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भारतीय आसमान में पहली बार उड़ेगा 'मेड इन इंडिया' विमान

भारतीय आसमान में पहली बार उड़ेगा 'मेड इन इंडिया' विमान

जल्द ही भारतीय आसमान में जल्‍द ही मेड इन इंडिया विमान से यात्री हवाई सफर का लुत्‍फ उठा सकेंगे. ‘मेड इन इंडिया ‘ विमानों का व्यावसायिक उपयोग जल्द ही एक वास्तविकता बनने वाला है.
 
उन्‍नीस लोगों की क्षमता वाले डॉर्नियर-228 विमान को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने कमर्शियल उड़ान भरने की इजाजत दे दी है. सशस्‍त्र बल पहले से ही डॉर्नियर-228 का इस्‍तेमाल कर रहे हैं.
हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (एचएएल) ने इस विमान का निर्माण किया है. यह पहला मौका है जब किसी घरेलू कंपनी द्वारा निर्मित विमान को डीजीसीए ने कमर्शियल उड़ान की मंजूरी दी है.
विमानन उद्योग में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए इसे बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘उड़ान’ योजना को गति मिलने की उम्‍मीद है.
डॉर्नियर 228 की व्यावसायिक उड़ान से सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को प्रोत्साहन मिलेगा. अभी तक घरेलू एयरलाइंस सभी आकारों तथा वजन वाले विमानों की खरीदे विदेशों से करती हैं.
कानपुर स्थित एचएएल का 1960 से ही ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिवीजन है. एचएएल ने इस विमान का निर्माण किया है. यह पहला मौका है जब किसी घरेलू कंपनी द्वारा निर्मित विमान को डीजीसीए ने कमर्शियल उड़ान की मंजूरी दी है.
डीजीसीए की अनुमति मिलने के बाद एचएएल अब भारत में एयरलाइंस कंपनियों को भी विमान बेच सकेगी. ऐसे में घरेलू उद्देश्यों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. अधिकारियों ने बताया, डॉर्नियर-228 का इस्तेमाल करने वाली एयरलाइंस को कुछ छूट भी दी जा सकती है ताकि स्वदेश निर्मित विमान का उपयोग बढ़े.
एचएएल डॉर्नियर-228 विमान का निर्यात करने की भी तैयारी कर रही है. अफसरों के अनुसार,  शुरुआत में इसका निर्यात नेपाल और श्रीलंका को किया जा सकता है.
डॉर्नियर-228 का एयर टैक्सी और टोही विमान के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. तटरक्षक बल भी इस 19 सीटों वाले विमान का प्रयोग कर सकते हैं.

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सुभाष बगड़िया

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