आम आदमी पार्टी क्या अब भी “दागी और भ्र्ष्टाचार” लोगों से मुक्त होकर राजनीति कर रही है? या फिर आम आदमी पार्टी कांग्रेस और भाजपा से लड़ते लड़ते इन जैसी ही चिकना घड़ा हो गई है? जिस पर किसी भी प्रत्याशी के खिलाफ कितने भी मुकदमे दर्ज होने से उसे फर्क नही पड़ता है?

14 जनवरी को जारी होने वाली लिस्ट में कई ऐसे उम्मीदवार है जिन पर मुकदमे दर्ज है,और एफआईआर हुई है,इन उम्मीदवारों मे मुस्तफाबाद से हाजी यूनुस जिन पर 420,506 जैसी धाराओं में मुकदमे दर्ज है,जो 420 करते है,इसका हमारे पास साक्ष्य भी है। सीलमपुर से अब्दुल रहमान जिन पर सीएए के विरुद्ध हुए आंदोलन के अलावा महिलाओं के साथ अभद्रता करने के कारण कम्प्लेन दर्ज है या कई मामलों में मुकदमे दर्ज है को अपना उम्मीदवार बनाया है,ये सब पता होने के बावजूद ऐसे नेताओं को उम्मीदवार बनाया है।

यह सभी सवाल सिर्फ इसलिए क्योंकि “असोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स” के अनुसार आम आदमी पार्टी के कुछ उम्मीदवार ऐसे है जिन पर कई मुकदमे दर्ज है,और बड़े बड़े मामलों में वो आरोपी भी है और तो और इन पर “420” होने के आरोप है जिन पर मुकदमे चल रहे है।

तो क्या यह मान लिया जाए “आप” भी बाकी पार्टियों जैसी है? आप भी दागी और 420 करने वालों को,धोखा देने वाले या “धमकी” देने वालों को टिकट देती है और अगर ऐसा नही है तो क्यों ऐसे दागी उम्मीदवारों को “आप” में मैदान में क्यों उतारा है? क्या आम आदमी पार्टी को इस बात को जनता के सामने स्पष्ट नही करना चाहिए या फिर यह मान लिया जाए कि आम आदमी पार्टी पर सत्ता का नशा छाया है और वो इस नशे ही में अपनी नीतियों से और सिद्धांतों से भटक रही है।