सुधा भारद्वाज का यह बयान उनकी वकील वृंदा ग्रोवर के माध्यम से जारी हुआ है और अंग्रेज़ी दैनिक TheHindu में प्रकाशित हुआ है। यह बयान, मुंबई पुलिस द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस के बाद जारी किया गया है। सुधा भारद्वाज ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और मिथ्या बताया है।

हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है

कल महाराष्ट्र पुलिस द्वारा प्रेस के आरोप में मानवाधिकार डिफेंडर और वकील सुधा भारद्वाज द्वारा वक्तव्य (31 अगस्त 2018):

  1. यह एक पूरी तरह से जानबूझकर गलत इरादे से तैयार किया गया पत्र है जो मुझे और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों, और संगठनों को अपराधी साबित करने के लिए प्रस्तुत किया गया है।
  2. यह निर्दोष और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और आधारहीन सूचनाओं पर आधारित है। इसमें बैठकों, संगोष्ठियों, विरोधों जैसी विभिन्न कानूनी और लोकतांत्रिक रूप से मान्य गतिविधियों का आरोप लगाकर यह मिथ्या आधार बनाने की कोशिश की गई है कि यह सब उन्हें माओवादियों द्वारा दिए गए फंडों से संचालित है।
  3. कई मानवाधिकार वकीलों, कार्यकर्ताओं और संगठनों को जानबूझकर उन्हें लांछित करने के लिए इस सूची में शामिल किया गया है, ताकि उनके काम में बाधा डाली जा सके और उनके खिलाफ समाज मे घृणा उत्पन्न हो।
  4. आईएपीएल को एक अवैध संगठन के रूप में प्रस्तुत किया गया है जबकि वह वकीलों के एक संगठन है जिसके अध्यक्ष अवकाशप्राप्त जज होस्पेट सुरेश है और जो वकीलों पर होने वाले हमलों के खिलाफ सदैव बोलते रहे हैं।
  5. मैं यह स्पष्तः और दृढ़ता से कह रही हूं कि कभी भी मैंने मोगा में होने वाले किसी कार्यक्रम के लिये 50,000 ₹ नहीं दिया है और न ही मैं किसी अंकित या कॉमरेड अंकित को , जिसके संबंध कश्मीरी आतंकवादियों से बताये जा रहे है को जानती हूं या उसके संपर्क में रही हूं।
  6. गौतम नवलाखा, एक वरिष्ठ और सम्मानित मानवाधिकार कार्यकर्ता है जिनको मैं जानती हूं। उनका नाम उनके खिलाफ घृणा का वातावरण बनाने और लोगों को उत्तेजित करने के इरादे से अपराधी के रूप में फैलाया जा रहा है।
  7. मुझे जगदलपुर लीगल एड ग्रुप के बारे में भलीभांति ज्ञात है। उस ग्रुप ने कभी भी किसी भी प्रतिबंधित संगठन से किसी भी प्रकार से धन की मांग नहीं की है। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूं कि उनका काम बिल्कुल वैध और कानूनी है।
  8. मुझे यह मालूम है कि वकील डिग्री प्रसाद चौहान एक दलित मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो पीयूसीएल में सक्रिय हैं और मानवाधिकार कानून नेटवर्क के साथ काम करते हैं । उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह आधारहीन हैं।
  9. बस्तर, छत्तीसगढ़ में मानवाधिकार हनन के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले वकीलों कार्यकर्ताओं और संगठनों के खिलाफ घृणा फैला कर उन्हें अपराधी के रूप में दिखाने और उनके खिलाफ लोगों को उत्तेजित करने का यह प्रयास है।

मैं एक बार फिर घोषणा करती  हूं कि यह एक गढ़ा हुआ झूठ से भरा पत्र है, जिसे मैंने 4 जुलाई को जब इसे रिपब्लिक टीवी पर दिखाया गया था तब भी मैंने इसे झूठा कहा था, और इसे न तो सीएमएम पुणे की अदालत या सीजेएम फरीदाबाद की अदालत में पेश किया गया था।

सुधा भारद्वाज
दिनांक 31.08.2018
मेरी वकील एड. वृंदा ग्रोवर के माध्यम से