सोशल मीडिया में आये दिन कुछ न कुछ अचंभित करने वाली खबर तैरती नज़र आती है. फ़िलहाल एक ख़त सोशलमीडिया में बहुत वायरल हो रहा है. जोकि मुस्लिम समुदाय के तरफ से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल के लिए लिखा गया है. इस ख़त को पढ़ने के बाद, भाजपा सरकार के द्वारा लाये गए “ ट्रिपल तलाक़ बिल “ पर जो बड़ी खामियां हैं, उस पर कांग्रेस के बड़े नेताओं की खामोशी का ज़िक्र है. इस ख़त में उनसे सवाल गए हैं, कि आखिर क्या वजह है, कि आप लोग खामोश रहे.
सवाल कांग्रेस के द्वारा सॉफ्ट हिंदुत्व के नाम पर मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को दरकिनार करने पर भी किये जा रहे हैं, इस ख़त के द्वारा उनसे ये सवाल भी किया जा रहा है. कि आखिर कब तक मुस्लिम समुदाय कांग्रेस कोआँख मूंदकर वोट दे. ज्ञात होकी संसद में जब लोकसभा की कार्यवाही में “मुस्लिम महिला बिल 2017” या ट्रिपल talaq बिल पेश किया गय, तब हैदराबाद से AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के अलावा अन्य किसी पार्टी के मुस्लिम सांसद ने विरोध दर्ज नहीं कराया था. जब सवाल उठे तब संसद के बाहर कांग्रेस के किशनगंज सांसद मौलाना असरारुलहक और AIUDF के अध्यक्ष और सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने विरोध दर्ज कराया.
महिला कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद सुष्मिता देव ने इस बिल की खामियां गिनाकर इसे स्टेंडिंग कमिटी के पास भेजने की बात कही, पर उसे भेजा नहीं गया. जिसके बाद कांग्रेसी सांसदों और अन्य सकुलर पार्टियों की तरफ से कोई भारी विरोध नहीं देखा गया.

इस बिल पर कांग्रेस उपाध्यक्ष के तरफ से नहीं की गयी कोई टिपण्णी

इसी बीच यह नज़ारा भी देखा गया, कि आजकल ट्विटर और ज़मीन पर बहुत ज़्यादा एक्टिव दिखाई दे रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बिल की विसंगतियों पर न कोई बयान दिया है और नाही कोई ट्वीट किया है.

आईये देखें क्या है वह ख़त, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है

अहमद पटेल के नाम देश के मुसलमानों का खुला पत्र:

अहमद पटेल जी,
अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाह (शायद आखरी बार)
मुसलमानों के वोटों के बदौलत एसेंबली व पार्लियामेंट में जाने वाले ‘सेक्युलर’ पार्टी विशेष कर कांग्रेस पार्टी के मुस्लिम नेताओं के लिए इस वक़्त सबसे बड़ी परीक्षा का समय है. उनको अब तय करना होगा कि वोह तीन तलाक के नये कानून के मस्ले में मुस्लिम कौम (मुस्लिम वोटर) के हक़ में इन्साफ की आवाज़ उठाएंगे या फिर अपनी पार्टी की दलाली करते हुये इस नये कानून पर खामोश ही रहेंगें ?
‘सेक्युलर’ पार्टी से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस पार्टी के काफी हिन्दू-मुस्लिम सांसद मुस्लिम वोटों के बदौलत संसद की शोभा बढ़ा रहे हैं. आप जैसे नेताओं को अब ये बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि मुस्लिम कौम ने तुम्हारा बुझदिलाना रवैया देख लिया है और मिल्लत के दीनी मस्लो में मुसलमानों की पीठ में खंजर घोंपने वाला आप लोगों का असली चेहरा मुसलमानोंने पिछले दिनों देख दिया है और इस बात को हम कभी भूलेंगे भी नहीं.
तुम्हें हमारे पर्सनल लॉ को बचाने के लिये कौम के हक में इन्साफ की आवाज़ बुलंद करने से ज्यादा खामोश रहे कर एन्टी मुस्लिम मिडीया और हिन्दूत्ववादीयों को खुश रखना ज्यादा पसंद है.
“सेक्युलर” भारत में मुसलमानों के हितों की(दीन और पर्सनल लॉ) की हिफाजत कांग्रेस करेगी” – के झूठे वादें कर-करके हर बार कांग्रेस के नेताओं ने मुसलमानों के वोट जमा कर के चुनाव आसानी से जीते हैं.
अहमद पटेल साहेब. कौम ने आज तक किसी चीज़ का हिसाब आपसे नहीं लिया और ना ही आप से शिकायत करने आये कि ये क्यों किया? और वो क्यों नहीं किया?
लेकिन अब मामला शरियत में सरकार की दखलंदाज़ी का आ चुका है, मुसलमानों के पर्सनल लॉ और शरियत के खिलाफ कानून बनाया जा रहा है (सिविल मुद्दे को क्रिमनलाइज़ किया जा रहा है) ताकि मुसलमानों को भविष्य में उनके दिन-ए-इस्लाम पर चलना मुश्किल कर दिया जायें.
 
