चीन के वुहान  से निकला वायरस (Corona), जो अब दुनिया भर में फैल चुका है। इसके वजह से अबतक दुनिया के 15000 से ज्यादा  लोगों की जान चली गई और आधी दुनिया को लॉकडाउन कर दिया गया है।  11 मार्च 2020, को डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया था।  कोरोना वायरस ( COVID-19 ) ने चीन, अमेरिका, इटली, दक्षिण कोरिया, ईरान, ब्रिटेन, जापान आदि देशों में कहर बरपा रखा है।

अब यह भारत में भी पैर पसार रहा है। मौजूदा समय में देश के 500 से अधिक लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अगर अभी इसे काबू नहीं किया गया, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

इस वायरस का शिकार वह लोग सबसे अधिक हो रहे हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम है।  इस दायरे में कुपोषित बच्चे हैं। क्योंकि वे  बिमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में बच्चों पर खतरा और बढ़ सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां कुपोषण की समस्या ज्यादा है।

द लैंसेट चाइल्ड एंड अडलसेंट हेल्थ (The Lancet Child & Adolescent Health) द्वारा “द बर्डन ऑफ चाइल्ड एंड मैटरनल मालन्यूट्रिसन एंड ट्रेंड्स इन इट्स इंडीकेटर्स इन द स्टेट्स ऑफ इंडिया : ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ स्टडी 1990-2017” के मुताबिक , मध्य प्रदेश उन पांच राज्यों में है जहां बच्चों में कुपोषण की स्थिति काफी ख़राब है। मगर  डब्लूसीडी और युनीसेफ के निरंतर प्रयासों से कुपोषण का ग्राफ नीचे भी आ रहा हैं।

विदिशा जिले की बाल एवं स्वाथ्य विभाग की सुपर वाइजर रचना राय ने बताया कि हम लगातार बच्चों का वज़न नापते हैं, उसमें अगर कोई बच्चा कुपोषण के श्रेणी में आता है, तो हम उसे एनआरसी शिफ्ट (‘पोषण पुनर्वास केंद्र’) होने को कहते हैं।  जहां पहले 14 दिन बच्चों के कुपोषण का कारण पता किया जाता है और उस हिसाब से देखभाल की जाती है। अगर हमें सही रिजल्ट नहीं मिलता तो इस समय को बढ़ाकर 21 दिन कर  दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना से बच्चों में संक्रमण कम देखा गया है। और बच्चों में ऐसे कोई लक्षण दिखने पर तुरंत उसकी जांच की जाएगी।

फोटो क्रेडिट – द टेलीग्राफ

केवल घर पर रहना बच्चों में चिड़चिड़ेपन को पैदा कर सकता हैं। ऐसे में उन्हें सही तरीके से समझाना बेहद आवश्यक है। UNICEF कि ये  गाइड लाइन्स बच्चों को  सही तरीके से समझाने पर मदद कर सकती हैं।

  1. नए सिरे से शुरू करने से अच्छा है, कि आप उनसे पूछें कि उन्हें क्या क्या पता है।
  2. सच जानना बच्चों का अधिकार है, गलत बता कर उन्हें मिसगाईड न करें।  उनके भय को इग्नोर न करें, इसे दूर करने में उनकी मदद करें।
  3. कविता और गाने के जरिए उन्हें हाथ धोने जैसी आदत डलवाएं। हमेशा खांसते और छींकते वक़्त कोहनी से ढकने को कहें।
  4. मुश्किल परिस्तिथियों के लिए बच्चों को पहले से तैयार रखें।
  5. बच्चों को समझाएं कि कोरोना वायरस का किसी की शक्ल या रूप या उसकी भाषा से कोई लेना देना नहीं है।
  6. अपने बच्चों को स्वास्थ्य कर्मचारियों के बारे में बताए कि कोई भी समस्या होने पर वो हमारे साथ हैं ।
  7. बच्चों को समझाने के साथ साथ अपना भी ख्याल रखें।
  8. सांत्वना दे की आप उनके पास हमेशा है और खेल खेल में उन्हें पैनिक से दूर रेखें।