कल (10 जनवरी 2019 को ) सुप्रीम कोर्ट ने अडानी ग्रुप के खिलाफ डीआरआई की जांच को आगे बढाने की अनुमति दे दी। इस जांच में पता चला है कि अडानी ग्रुप ने कथित तौर पर 29 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया है।

हमे शुरू से समझने की जरूरत है, कि यह घोटाला किस प्रकार किया गया। दरअसल हिंदुस्तान में कोयले का 80 प्रतिशत आयात अडानी की कंपनी के माध्यम से होता है और वो एनटीपीसी समेत अन्य कंपनियों को कोयला बेचती है। इस प्रक्रिया में अडानी की कंपनी पर ओवर इनवॉयसिंग के आरोप हैं। आरोपों के मुताबिक अडानी की कंपनी ने कोयले के आयात की वास्तविक दर की बजाय कई गुना अधिक कीमत दिखाई। ये घोटाला करीब 29,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।

सरकारी जॉच एजेंसी डीआरआई ने पाया कि अडानी समूह की दो कंपनियों को इंडोनेशियाई निर्यातकों द्वारा निर्यात किये गए कोयले में; इंडोनेशियाई अधिकारियों के सामने घोषित और इंडोनेशियाई कोयले के मूल्य के बीच करोड़ों का अंतर था। और यह अधिक मूल्य निर्धारण 231 खेपों में देखा गया था। डीआरआई ने ये भी आरोप लगाया कि इंडोनेशियाई कोयले को सीधे वहां के पोर्ट्स से भारत में आयात किया जाता है। लेकिन इनवॉइस में कीमत बढ़ाने के लिए सिंगापुर, हांगकांग, दुबई और वर्जिन आइलैंड का रूट दिखाया जाता है।

डीआरआई ने आगे ये भी आरोप लगाया कि, कुछ मामलों में तो इंडोनेशियाई कोयले के कैलोरी मान को मापने वाले टेस्ट रिपोर्ट में बदलाव करके आयात को 50 से 100 फीसदी तक बढ़ा दिया जाता था। इस प्रकार बिजली उत्पादन करने वाली ये कंपनियां विदेशों में पैसो का गबन कर रही है और आयातित कोयले के उच्च टैरिफ मुआवजे का फायदा उठा रही हैं।

29 हजार करोड़ का घोटाला डीआरआई कोयले की खेप में बता रहा है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव आप ओर हम जैसे बिजली उपभोक्ताओं को भुगतना होता है। आयातित कोयले का मूल्य आर्टिफिशियल इंफ्लेशन की वजह कोयले की कुल लागत बढ़ जाती है जो की कोयले वाले थर्मल पावर प्लांट्स के लिए मुख्य ईंधन होता है। लागत बढ़ने से बिजली की दरें भी महंगी कर दी जाती है, नतीजा यह होता है बिजली के बिल महंगे होते जाते हैं और हम उसे भरने पर मजबूर होते हैं।