मध्यप्रदेश के कटनी जिले में समर्थन मूल्य पर बनाए गए धान खरीदी केंद्रों में अन्नदाता की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रहीं। खून-पसीने की मेहनत का प्रतिफल पाने के लिए किसान उपज लेकर केंद्र पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें यहां भी मुसीबतें घेरे हुए हैं। स्थिति यह है कि किसान अपनी उपज किसी तरह बेचकर अब भुगतान के लिए खरीदी केंद्र प्रभारियों, अधिकारियों और बैंकों के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। अधिकांश केंद्रों में 12 दिसंबर से लेकर 22 दिसंबर तक का भुगतान अटका हुआ है।
जिले में वर्तमान की स्थिति में 1100  किसानों को 23 करोड़ से अधिक का  भुगतान लंबित है। भुगतान के अलावा जिले में धान के परिवहन की भी समस्या बनी हुई है। 2 लाख 30 हजार 403 क्विंटल धान उठाव के लिए पड़ी हुई है। वहीं अभी तक 2700 क्विंटल से अधिक धान अमानक होने पर अस्वीकृत  कर दी गई है।
जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 54 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से बुधवार तक 13 लाख 36 हजार 520 क्विंटल की खरीदी की जा चुकी है। 10 लाख 73  हजार 249 क्विंटल का परिवहन हो चुका है। यह खरीदी 14 हजार 932 किसानों से की गई है। इसके एवज में 192 करोड़ का भुगतान 11 हजार 300 किसानों को किया  जा चुका है। इस साल 17 लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष 19  केंद्रों की खरीदी वेयर हाउस में होने के बाद भी परिवहन की समस्या बनी हुई  है। अफसरों द्वारा समय पर पर्याप्त तैयारी न किए जाने के कारण यह समस्या बन रही है। शहर के दोनों केंद्रों में भी किसान परेशान हैं। इसी प्रकार प्राथमिक कृषि साख समिति में 17 दिसंबर के बाद से भुगतान नहीं हुआ। यहां पर 270 किसानो  का 2 करोड़ 47 लाख रुपए से अधिक का भुगतान  बाकी है।
बरही क्षेत्र में भी धान खरीदी केंद्रों में मनमानी का आलम है। बरही क्षेत्र में 5 केंद्र बनाए गए हैं, इसमें से अधिकांश क्षेत्रों में उठाव की रफ्तार कम है। वहीं भुगतान की किसानों को समय पर नहीं हो रहा। खितौली खरीदी केंद्र में 8 हजार क्विंटल धान खुले में पड़ी हुई है। खरीदी केंद्र प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि धान का परिवहन नहीं हो रहा है। इससे धान सूख रही है और समिति को नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा बारदाना न होने से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बहोरीबंद तहसील क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए बनाए गए केंद्र में उपज बेचने वाले किसान भी परेशान हैं। स्लीमनाबाद सेंटर में समय पर उठाव न होने की वजह से केंद्र में कई दिनों से धान पड़ी हुई है। क्षेत्र के 300 से अधिक ऐसे किसान हैं जिनका 20 दिसंबर के बाद से भुगतान अटका हुआ है। विजयराघवगढ़ और बड़वारा क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों में भी मनमानी का आलम हैं। ढीमरखेड़ा और उमरियापान के केंद्रों में भी कमोवेश यही स्थिति है।

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