केंद्र सरकार विदेशी निवेश FDI के नियमों में और बदलाव कर रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश को आसान करने जा रही है। विपक्षी दलों का कहना है, कि सरकार डिफेंस के क्षेत्र में FDI के नियमों को आसान न करे, बल्कि गृह मंत्रालय से सिक्यॉरिटी क्लीयरेंस लेने के नियम को पहले जैसे बरकरार रखे. पर सरकार का इरादा डिफेन्स, टेलिकॉम और ब्रॉडकास्टिंग जैसे सेक्टर्स में FDI के लिए मंजूरी लेने का सिस्टम बंद करने का है, इनमे सिक्योरिटी क्लीयरेंस लाइसेंस की जरूरत पड़ती है। इससे इन सेक्टर्स में विदेशी निवेश की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी।
विपक्षी दलों का कहना है,यदि ऐसा होता है तो यह देश की सुरक्षा नियमों से खिलवाड़ होगा. डिफेन्स, टेलिकॉम और ब्रॉडकास्टिंग में विदेशी निवेश के नियमों में सरकार बदलाव कर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ की और क़दम बढा रही है.
इकॉनोमिक टाईम्स के अनुसार – लाइसेंस लेने के बाद अलग से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए उन्हीं एजेंसियों से मंजूरी लेने से देरी होती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई लाइसेंस के लिए जांच की प्रक्रिया से गुजर चुका है तो उसे दोबारा उसका सामना करने की जरूरत क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एफडीआई की शर्तों की पड़ताल लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी ही कर सकती है। जल्द ही एक बड़ा डिफेंस ऑर्डर दिया जाने वाला है। अगर ये बदलाव हो जाते हैं तो उसमें काफी तेजी आ सकती है।
अभी जो नियम हैं, उनके मुताबिक निवेशकों को कई मंत्रालयों और विभागों से मंजूरी लेने के बाद लाइसेंस के लिए याचिका देनी पड़ती है। इनमें गृह मंत्रालय से सिक्यॉरिटी क्लीयरेंस भी जरूरी है। लाइसेंस मिलने के बाद उन्हें विदेशी निवेश के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है। इस क्लीयरेंस प्रोसेस में भी कई मंत्रालयों और विभागों की भूमिका होती है।

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