मेरा जन्म एक स्वर्ण सम्पन्न सनातनी हिन्दू ब्राह्मण परिवार में हुआ है, पिछले कुछ महीनों पहले फेसबुक पर मैंने अपना नाम रोमन अंग्रेजी से बदलकर उर्दू भाषा में लिख लिया था। जिसका न तो अर्थ बदला हुआ था और न ही उच्चारण।

नतीजा यह हुआ मुझे मेरी ही कम्युनिटी,यार, रिश्तेदार, जिन लोगो बीच में मैं बचपन से रहता हूँ, इतनी अवहेलना का शिकार होना पड़ा। जिसकी व्यंख्यां मेरा यहां करना सम्भव नहीं है, उसी समय से एक टीस मेरे मन में घर किये हुए रही। तबसे मैं यही बात सोचता रहता हूँ, अगर एक सम्पन्न ब्राह्मण हिन्दू मानसिकता वाले परिवार से होकर मुझे यह सब सुनने और सहने को मिल सकता है। तो इस देश में वास्तविक मुसलमान होना कितना बड़ा गुनाह होगा, वह लोग क्या महसूस करते होंगे जो वास्तव में मुस्लिम हैं?

निःसन्देह मेरी बातों पर कुछ मित्र आपत्ति जता सकते हैं, कुछ मुस्लिम मित्र भी असहमत हो सकते हैं। किंतु कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो आपकी सहमति असहमति से कहीं आगे आपके अविश्वासी होने का मार्ग प्रशस्त कर देती है।

लगभग 170 दिनों से जेल में बन्द डॉक्टर कफ़ील खान किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं, हो भी नही सकते, क्योंकि आपके समाज और आपके सिस्टम को न तो किसी नाम के सामने लगे डॉक्टर से कोई मतलब है, और न ही किसी की योग्यता से। हां नाम अगर अरबी भाषी हुआ तो आपकी कुंठाओ में उसका परिचय पहले से तय होता है। डॉक्टर कफ़ील खान भी शायद अपने इसी परिचय की बदौलत आपकी राजनीतिक, सामाजिक व न्याययिक आपकी समस्त व्यवस्थाओ में फैली कुंठाओ का शिकार होने वाला ही अरबी नाम है।

डॉक्टर कफील के खिलाफ 13 दिसंबर को सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153-ए के तहत एक FIR दर्ज की गई थी। उनपर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में CAA एनआरसी कानून के विरोध में उनपर तथाकथित एक भड़काऊ बयान देने का आरोप लगा। उसी भाषण की वजह से उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA लगा दिया गया।

जिसके बाद 29 जनवरी को यूपी एसटीएफ ने डॉ. कफील को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया था। अब मैं आपको डॉक्टर कफ़ील समेत और चार लोगो के बयान बताता हूँ, उसके बाद आपको तय करना है, उन बयानों में आपको ज्यादा भड़काऊ बयान कौनसा लगेगा और इन चार लोगो में से औऱ किसपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगना चाहिए। इन बयानों की क्रोनोलॉजी समझिये।

  1. डॉक्टर कफ़ील खान – “मोटाभाई’ सबको हिंदू या मुस्लिम बनना सिखा रहे हैं लेकिन इंसान बनना नहीं। उन्होंने आगे कहा कि जब से आरएसएस का अस्तित्व हुआ है, उन्हें संविधान में भरोसा नहीं रह गया। खान ने कहा कि CAA मुस्लिमों को सेकंड क्लास सिटिजन बनाता है और एनआरसी लागू होने के साथ ही लोगों को परेशान किया जाएगा” (आईपीसी की धारा 153-ए के तहत एक FIR और NSA)
  2. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह – इस बार दिल्ली विधानसभा चुनावो में वोट देते हुए बटन इतनी जोर से दबाना करंट शाहीनबाग तक लगे। (कोई करवाई नहीं)
  3. केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर – तारीख 27 जनवरी, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और दिल्ली चुनाव में बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे अनुराग ठाकुर ने रिठाला में आयोजित एक रैली के दौरान लोगों से नारे लगवाए- ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो ….को.’ रैली का वीडियो सोशल मीडिया और तमाम टीवी चैनलों पर दिखाया गया। वीडियों में साफ़ सुना जा सकता है कि इस नारे के शुरुआती बोल अनुराग ठाकुर ने बोले, और आधे बोल जनता की तरफ़ से पूरे किए गए। (कोई करवाई नहीं सिर्फ तीन दिन के लिए उनके चुनावप्रचार पर रोक स्टारप्रचारक की लिस्ट से बाहर)
  4. पश्चिमी दिल्ली से सांसद परवेश वर्मा – एक समाचार एजेंसी को दिए बयान में उन्होंने कहा, “शाहीन बाग़ में लाखों लोग जमा हैं। दिल्ली की जनता को सोच-विचार कर ही फैसला लेना चाहिए। वे आपके घरों में घुस जाएँगे, आपकी माँ-बहनों से दुष्कर्म करेंगे और उन्हें मार देंगे। अगर भाजपा सरकार बनी तो सभी मस्जिदें हटवा दूँगा, शाहीन बाग़ भी एक घंटे में ख़ाली होगा।‘’ (चुनाव आयोग ने उनके इस इंटरव्यू के कारण उनपर 4 दिन तक चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाया था।)
  5. बीजेपी नेता कपिल मिश्रा – “ट्रंप के जाने के बाद हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे’’ इसी दिन मौजपुर में कपिल मिश्रा ने सीएए के समर्थन में एक रैली में कहा था, ‘’डीसीपी साहब हमारे सामने खड़े हैं. मैं आप सबके बिहाफ़ पर कह रहा हूँ, ट्रंप के जाने तक तो हम शांति से जा रहे हैं, लेकिन उसके बाद हम आपकी भी नहीं सुनेंगे अगर रास्ते ख़ाली नहीं हुए तो हम पुलिस की भी नही सुनेंगे। ट्रंप के जाने तक आप (पुलिस) जाफ़राबाद और चांदबाग़ ख़ाली करवा लीजिए ऐसी आपसे विनती है, वरना उसके बाद हमें रोड पर आना पड़ेगा‘’ (कोई करवाई नहीं)

