और ये शर्मा जी थे जिन्होंने मिलते ही वो सवाल दाग दिया जिसका जबाव हमें इन दिनों बार बार देना पडता है। तो भाई क्या खबर है कौन जीतेगा इस बार। और इसके लिये हमने भी जबाव तैयार कर रखा है। तो वही शर्मा जी को भी दे मारा कि भैया इस बार बीजेपी तो जीत ही रही है मगर कांग्रेस भी जीत सकती है। चौंकते हुये शर्मा जी बोले क्या मतलब दोनों कैसे जीत सकते हैं। अहमक मत बनाओ सच बताओ। हमने कहा यही तो मजा है इस बार के चुनाव में कि दोनों पाटियां जीत रही हैं। अब ये अलग बात है कि बीजेपी सिर्फ सीएम शिवराज की मेहनत के भरोसे है तो कांग्रेस के कमलनाथ संगठन को मजबूत करने के लिये रोज होने वाली बैठकों में भारी मेहनत कर रहे हैं। खैर शर्मा जी तो जल्दी में थे सुनकर मुंह बनाकर चले गये मगर जब सोचा कि दोनों पार्टियां कैसे और क्यों जीत रहीं हैं तो ये कुछ बातें सामने आयीं।

जानकारों की मानें तो बीजेपी पांच कारणों से सत्ता में वापसी कर रही है। पहला कारण तो स्वयं शिवराज हैं जो बाहुबली बनकर सत्ता के शिवलिंग को कंधे पर उठाकर बरसते पानी मे रथ पर चलते हुये नये बने वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल तक ले जा रहे हैं। पीछे पीछे उनके पार्टी के मंत्री विधायक डरे डरे चल रहे हैं कि शिवलिंग शिवराज के कंधे से गिर ना जाये वरना उनके बुरे दिन आ जायेगे। और फिर तेरह साल से शिवलिंग को कंधे पर साधे शिवराज के खिलाफ जनता की नाराजगी वैसी नहीं दिख रही जो उनसे शिवलिंग छीन कर भल्लालदेव को दे दे। दूसरा कारण विपक्षी पार्टी कांग्रेस है, पंद्रह साल से सत्ता के सिंहासन से उतरी कांग्रेस जनता की नजरो से भी उतरी हुयी है। विरोधी दल में सत्तारूढ दल के खिलाफ जो आग और सत्ता पाने की जो भूख होनी चाहिये वो दिख नहीं रही। इन पंद्रह सालों में कांग्रेस का संगठन जीर्ण षीर्ण हो गया है। कांग्रेस नेता सडकों पर उतर कर आंदोलन तो करना चाहते हैं मुददे और मसले भी बहुत हैं मगर पैसा और संसाधन की कमी के कारण वो बजाये सडकों पर उतरने के घरों में बैठना और अपने नेता की परिक्रमा में ही व्यस्त हैं।

तीसरा शिवराज सरकार की बेतहाशा योजनाओं का फायदा अखबार की जैकेटों में विज्ञापन की शक्ल में छपने वाले आंकडों को छोड भी दे तो कुछ लोगों तक तो पहुंचा ही है। बेटी बचाओ बेटी पढाओ, लाडली लक्ष्मी, कन्यादान, बिजली बिल माफी, पढाई माफी का फायदा जिन लोगों तक पहुंच रहा है वो और बेहतर सुविधाएं पाने की बातें समझाने पर बीजेपी के वोटर तो बन ही जायेंगे। चोथा कारण एमपी बीजेपी का वो प्राणों से प्रिय संगठन है जिसके गुण गा गाकर दिल्ली के नेता नहीं अघाते। ये संगठन अपने कार्यकर्ता को बैठने नहीं देता। लगातार नये नये कार्यक्रम सम्मेलन और दौरों के दम पर कार्यकर्ता चार्ज रहता है, जो चुनाव में पार्टी का बडा फोर्स होता है।

पांचवा और आखिरी कारण शिवराज सरकार को मिलने वाला मोदी सरकार का सपोर्ट। यदि केंद्र में बीजेपी के अलावा दूसरी पार्टी की सरकार होती तो पेट्रोल की रोज बढने वाली कीमतों पर शिवराज सिंह साइकिल चलाते और बकाया राशि नहीं मिलने पर भेल मैदान पर तने तंबू में विरोध प्रदर्शन करते दिखते।

वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर कहते हैं कि बीजेपी जीतने जा रही है मगर कांग्रेस भी हारती नहीं दिख रही।

अब कांग्रेस की बात करें कि वो क्यों जीतने जा रही है तो उनके खाते में सबसे बडी बात लीडरशिप है जो कमलनाथ के आने से मजबूत हुयी है। सीनियर नेता कमलनाथ की सब मानते हैं और आलाकमान भी उनकी सुनता है। दूसरा कारण कांग्रेस के संगठन का उठ खडा होना है पहले दिग्गी राजा की नर्मदा यात्रा फिर पंगत में संगत अजय सिंह की न्याय यात्रा जीतू पटवारी की जन जागरण यात्रा और सिंधिया कमलनाथ की सभाओं में आ रही भीड बता रही है कि पंद्रह साल में कांग्रेस मुरझा जरूर गयी थी मगर जडों में पानी पडते ही फिर लहलहाने लगी है।

तीसरा पिछले चार विधानसभा, एक लोकसभा और कुछ नगरीय निकायों के उपचुनावों में कांग्रेस ने जिस तरह से सरकार के खिलाफ किला लडाकर जीत हासिल की है उससे कार्यकर्ताओं का हौसला बढा है। चौथा कारण ये है कि पंद्रह साल पुरानी सरकार के खिलाफ एंटी इंकबन्सी और बदलाव की हवा है मगर उसे कैसे तूफान में बदले ये कांग्रेस के नेताओं के लिये चुनौती है उधर बीजेपी पूरे प्रदेश में सिर्फ शिवराज सिंह के भरोसे है तो कांग्रेस के पास नेताओं की जमात हैं। जिनका अपने अपने इलाकों में पकड़ हे..

आखिरी बात ये कि कांग्रेस को बीजेपी के भीतरघात और देश में सुलग रहे मोदी विरोधी माहौल का फायदा होने की उम्मीद है फिर मोदी और शाह की जोड़ी गुजरात जैसा प्रदर्शन मध्यप्रदेश में दिखा पायेंगे इसकी उम्मीद कम है। वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं कि मोदी की लहर का पिछली बार शिवराज सरकार को बडा फायदा मिला था मगर इस बार तस्वीर बदली हुयी है। तो अब तो आप भी समझ गये होंगे कि इस बार हमारे अजब गजब एम पी में बीजेपी ओर कांग्रेस दोनों जीतती दिख रहीं है। अब यदि शर्मा जी मिलेंगें तो उनको नए तरीके से समझायेंगे..

ब्रजेश राजपूत,
ए बी पी न्यूज ,
भोपाल