जी हाँ, ये पूरी मुस्लिम कौम के खिलाफ कानून है, बहाना सिर्फ ये दिया जा रहा है कि इससे मुस्लिम औरतों को सुरक्षा मिलेगी, लेकिन हकीक़त यह है कि इस से मुस्लिम औरतों की ज़िन्दगी तो बर्बाद होंगे ही साथ-साथ मुस्लिम पुरुष की भी जिंदगी बर्बाद होगी.
मुस्लिम मर्द और औरत भी हिन्दू औरत-मर्द की तरह कोर्ट के धक्के खाते हुये नजर आयेंगें. पहले TADA, POTA, MACOCA, Unlawful Activity. आदि कानून को कांग्रेस ने पारित करवाया और उस कानूनों का गलत इस्तेमाल करके आरएसएस ने मुस्लिम पुरुषों को जेल में बंद करवाया. अब मुस्लिम औरतों को ढाल बनाकर मुस्लिम पुरुषों को जेल की काल-कोठरी में बंद करने का प्लान बनाया जा रहा है.
अहमद पटेल साहेब हम नहीं जानते तुमने किस के लिए सियासत शुरू की थी, लेकिन कौम ने तुम को इस लिये इज्ज़त दी थी कि तुम कौम की आवाज़ उठाओगे. अगर तुमने भी कौम के साथ गद्दारी की, और इस बिल की खुद और खुद की पार्टी के द्वारा विरोध नहीं करवाई और इस बिल को राज्यसभा में नहीं रोका तो फिर भूल जाना कि मुस्लमान तुम को माफ कर देंगें…और तुम्हारी आखिरत का नुकसान तो होगा ही.
अगर आप लोगों ने मुसलमानों को ये समझ रखा हे कि मुसलमान हमारे इलावा जायेगा कहाँ? तो ये तुम्हारी बहुत बड़ी गलतफहमी है, हमें अच्छी तरह से मालूम हे के मुस्लिम अब राहुल गाँधी के लिए अछूत बन चुके हैं. उन्होंने मुस्लिम वोटों को ‘मजबूरी का मलीदा’ समझ लिया है कि आखिर मिलेगा तो मुझे ही ना.
अब वो दिन ख़त्म हो गये कि मुसलमान बीजेपी के डर से कांग्रेस को चुनता आया है…लेकिन आप लोगों ने तीन तलाक के नये कानून के मुद्दे पर मुसलमानों के लिए इन्साफ की बात नहीं उठाई और ये बिल अगर राज्यसभा में पास हो गया तो फिर आपकी और आप की पार्टी का भविष्य ख़त्म समझिये.
अहमद पटेल साहेब आप कांग्रेस को समझाइयें कि- ‘कांग्रेस ये न समझे कि मुसलमानों के पास कोई आप्शन नहीं हे’,.. आप्शन बनाने से बनता है और आप्शन हम बना भी सकते हैं. लेकिन कौम ने आप लोगों को मौक़ा दिया है, अगर आप लोगों ने अपनी ज़िम्मेदारी अदा नहीं कि तो याद रखना मुस्लिम वो कौम है जिसने हिंदुस्तान में सैकड़ों वर्ष हुकूमत भी कर चुकी है..जो जानती है कि जिस पार्टी को जिता सकते है, उसे हरा भी सकते है.

मौक़ा है कि इस बात को धमकी न समझें, इन्साफ के हक में यही हे कि ये बिल रुक जाये, वरना देश का मुसलमान अब सब कुछ देख समझ रहा है.
देश का एक मुसलमान

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