23 फ़रवरी, ये वो दिन था जब दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में देर शाम से हिंसा शुरू हुई थी। इसी दिन शाम में सीएए समर्थकों और एंटी सीएए प्रदर्शनकारियों के बीच पत्थरबाज़ी हुई, और यहीं से दिल्ली दंगों की शुरुआत हुई, देखते ही देखते ये हिंसा चांदबाग़, करावल नगर, शिवपुरी, भजनपुरा, गोकुलपुरी सहित उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाक़ों में आग की तरह फैल गई।

अब आप यह सोचिये इन पांच नामो में से कौन ज्यादा प्रभावशाली है,बीजेपी के सेंटर मिनिस्टर सांसद नेता या बहुत मामूली से डॉक्टर कफ़ील खान, किन लोगो के बयानो के बाद देश में दंगा फसाद व अराजकता पैदा हुई। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जहां डॉक्टर कफ़ील ने बयान दिया वहां 15 दिसम्बर के बाद CAA एनआरसी प्रोटेस्ट शांतिपूर्ण हो गया था, जिनमें भी स्टूडेंट्स पर बर्बरता से लाठीचार्ज किया गया,उनको गम्भीर चोटें आई,और पुलिसिया करवाई से घायल हुए छात्र की मृत्यु हो गयी।

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेताओ के इन बयानों के बाद उत्तरी पूर्वी दिल्ली में 23-26 फ़रवरी को दंगे हुए थे, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल और बेघर हो गए। अब आप तय कीजिए किसका बयान आपको अधिक भड़काऊ लगा,कौन राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत करवाई होने का ज्यादा अधिकारी है।

वहीं पुलिस और न्यायालय का रुख़ करें तो

दिल्ली हिंसाः बीजेपी नेताओं के ऐसे ‘बयानों’ के बाद भी दिल्ली पुलिस ने क्लीनचिट दे दी। इतना ही नही दिल्ली पुलिस का कहना है कि अब तक इन भाषणों का दिल्ली में हुई हिंसा से कोई लिंक सामने नहीं आया है।हाइकोर्ट को दिए हलफनामे में भी दिल्ली पुलिस ने बीजेपी नेताओ को बेकसूर बताया।

दूसरी तरफ एक मामूली बच्चो का डॉक्टर जिसका बयान न तो बीजेपी नेताओ के मुकाबले भड़काऊ था न ही कहीं से विवादित,फ्रीडम टू स्पीच आपको अपना विरोध दर्ज कराने की अनुमति देता है फिर किस लिहाज से NSA करवाई की गयी, यह आपकी घटिया राजनीति और भृष्ट तंत्र को दर्शाती है।

दरअसल यह सरकार और भृष्ट व्यवस्था आपके नागरिक होने के अधिकार को समाप्त कर देना चाहती है,कल को इसका शिकार कोई आप और हम में से कोई भी हो सकता है।जितनी जल्दी हो सके इस व्यवस्था को बदल डालिए,डॉक्टर कफ़ील खान जैसे लोगो की रिहाई की मांग जोर शोर से राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय स्तर पर उठाइये।

बाकी डॉक्टर कफ़ील खान तो सिर्फ एक प्रयोग है, वरना इस काले क़ानून का संयोग असम में 19 लाख लोगो को एक झटके में नागरिकता रदद् होने से देख चुके हैं,जिनमे 13 लाख केवल हिन्दू लोग थे,वक़्त है सम्भल जाइये वरना कल को यह हिटलरशाही आपको किसी गैस चेम्बर में सडते रहने को मजबूर कर देगी।