“घुटनों में बहुत दर्द है चलना फिरना दुश्वार है।” यह वाक्य पढ़ते ही पहले एक पचपन पार प्रौढ़ा की छवि बनती थी लोगों के मन में। पर पिछले कुछ सालों में घुटनों के दर्द में इतनी तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है, परामर्श के लिये आने वाली लगभग 35-40% महिलाएं 20-40 आयु वर्ग की हैं और जो हमारी जीवनशैली है उसे देखते हुए अधिकतम युवा पीढ़ी अधेड़ होने से पहले इसकी चपेट में आएगी, इसकी प्रबल संभावना है।
यह सही है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में घुटनों का दर्द ज़्यादा पाया जाता है। कई बार गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान शरीर में कैल्शियम की कमी से अस्थिक्षरण या ऑस्टियोपोरोसिस के कारण, तो कभी माहवारी बन्द होने पर मादा हॉर्मोन इस्ट्रोजन की कमी से बीएमआर घटने, वज़न बढ़ने और अस्थिक्षरण की प्रक्रिया तेज़ होने और कैल्शियम के अवशोषण की रफ़्तार धीमे होने के कारण, तो कई बार व्यायाम न करने/ग़लत व्यायाम करने/चोट के कारण
हमारे घुटने मुख्य रूप से दो हड्डियों के जोड़ से बने होते है और इन दोनों हड्डियों के बीच गति सुचारू रूप से संचालित करने के लिये संयोजक ऊतक कार्टिलेज होता है जिससे घुटने आसानी से मुड़ पाते है और हम दिन-भर आसानी से चल फिर पाते हैं। कई बार दुर्घटना, चोट, निष्क्रियता, सारा दिन बैठे रहने, बीमारी, असंतुलित आहार और मोटापे के कारण उम्र से पहले या उम्र बीतने के साथ कार्टिलेज घिसने लगता है या क्षतिग्रस्त होने लगता है। अगर समय पर जीवनशैली में बदलाव न करें तो यह कार्टिलेज इतना ज्यादा क्षतिग्रस्त हो जाता है कि घुटनों में अकड़न, सूजन और बहुत ज्यादा दर्द रहता है।
आयुर्वेद मतानुसार दर्द (शूल) का सीधा सम्बन्ध वात वृद्धि से है। कुपित व्यान वात, घुटनों में स्थित श्लेषक कफ (साइनोवियल फ्लूड) को सुखा देता है जिससे गति करते समय घुटनों में घर्षण होता है और दर्द, सूजन, अकड़न आदि समस्याएं होती हैं।

घुटनों के दर्द के प्रमुख लक्षण-

  • घुटनों में जकड़न
  • घुटने मोड़ने या सीधे करने में दर्द
  • उकड़ूँ बैठने या ज़मीन पर बैठकर उठने में तकलीफ़, सहारे की ज़रूरत पड़ना
  • शरीर का बैलेंस बनाने में दिक्कत
  • कभी कभी उस जगह असहनीय दर्द, सूजन, लालिमा, गर्माहट

रोकथाम एवं बचाव के उपाय-

आदर्श वज़न रखें-

अगर 3-5किलो भी वज़न अधिक है तो घुटनों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा और कार्टिलेज घिसने की प्रकिया बढ़ेगी।

संतुलित भोजन लें-

प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स युक्त भोजन करें। शक्कर, मैदे, नमक, माँसाहार से बचें या सीमित प्रयोग करें अगर आप बहुत अधिक शारीरिक श्रम नहीं करतीं फिर भी शक्कर, मिठाई, मटन चिकन आदि का अधिक सेवन करती हैं तो बढ़ते वज़न का लोड घुटने उठाने से इंकार कर देंगे।

पैदल चलें-

अक्सर डॉक्टर कहते हैं आप नहीं चलेंगी तो दवाएं चलने लगेंगी, यह बिल्कुल ठीक है। चलना सबसे निरापद व्यायाम है, समय और गति धीरे धीरे बढ़ाते रहिये।

सही व्यायाम चुनें-

सही व्यायाम का चुनाव बहुत ज़रूरी है। एक ही तरह का व्यायाम करने की बजाय बदलते रहें, अगर वज़न ज़्यादा है तो ऐसे व्यायाम से बचें जिनमें जोड़ों पर दबाव पड़ता हो। व्यायाम की अति से भी बचें।

