राजा “महेंद्र” जिन्होंने अटल बिहारी को चुनाव हराया था

राजा “महेंद्र” जिन्होंने अटल बिहारी को चुनाव हराया था

मथुरा से जब आप हाथरस की ओर चलेंगे तो हाथरस जिले में प्रवेश करते ही एक कस्बा पड़ेगा मुरसान । मुरसान एक छोटा सा कस्बा है। वहां के राजा थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह। राजा महेंद्र प्रताप उन विलक्षण और प्रतिभाशाली स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में से एक रहे हैं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ […]

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 कोहेनूर की यात्रा – शासकों के विनाश की निशानी

कोहेनूर की यात्रा – शासकों के विनाश की निशानी

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का एक ट्वीट चर्चा में है जिंसमे वे नरेंद्र मोदी के लिये कह रहे हैं कि, ” यह कोहिनूर हीरा भारत को 500 वर्षों बाद मिला है खोने मत देना।” यह ट्वीट 26 मई 21 को 11.01 बजे का है और इसे पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है। यह […]

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 क्या कोरोना की दूसरी लहर सरकार के आपदा कुप्रबंधन का नतीजा है ? क्या कहते हैं विशेषज्ञ

क्या कोरोना की दूसरी लहर सरकार के आपदा कुप्रबंधन का नतीजा है ? क्या कहते हैं विशेषज्ञ

किसी जमाने मे जब अदालतें न्यायिक निर्णयों के बजाय कार्यपालिका से जुड़े मामलो में दखल देने लगती थीं तो इसे न्यायिक सक्रियता का दौर कहा जाता था और इसकी आलोचना भी होती थी और सराहना भी। आलोचना इस लिये कि कुछ समीक्षक इसमें शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत, के असंतुलित हो जाने की बात करते थे, […]

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 गवर्नेंस और जनहित – क्या दोनों चीज़ें  मोदी सरकार की प्राथमिकता में नही हैं

गवर्नेंस और जनहित – क्या दोनों चीज़ें मोदी सरकार की प्राथमिकता में नही हैं

किसी भी सरकार की प्राथमिकताएं तय होती है, सत्तारूढ़ दल के राजनैतिक दर्शन और उसकी आर्थिक नीतियों से। राजनीतिक दर्शन उस दल की आत्मा होती है औऱ आर्थिक नीतियां, इस बात का प्रतिविम्ब की वह दल या उस दल की सरकार आर्थिक रूप से कैसा देश चाहती है। भाजपा की कभी भी कोई आर्थिक नीति […]

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 इतिहास में दुष्प्रचार और झूठ का तड़का

इतिहास में दुष्प्रचार और झूठ का तड़का

इतिहास के साथ दुष्प्रचार और गलतबयानी एक आम बात रही है। सत्तारूढ़ शासक अक्सर अपने विकृत और विद्रूप अतीत को छुपाना चाहते है और अपने बेहतर चेहरे को जनता के सामने लाना चाहते है। इतिहास में वे बेहतर शासक और व्यक्ति के रूप मे याद किये जांय, यह उन सबकी दिली इच्छा होती है। संघ […]

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 कृषि व्यवस्था में महिलाओ की भूमिका अहम है

कृषि व्यवस्था में महिलाओ की भूमिका अहम है

यदि एक शब्द में इस सौ दिन से चल रहे किसान आन्दोलन की उपलब्धि बतायी जाय तो वह है जनता का निंद्रा से उठ खड़ा होना। यानी जाग जाना, जागरूकता। जनता में अपने अधिकारों और श्रम की उचित कीमत के लिये खड़े होने का साहस और निर्भीकता, इस किसान आंदोलन की सबसे बडी उपलब्धि है। […]

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 कानून व्यवस्था में गुंडों का सहयोग लेना अनुचित है

कानून व्यवस्था में गुंडों का सहयोग लेना अनुचित है

आज तक एक भी जन आंदोलन या जन समागम नही हुआ होगा, जिंसमे अपराधी और गुंडा तत्व शरीक न हो गए हों। यहां तक की धार्मिक मेलों और कुम्भ के मेले में भी चोरों और गिरहकट, लुटेरे आदि आसानी से घुसपैठ कर ले जाते है। गुंडों की यह घुडपैठ, हो सकता है उन जनआंदोलनों से […]

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 किसान आंदोलन का हल राजनीतिक तरीकों से ही निकलेगा, पुलिस के बल प्रयोग से नह।

किसान आंदोलन का हल राजनीतिक तरीकों से ही निकलेगा, पुलिस के बल प्रयोग से नह।

किसान आंदोलन अब एक नए फेज में आ गया है। लाल किला की घटना के बाद, इस आंदोलन के नेताओ को अब अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा। राजनीतिक दलों को जनहित के इस मुद्दे पर आगे आना होगा और उनसे जुड़ना होगा। हर आंदोलन किसी न किसी राजनीतिक निर्णय से ही […]

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 कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सरकार की अक्षमता का प्रतीक है

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सरकार की अक्षमता का प्रतीक है

सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई ने आज सुनवाई करते हुए कहा कि, ” हमे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आपने ( सरकार ने ) बिना पर्याप्त विचार विमर्श किये एक कानून बना दिया है। जिसके कारण हड़ताल हो गयी है। अब इस आंदोलन से आप ही को निपटना है।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा […]

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 अमित शाह जी ! टैगोर का राष्ट्रवाद, आरएसएस का राष्ट्रवाद नही है

अमित शाह जी ! टैगोर का राष्ट्रवाद, आरएसएस का राष्ट्रवाद नही है

अगले साल बंगाल में चुनाव हैं। वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी बंगाल के नियमित दौरे पर हैं। अपने एक दौरे में अमित शाह ने कहा कि वे रबीन्द्रनाथ टैगोर के सपनो का बंगाल बनाना चाहते हैं। अगर वे सरकार में आए तो टैगोर के […]

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