महाराष्ट्र के एक किसान ने अपनी पत्नी और बच्ची के साथ आत्महत्या कर लिया है, पेड़ में लटकी इन तीनों लाशों की तस्वीर सोशल मीडिया में बहुत वायरल हो रही है. इस तस्वीर पर सभी की तीखी प्रतिक्रिया आ रही है. दरअसल दिनोदिन किसानो की हालत दयनीय होती जा रही है
विजय माल्या की ऐसी कोई तस्वीर किसी दिन सोशल मीडिया पर दिख जाए तो सच बोलता हूं, कोई दुख नहीं होगा। किसी दिन मेहुल चोकसी या फिर नीरव मोदी इसी तरह किसी पेड़ से लटक जाएं तो भी कोई दुख नहीं होगा। लेकिन वो ऐसा कभी करेंगे नहीं। मोटी चमड़ी और मजबूत खाल के लोग हैं। जनता को लूटकर अमीर होने की कला जानते हैं।
मरता है, आम आदमी जिसके लिए बैंक का एक मामूली सा फील्ड अफसर रिजर्व बैंक का गवर्नर साबित होता है। कहीं भाग नहीं सकते। कहीं छिप नहीं सकते। अवसरहीनता का आलम ये है कि थोड़ी सी जमीन छोड़ दी संसार में दूसरा कोई ठिकाना नहीं दिखता। कहां जाएं? क्या करें?
इसलिए वहां चले जाते हैं जहां बैंक का कोई कर्मचारी नहीं पहुंच सकता। महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं के लिए सीधे सीधे बैंक और खेती की पैदावार बढ़ाने के नाम पर खाद बीज और कीटनाशक बेचनेवाली कंपनियां जिम्मेवार है। वो कर्ज देती हैं और बहुत सख्ती से कर्ज को वसूलती है। इसीलिए इन शाहूकारों और वसूलीखोरों से सरकार बहुत खुश रहती है कि छोटे कर्जदारों का एनपीए बहुत कम है। और कर्ज दो। और कर्ज दो। और कर्ज दो।
साफ नीति वाले लोग हों कि साफ नीयत वाले लोग। सब किसानों को दिये जाने वाले कर्ज को इलाज समझते हैं जबकि सच्चाई ये है कि बैंकों का कर्ज ही किसान का मर्ज है। बैंक छोटे किसानों के लिए आततायी शाहूकारों से ज्यादा बड़े खलनायक हैं। लेकिन हा दुर्भाग्य अब न तो बैंकों की इस शाहूकारी पर कोई मदर इंडिया बनती है और न ही सरकारों और बैंकों के कुत्सित इरादों को कभी सामने लाया जाता है।

(तस्वीर महाराष्ट्र की है जहां फिर से एक किसान परिवार ने आत्महत्या कर ली है।)

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