बिहार में नीतीश कुमार को एनडीए का चेहरा मानने पर अभी भी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा को आपत्ति है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को बिहार में राजग के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में हिस्सा नहीं लिया.
दिल्ली में अपनी व्यस्तता का हवाला देकर कुशवाहा बैठक से दूर रहे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और राधा मोहन सिंह, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव तथा लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने बैठक में हिस्सा लिया.
कुशवाहा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय को टेलीफोन पर बताया कि वह बैठक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. इसके ठीक बाद राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने कहा, ‘अगर कुशवाहा को गठबंधन के नेता के तौर पर पेश कर चुनाव लड़ा जाए तो राजग को बिहार में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जबरदस्त सफलता मिलेगी.’
नागमणि ने कहा, ‘भाजपा के बाद बिहार में राजग के घटक दलों में रालोसपा का समर्थन का आधार सबसे बड़ा है. राष्ट्रीय स्तर पर हमारी पार्टी जद (यू) से बड़ी है और 2014 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा के समर्थन से राजग को लाभ हुआ था.
नागमणि ने कहा, ‘जदयू के कुछ नेता और भाजपा में भी नीतीश कुमार को बिहार में राजग का नेता माना गया है. इसे पूरे गठबंधन का दृष्टिकोण नहीं समझा जा सकता. बिहार के नेता का फैसला राजग के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा होगा ना कि राज्य स्तर पर.’    हालांकि, टकराव टालने के प्रयास के तहत नागमणि बाद में ज्ञान भवन परिसर में राजग की बैठक में आए. बिहार में राजग के घटकों के बीच असंतोष उभरा है.

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