिंतबर 2017 के बीच RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने 3 बार चिठ्ठी लिखी थी वित्तमंत्री अरुण जेटली को कि, इलेक्टोरल बांड मत जारी करो… ये भ्र्ष्टाचार है….. नही माना वित्तमंत्री जेटली ने।
  • बोला गया कि भारत की गरीब जनता चंदा देगी.

तो जानिए कितने गरीबो ने चंदा दिया

 

मार्च’18 – अक्टूबर ’19 तक..
बांड की कीमत   कितने बिके    अमाउंट
=========    =======     ======
1000₹               47             47,000
10,000₹            60             6 लाख
1 लाख ₹         1695     16.95 करोड़
10 लाख ₹       4877     487.70 करोड़
1 करोड़ ₹        5624     5624 करोड़

ये टोटल 6,128.71 करोड़ है.. इसका 91.76% हिस्सा 1 करोड़ कीमत के बांड से आया है..और 1 करोड़ का चंदा देने वाला गरीब है? इन बांड को केवल लोकसभा चुनावों के लिये रखा गया था..पर विधानसभा चुनावों में भी इस्तेमाल हुवा..इनका सबसे बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिला।

(सोर्स : 21 नवंबर और 22 नवंबर 2019 का द टेलीग्राफ )
© विजय शंकर सिंह
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Vijay Shanker Singh

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