अमीक़ जामेई, यह नाम नया नहीं है, रोज़ टीवी बहसो मे संविधान के दायरे मे वह ग़रीबों मुफ़लिसों के लिये टक्कर लेते नज़र आयेंगे, वोह उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर के छोटे से गाँव “जैगहा” के एक प्रतिष्ठित मध्यम वर्गीय परिवार हाजी शमशेर खान के परिवार में जन्मे, जैगहा का यह परिवार समाजी इंसाफ, सद्भावना और शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है.

अमीक ने स्कूलिंग आजमगढ़ से शिबली नेशनल इंटर कोलेज से की जिसके पश्चात वोह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया गए और और वही छात्र राजनीती से वामपंथी विचारधारा से जुड़े, वोह पेशे से डोक्युमेंट्री फिल्ममेकर है उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपती डॉ जाकिर हुसैन की बायोग्राफी “द सेंट” और दूरदर्शन के लिए 13 भाग में “सुफिस्म इन इण्डिया” के नाम से एक सीरीज बनाई है.

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2008 बटला हाउस छात्र हत्याकांड में अमीक ने दिल्ली में नेत्रित्व करते हुए बेधड़क होकर दिल्ली पुलिस से टकरा गए, वोह भवायाह खौफ का दौर था, जामेई ने ज़ुल्म नाइंसाफी के खिलाफ लड़ने का प्रणय किया, देश भर में आतंकवाद के नाम पर निर्दोष युवाओ को जेल में बंद किये जाने के खिलाफ उन्होंने आवाज़ उठाई और और 2012-2014 के बीच राष्ट्रिय सतह पर राजनीतिक दलों को साथ लेकर संसद से विभिन्न राज्यों में आन्दोलन कर फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट गठित करवाने में रोल अदा किया.

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वोह दलित पिछड़े अल्पसंखयक की आवाज़ उठाने के लिए जाने जाते रहे है. हरियाणा के अटाली बल्लबगढ़ में 2016 में हुए भीषड दंगे के बीच संघ को धक्का देते हुए अटाली में टेंट गाड दिया और जाट मुसलमानों में एकता कराने में रोल निभाया और पलायन किये अल्पसंख्यक परिवारों को वापस गाँव में बसाया, आतंक के नाम फ़साये गए देश भर में निर्दोष मुस्लिम युवाओ को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष छेडा, भूमाफियाओ द्वारा कब्ज़ा करोडो की वक्फ सम्पत्तिया बचाना, रोहित वेमुला हत्या काण्ड के बाद जामेई जेएनयू आन्दोलन के दौरान कन्हैया कुमार सहित उनपर पटियाला हाउस गेट में भाजपा विधायक ओपी शर्मा ने जानलेवा हमला किया, इसके उपरांत भाजपा आरएसएस से टक्कर लेने देश व संविधान के पक्ष में लडाई बढाने के लिए जामेई ने गुजरात के युवा नेता जिगनेश मेवाणी को दिल्ली में युवा नेताओ के साथ जोड़ा और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से उनकी गहरी दोस्ती हुई, अमीक आन्दोलन के चलते राष्ट्रिय टीवी पर भाजपा संघ के खिलाफ एक सशक्त आवाज़ है और मेनइस्ट्रीम मीडिया के इस गांव के युवा को जितनी जगह मिली है ऐसे देश में कम युवा है.

अमीक़ जामेई पर दिल्ली के भाजपा विधायक और वकीलों के हमले की तस्वीर

अमीक जामेई को साम्प्रदायिकता से सख्त नफरत है और एक सहज, सेकुलर मिज़ाज के युवा नेता है खुद उच्चवर्ग में जन्म लेने के बाद उनकी ज़िन्दगी में सामाजिक न्याय शोषित वंचित के आवाज़ उठाना उनका राजनीतिक प्रतिबध्यता का सबूत रह है, जिसके लिए उन्होंने कोई समझौता नहीं किया, जामेई को राष्ट्रिय आन्दोलन में वामपंथी नेता मरहूम एबी बर्धन, श्री अतुल कुमार अंजान सहित मुहमम्द अदीब (सांसद) और श्री अज़ीज़ कुरेशी (पूर्व राज्यपाल) के साथ काम करने का मौक़ा मिला जिसमे उनकी राजनीतिक परवरिश हुई, वोह 2008-2016 तक भाकपा के सक्रीय सदस्य रहे.

