24 अगस्त तक के समय के बाद आज 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस अरुण मिश्र की अध्यक्षता में बैठी। प्रशांत भूषण, उनके वकील डॉ राजीव धवन और अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल अदालत मे उपस्थित थे।

कार्यवाही शुरू हुयी। सुनवाई के दौरान, जस्टिस अरुण मिश्र ने अटॉर्नी जनरल से पूछा, कि प्रशांत भूषण को, इस मामले में क्या दंड दिया जाय ?इस पर अटॉर्नी जनरल ने उन पांच जजों तथा कुछ जजो के खिलाफ जो बातें प्रशांत भूषण ने अपने हलफनामे में कही थी, के बारे में पढ़ना शुरू किया। फिर कहा, उन्हें सजा नहीं दी जानी चाहिए। अदालत को ऐसे मामलों में उदारता दिखानी चाहिए। प्रशांत भूषण ने जो कहा है वह तो कई पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज भी कह चुके हैं। अतः सुप्रीम कोर्ट को न्याय तंत्र में सुधार के लिये सोचना चाहिए, न कि प्रशांत भूषण को अनावश्यक सज़ा देने के बारे में। या तो उन्हें छोड़ दिया जाय या अधिक से अधिक चेतावनी दे दी जाय।

सुनवाई जारी है……….

  • यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि, प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना के दो मामले चल रहे हैं।
  • एक मामला तहलका इंटरव्यू के बारे में है जिंसमे कुछ जजो के बारे में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, औऱ वह 2009 से लंबित है। उस मामले में तहलका के संपादक तरुण क्षेत्रपाल सुप्रीम कोर्ट में पहले ही माफी मांग चुके है। पर उस मामले में भी प्रशांत भूषण ने माफी नहीं मांगी थी। वह भी सुनवाई के लिये आज लगा था।
  • अदालत ने वह मामला बड़ी बेंच को रेफर कर दिया है और इसकी तारीख, 10 सितंबर रखी गयी है। अब इसमें सुनवाई नयी बेंच और नए जजो की पीठ करेगी।
  • दूसरा मामला दो ट्वीट के बारे में है। एक मोटरसाइकिल पर बैठे सीजेआई की फ़ोटो पर कमेंट के बारे में और, दूसरा लॉक डाउन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मानवाधिकारों से जुड़े मामलों में कार्यवाही न करने और यह कहने पर कि पिछले छह सालों, औऱ विशेषकर आखिरी चार सीजेआई के कार्यकाल पर एक टिप्पणी है।

इन ट्वीट के मामले में अभी सुनवाई चल रही। प्रशांत भूषण को अदालत दोषी घोषित कर चुकी है। अब सज़ा कितनी दी जाय और क्या दी जाय, इस पर बहस हो रही है। बेंच ने फिर कहा है कि – ” प्रशांत भूषण को माफी मांगने के बारे में सोचने के लिये क्या और अवसर दिया जाना चाहिए। ”

अभी इसका जवाब प्रशांत भूषण के एडवोकेट राजीव धवन दे रहे हैं। अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने अदालत से सजा न देने के लिये कहा है। सुनवाई अभी चल रही है। अब आधे घँटे के लिये प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही रुक गयी है।

इसके बाद जब सुनवाई शुरू होगी तो फिर से बेंच, प्रशांत भूषण और उनके वकील राजीव धवन से बात करेगी अजीब कशमकश है। अदालत चाहती है कि मुल्ज़िम अफसोस जता कर उसे ही इस अजीब धर्मसंकट से बचाये और यह मामला खत्म हो।

अब मुल्ज़िम और उसके वकील क्या चाहते हैं, यह आधे घँटे के बाद

सुनवाई अभी जारी है।…….. आधे घँटे के बाद अदालत बैठी। और अब प्रशांत भूषण ने प्रशांत भूषण के एडवोकेट राजीव धवन ने अपनी बात कहनी शुरू की।

राजीव धवन ने कहा – ” मैंने एक हज़ार लेख सुप्रीम कोर्ट के बारे मे लिखा है और यह तक लिखा है कि, सुप्रीम कोर्ट एक मिडिल क्लास मानसिकता से ग्रस्त है। तो क्या मैंने अदालत की अवमानना की है ? जस्टिस अरुण मिश्र जब कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे तब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि, न्याय बिकता है औऱ उसे पैसे से खरीदा जा सकता है। तब क्या अदालत की अवमानना नहीं हुयी थी ?  तब जस्टिस अरुण मिश्र ने ममता बनर्जी के खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा क्यों नहीं की चलाया। तब स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया। ”

आगे कहा- बार बार अदालत का माफी माँगने के लिये कहना और बिना शर्त माफी मांगने का आदेश देना, और फिर बार बार समय देना, यह तो मुल्ज़िम पर माफी मांगने के लिये बेजा दबाव देना हुआ ।

बहस अब दिलचस्प मोड़ पर है। अभी सुनवाई जारी है। अब बहस अवमानना कानून की धारा 13 के अंतर्गत सज़ा क्यों नहीं दी जा सकती, इस पर चल रही है।

राजीव धवन ने यह कहा कि- एक्ट में ही कहा गया है कि अगर आरोप झूठ साबित होते हैं तभी सज़ा दी जा सकती है। प्रशांत भूषण के दिये गए तथ्यो पर तो कोई चर्चा ही नही हुयी, फिर इसे कैसे अवमानना माना जा सकता है।