सही फुटवेयर का चुनाव करें-

कई बार पैरों और घुटनों के दर्द का ग़लत फुटवेयर के इस्तेमाल से भी हो सकता है। हाई हील किसी भी उम्र और अवस्था में नहीं ही पहनना चाहिये पर एकदम फ्लेट चप्पल,स्लीपर, फ्लिप फ्लॉप आदि भी नुकसानदेह हैं। ऐसे आरामदेह जूतों का चुनाव करें जिनमें पैर के आर्च को सहारा मिले।
अगर लक्षण बहुत बढ़े हुए है या दर्द बहुत पुराना है तो नज़रअंदाज़ न करें और उचित चिकित्सकीय परामर्श लें। आयुर्वेद में घुटनों के दर्द का निरापद और प्रभावी उपचार है, अवश्य लाभ लें। पर एक बात याद रखें आयुर्वेद का अर्थ दादी नानी के घरेलू नुस्खे भर नहीं हैं। शुरुआती अवस्था में हल्दी मेथीदाना जैसे प्रयोग फायदा पहुँचा सकते हैं पर जीर्ण अवस्था में पूरा उपचार कराएं।

दर्द दूर करने के कुछ सरल उपाय इस प्रकार हैं-

  • सुबह जागने और रात को सोने का एक समय निश्चित कर लें, सुबह उठकर नियमित योग और मल्टी जॉइंट वार्म अप एक्सरसाइज़ करें।
  • सौंठ, हल्दी और मेथीदाना पाउडर को समान मात्रा में मिलाएं। रोज सुबह इस मिश्रण की एक चम्मच मात्रा का सेवन शहद के साथ करें।
  • 5-8 कलियां लहसुन की 100 ग्राम दूध और सौ ग्राम पानी में आधी मात्रा बचने तक औटाएँ, इसका सेवन करने से जल्दी ही लाभ होता है।
  • वातनाशक तेल जैसे नारायण तेल या विषगर्भ तेल, या केवल तिल, सरसों या जैतून के तेल की ही बिल्कुल हल्के से मालिश करें। इससे रक्तसंचारण सुचारू होता है, शोथ में कमी आती है जिससे दर्द कम होता है। नियमित मालिश करने से घुटनों में घर्षण कम होता है, कठोरता में कमी आती है, सूजन भी कम होती है।
  • बारी-बारी से गर्म और ठंडी सिंकाई करने से भी दर्द कम होता है। किसी दर्द में गर्म सेक से आराम मिलता है किसी में ठंडे से।सुविधानुसार प्रयोग करें।
  • सेब का सिरका(apple cider vinegar) हानिकारक विषाक्त पदार्थों को घुटनों में जमने से रोकने में मदद करता है और टॉक्सिन्स को बाहर भी निकालता है। यह जोड़ों में चिकनाहट को बढ़ाकर उन्हें लचीला बनाये रखने में भी मदद करता है।
    एक कप पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर सुबह शाम पियें।
  • पानी में सेब का सिरका डालकर घुटनों को इस पानी में कम से कम 10-15 मिनट के लिए डुबोए रखें। या फिर, एक-एक चम्मच सेब का सिरका और जैतून के तेल को मिलाकर घुटनों की मालिश करें।
  • पिपरमिंट, अजवाइन सत और कपूर को एक शीशी में बन्द करके धूप में रखें। पिघल जाने पर कुछ बूँदें लेकर नियमित मसाज करें।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन न करें क्योंकि इससे ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
  • जोड़ों को लचीला बनाये रखने के लिए और विषाक्त पदार्थों की सफाई के लिए नियमित उचित मात्रा में पानी पियें।
  • पंचकर्म के पूर्वकर्म जैसे स्नेहन, स्वेदन, अभ्यंग, जानुबस्ति आदि बहुत लाभदायक हैं दर्द दूर करने में।
  • हिजामा कपिंग और जलौकावचारण (लीच थैरेपी) के द्वारा रक्तमोक्षण करवाने से भी दर्द में तुरन्त राहत मिलती है।
  • बाकी घुटनों के गम्भीर असहनीय दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे चोट, ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोअर्थराइटिस, रह्युमेटोइड अर्थराइटिस, टेंडिनाइटिस, बर्साइटिस, रनर्स नी, ACL आदि जिनकी चिकित्सा कारण के अनुसार की जाती है।
डॉ नाज़िया नईम
आयुर्वेद फिज़िशियन
भोपाल
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Dr Nazia Naeem

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