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2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद वोह गृह राज्य उत्तर प्रदेश आकर दिल्ली से लखनऊ बस गए जहा उन्होंने उत्तर प्रदेश के छात्र युवाओ एससी एसटी ओबीसी संगठनो को एक कर योगी अदित्यनाथ और केंद्र संरक्षण में होने वाली मोबलिंचिंग, सहारनपुर में दबंगों द्ववारा दलित समाज पर हमले और बस्तिया जलाने के खिलाफ विधानसभा को घेरा और सामने आकर ललकारा, आन्दोलन सफल रहा, 22 नेताओ सहित जामेई योगी आदित्यनाथ राज के पहले राजनीतिक कैदी बने, देश में भाईचारा और एकता मज़बूत हो इसके लिए उत्तर प्रदेश को केंद्र बनाकर युवाओ को “अशफाकुल्लाह खान यूथ ब्रीगेड” मुहीम से जोडने का काम किया जिसका मकसद भाईचारा, सामाजिक न्याय और इंसानियत को बढ़ाना है, इस संगठन में उनके संरक्षक उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल श्री अज़ीज़ कुरैशी और प्रोफ जगमोहन सिंह(भगत सिंह के भांजे है), वोह इस दौरान प्रदेश के किसान युवा वर्ग के बीच काम कर रहे है.

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अमीक देश में शिया-सुन्नी एकता के प्रयास मे अहम भूमिका निभा रहे है पिछले 4 साल में देश में होने वाली जॉइंट नमाज़ “शोल्डर टू शोल्डर” के नाम से हो रही है वोह उसके फाउंडर मेम्बर है.

उत्तर प्रदेश पूर्व राज्यपाल श्री अज़ीज़ कुरैशी ने उनकी काबलियत देखते हुए उनसे अखिलेश यादव साथ देने को कहा और वोह उनके नज़दीक आये फिलहाल जामेई उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नज़दीकियों मे गिने जा रहे है वोह 2019 के लिए गुजरात के नेता हार्दिक पटेल को उत्तर प्रदेश ला रहे है और इस बाबत सारी तैयारी पूरी हो चुकी है सुत्रो की माने तो उतर प्रदेश में हार्दिक पटेल व अखिलेश यादव के बीच नजदीकियों में उन्ही का रोल है हार्दिक, अमीक जामेई के साथ उत्तर प्रदेश में 40 मीटिंग करने वाले है जिससे भाजपा आरएसएस की सांसे फूली हुयी है.

 

अमीक को सामाजिक न्याय की गहरी समझ के साथ डाइवरसिटी, रिज़र्वेशन, वक्फ, अल्पसंख्यक अधिकारो पर रूचि है जिसपर वोह बोलते रहे है वोह सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यको विशेषकर पसमांदा आरक्षण के समर्थन पर कट्टरता से लिखते है, गाँधी आंबेडकर, शहीद ए आज़म भगत सिंह, मौलाना हसरत मोहनी, लोहिया, वीपी सिंह उनके आदर्शो में रहे हो, उनके लेख देश के बड़े अखबारों राष्ट्रिय सहारा, कैच न्यूज़, न्यूज़ लांड्री में छापते रहते है, उन्हें साहित्य, अदब, फिल्म, आर्ट्स और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष लगाव है, अमीक युवा को मज़बूत बनाना चाहते है उन्हें संविधान और इसकी राष्ट्रीयता से जोड़ रहे है वह कहते है युवा राजनीती मे आये और समाज को जोड़ने खडा कर देश को बनाने में रोल अदा करे और देश की दौलत और पूजी पर संख्याबल के आधार प्रतिनिधित्व और हक हकूक कब्जे की लड़ाई को आगे बढ़ाये.