आगे कहा है कि – अवमाननाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान रखने की भावना स्पष्ट की है। उसने यह नही कहा कि, लॉक डाउन में सुनवाई नहीं हुई, बल्कि उसने यह कहा कि, मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता नहीं दी गई, जिसे देना चाहिए था।

यह भी कहा कि- प्रशांत भूषण ने, अपना हलफनामा जो उन्होंने अपने बचाव में दिया है उसे वापस नहीं लेंगे। उसमे दिया गया एक एक आरोप सत्य पर आधारित है। मेरे मुवक़्क़ील ने कोई अवमानना नहीं की है।

अब माफी क्या है ? इस पर बहस चल रही है

सुनवाई अभी जारी है……… एक बार फिर जस्टिस अरुण मिश्र ने प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन से पूछा कि क्या सज़ा दी जाय।  इस पर राजीव धवन ने कहा कि,  आप स्टेट्समैन शिप दिखाइए और दोषी घोषित करने वाला निर्णय वापस ले लीजिए। या  जो उचित समझे वह सज़ा दे दें।

इस पर जस्टिस मिश्र ने कहा कि प्रशांत भूषण भी एक कोर्ट के आफिसर हैं अतः उन्हें ऐसी बात नही बोलनी चाहिए थी और न ही प्रेस में जाना चाहिए। हमे बहुत सी ऐसी बातें एक दूसरे के बारे में पता होती हैं। हमे एक दूसरे को संरक्षण देना चाहिए।

इस पर प्रशांत भूषण ने कहा – मैं कोर्ट के ऑफिसर या न्याय तंत्र का हिस्सा हूँ, इसीलिए जो कमियां मैं देख रहा हूँ, उसे अदालत के ही संज्ञान में तो ला रहा हूँ। अजीब तर्क है जस्टिस मिश्र का कि हमे एक दूसरे की कमियों को मिल कर छुपाए रखना चाहिए।

सुनवाई अभी जारी है.,….  अंत मे अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल से उनकी अंतिम सलाह मांगी गयी। अटॉर्नी जनरल ने अंतिम मशविरे के रूप में कहा कि, इसमे एक और पक्ष है । वह पक्ष है वे भूतपूर्व जज जिनका उल्लेख बचाव मे कहा गया है। क्या आप उनका भी पक्ष सुनेंगे ?

जब उनका पक्ष ही नहीं सुना गया तो, फिर यह अवमानना कैसे हुयी ? अब यह केस और भी उलझता जा रहा है। अतः बेहतर है, यह मामला यही समाप्त कर दिया जाना चाहिए। सज़ा के बारे में वे पहले ही कह चुके हैं कि सज़ा नहीं दी जानी चाहिए। ……अभी सुनवाई जारी है।

सुनवाई पूरी हुई। फैसला सुरक्षित।

अंत मे जस्टिस मिश्र ने कहा कि माफी मांगना बुरा नहीं है। माफी व्यक्ति को महान बनाती है। गांधी जी भी माफी मांगते थे। फिर तुरंत कहा कि,  वे यह बाद सामान्यतः कह रहा हूँ। प्रशांत भूषण के संदर्भ में नहीं।

लेकिन यहाँ जस्टिस अरुण मिश्र गांधी जी के बारे में, बिल्कुल गलत तथ्य कह रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी ने माफी कभी भी नहीं मांगी थी। डॉ Rakesh Pathak का यह प्रोग्राम देख सकते हैं। गांधी जी ने कभी भी अंग्रेजी अदालत से माफी नहीं मांगी थी।

ऐसे थे हमारे बापू  (Episode-5)

जस्टिस अरुण मिश्र ने प्रशांत भूषण मामले में गांधी जी के संदर्भ में, आज 25 अगस्त को अदालत में जो कहा, वह यह है

“Tell us what is wrong in using the word ‘apology’? What is wrong in seeking apology? Will that be reflection of the guilty? Apology is a magical word, which can heal many things. I am talking generally and not about Prashant. You will go to the category of Mahatma Ganghi, if you apologise. Gandhiji used to do that. If you have hurt anybody, you must apply balm. One should not feel belittled by that”,  ( Justice Mishra )

” आप ही बताइए, माफी शब्द के प्रयोग में क्या बुराई है ? माफी मांगने में क्या बुरा है ? माफी मांग लेने से, क्या आप दोषी हो जाएंगे है ? माफी एक जादुई शब्द है। यह कई ज़ख्मो को भर देता है। मैं यह बात सामान्य रूप से कह रहा हूँ, न कि प्रशांत भूषण के मामले में। यदि आप क्षमा याचना करते हैं तो, इससे आप महात्मा गांधी की श्रेणी में आ जाएंगे। गांधी जी भी माफी मांगा करते थे। यदि आप ने किसी को आहत किया है तो उस पर आप ही को मलहम लगाना है । माफी मांगने से कोई छोटा नहीं हो जाता है।” ( जस्टिस अरुण मिश्र )

माफी के संदर्भ में जस्टिस अरुण मिश्र का यह संदर्भ तथ्यो के सर्वथा विपरीत है। अब अदालती कार्यवाही समाप्त हुयी और फैसला सुरक्षित है।

( विजय शंकर सिंह )