October 26, 2020
देश

क्या इतिहास बदलने से व्यवस्था बदल जाएगी?

क्या इतिहास बदलने से व्यवस्था बदल जाएगी?

राजस्थान सरकार राज्य की व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे पर सता में आई थी. पर अब राज्य की व्यवस्था परिवर्तन तो हो चूका है. तो अब सरकार ने ठान लिया है कि क्यों न बचे हुए एक साल में इतिहास बदला जाए. महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था. इतिहासकार मानते है कि उसमें अकबर की जीत हुई थी. पर अब राजस्थान ने शिक्षा विभाग ने इसे ठीक विपरीत कर दिया है. मतलब कि उस युद्ध में महाराणा प्रताप की जीत हुई थी.
Image result for maharana pratap and akbar
मैं बचपन से ही महाराणा प्रताप की युद्ध गाथा का खास प्रसंसक रहा हूं. कैसे उन्होंने विपरीत प्रस्थितियों में भी अपने समकालीन शासकों का डटकर सामना किया. उनकी जमीन पर रहने वाली प्रतिज्ञा तो मुझे विशेष रूप से रोमांचित करती है. अकबर उस समय का तगड़ा राष्ट्रीय शासक था. वो उस समय आधुनिक हाथियारों और सेना से लैस था. जबकि महाराणा उस समय एक प्रान्त के शासक थे. उनके पास अकबर के मुकाबले बेहद कम सेना और संसाधन थे. फिर भी उन्होंने अकबर का युद्ध के मैदान में डटकर और सीना तानकर सामना किया इसी में उनकी जीत थी. पर अंततः युद्ध अकबर का ही जीता हुआ मानते है.

कभी भी किसी भी तरह के परिणाम भावनाओं पर निर्भर नहीं करते चाहे वो परीक्षा परिणाम हो या युद्ध के परिणाम. परिणाम परम सत्य होते है. इसे स्वीकार करना ही पड़ता है. ना ही इससे महाराणा प्रताप की वीरता कम होगी. वीरता हार जीत पर निर्भर नहीं करती, ये इस बात पर निर्भर करती है कि महारणा प्रताप कैसे वीरता से अकबर का सामना किया. 

राजस्थान में अन्य तरह की बहुत सारी शैक्षिणिक समस्याएं है. वहां गांवो में उच्च शिक्षा स्तर के स्कूल नहीं है. पर्याप्त मात्रा में अध्यापक नहीं है. स्कूलों में शिक्षा के स्तर का हाल बेहद घटिया है. इनको परिवर्तन का मुद्दा कभी नहीं उठता! परिवर्तन इन व्यवस्था में होना चहिए.
सरकार ये इतिहास बदलकर किसी जाति-विशेष को खुश तो कर सकती है. पर सरकारें तो आती-जाती रहती है. इससे आने वाली सरकारों के लिए क्या नजीर पेश कर रही है ये बेहद चिंताजनक है. फिर आने वाले समय कोई मांग उठाएगा कि सूरजमल की इतिहास में एक पूरी किताब ही पढाई जाये. और ये प्रक्रिया कहां तक जाएगी इसी हम केवल कल्पना भर ही कर सकते है(औरंगजेब का इतिहास सोचकर देखिएगा, क्या पता कल को उनके इतिहास में परिवर्तन हो जाए.)
भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश को एसे औछे परिवर्तन शोभा नहीं देते. एसी घटिया हरक़ते तो पाकिस्तान जैसे टुच्चे देश(लोकतंत्र के मामले में) करते है क्या पता वो अपने इतिहास में भारत से हारे हुए युद्धों में अपनी जीत बता रहा हो.

अंत में राजस्थान सरकार का तर्क है कि वहां के किसी प्रोफेसर ने अपने शोध में हल्दीघाटी के महाराणा की जीत वाले परिणाम पायें है. तो इस परविर्तन को क्यों सिर्फ राजस्थान में लागू किया जा रहा है. देश की सभी इतिहास की किताबों में इसे बदला जाना चाहिए. नहीं?
Avatar
About Author

Ashok Pilania

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *