क्यों करे विचार, ठीके तो है बिहार

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बिहार में पुल डूब रहा है कोरोना बेकाबू हो रहा है 15 दिन का रीलॉक डाउन लग चुका है 180 से ज्यादा मौत हो चुकी है बाढ़ का पानी पुल क्या सर के ऊपर चला गया है, लेकिन सुशासन बाबू को इसमें भी पानी की गलती नजर आ रही है। नीतीश बाबू की पैनी नजर को प्रकृति का दोष ही नजर आ रहा है। सरकार करप्शन के सारे रिकार्ड तोड़ चुकी है साथ साथ मे नेताओं की बेशर्मी भी सब रिकार्ड तोड़ चुकी है।

राहुल और तेजस्वी ट्वीट कर रहे हैं, यादव परिवार सास,बहू,और साजिश में उलझा हुआ है । विपक्ष लोगो की आवाज पहुचाने में कमजोर और लाचार है, आज नीतीश कुमार चौकीदार के खास सिपहसालार हैं, लेकिन असली हालात से बिलकुल बेखबरदार हैं । पहले नीतीश “बाढ़” से जीत कर आते थे, लेकिन अब उनके पुल “बाढ़” से ही हार जाते है।

सब कहते है बिहार के लोग मेहनती होते है बड़े जागरूक और समझदार होते है राजनीति उनसे अच्छी कोई जानता नही है पहले 15 साल जंगल राज को झेला अब 15 साल सुशासन के आनंद ले रहे है बिहार से सबसे ज्यादा आईएएस और आईपीएस बनते है सबसे ज्यादा आईआईटी और आइआइएम में सिलेक्शन होते है आधा मीडिया बिहार से आता है। कहते हैं कि बिहार के एक परिवार में एक अधिकारी,एक नेता, एक अपराधी जरूर होता है लेकिन बिहार में सरकार “गिरगिट कुमार’ बनाते है।

बिहार की इस हालात के लिए में बिहारी लोगो की इसी परम् ज्ञानी मानसिकता को ही जिम्मेदार मानता हूँ, जहां सब कुछ जानते हुए भी जाती, धर्म और माफिया के नाम पर वोट डाले जाते हैं। जब सवाल पूछने की बारी आती है तो बिहारी अपना परम ज्ञान हर जगह बाँटते है की “भैया सब चलता है बिहार में बाढ़ नही बहार है क्योंकि वँहा नीतीश कुमार है” फिर हम क्यूँ करे विचार ठीके तो है बिहार ।

नोट : लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं

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