आप कैसे कह सकते हैं, कि कोई विरोध न हो

आप कैसे कह सकते हैं, कि कोई विरोध न हो

केसे विरोध न हो… कैसे कोई विरोध न हो,विरोध करता हूँ आपका,आपकी राजनीति का, तो क्या आप टेढ़ी आंखों से देखेंगे मुझे? लेकिन क्यों क्या आप विरोध को खत्म कर देना चाहते है? क्या आप “विपक्ष” को खत्म कर देना चाहते हो? अगर विरोध ही न होगा तो फिर कैसे समाज मे “मार्क्स” पैदा होगा? […]

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 इन्होंने गौरी लंकेश को मारा नहीं, बल्कि अमर कर दिया है

इन्होंने गौरी लंकेश को मारा नहीं, बल्कि अमर कर दिया है

गौरी लंकेश मारी गयी,एक पत्रकार मारी गई, धड़ाधड़ गोलियों से उन्हें छलनी कर दिया गया,वो अपने अंत के साथ ज़मीन पर जा गिरी,ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनका “लिखना” किसी को पंसद नही था,ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनका “बोलना” किसी को पसन्द नही था,लेकिन क्या गोरी को लंकेश को मारा जा सकता है? क्या इस निडर […]

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 एक मुसलमान का मुसलमानों से कुछ सवाल

एक मुसलमान का मुसलमानों से कुछ सवाल

कुछ हज़ार कुर्ते में खर्च,पूरे महीने स्टाइल की तैयारी और गुटखे से मुंह भर कर चौराहों पर खड़े होकर अपनी “कौम” से उसके मसाइल से दिक्कतों से और “सवालों” से दूर नौंजवानों से आप उम्मीद क्यों रखवा रहें है? आप उम्मीद रखिये उनसे जो पढं रहें है,बात कर रहें है,लेकिन नही आप उनसे सवाल नही […]

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 मेरी दाढ़ी है, टोपी पहनता हूँ और आप जैसा ही इंसान हूँ

मेरी दाढ़ी है, टोपी पहनता हूँ और आप जैसा ही इंसान हूँ

मैं मुसलमान हूँ,उतना ही इंसान हूँ जितने आप है,उसी हाड़ और मांस का हूँ जिसके आप है.. हाँ मैं कुर्ता पहनता हूँ,हाँ मैं दाढ़ी रखता हूँ,लेकिन आपसे अलग नही हूँ,ज़रा भी नही हूँ…मैं दंगों में मरा हूँ,फिर भी यही डटा हूँ, लेकिन आप समझते नही है,हां थोड़ा सा आपसे अलग खाता हूँ,जो मैं खाता हूँ […]

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 आज़ादी 70 साल बाद "हम भारत के लोग" क्या भूल  रहे हैं?

आज़ादी 70 साल बाद "हम भारत के लोग" क्या भूल रहे हैं?

हम भारत के लोग,यानी हम भारतीय,130 करोड़ भारतीय वही भारतीय जो अब “आज़ादी” के सत्तर साल पुरे करने जा रहें है,अपने देश के “बड़ों” की विरासत को आगे ले जा रहें है और,दिन दूनी रात चोगुनी तरक्की करने की कामना से काम रहें है,सब अपनी अपनी जगह काम कर रहें है,यानि सब अपना काम कर […]

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 एक तबका है, जिसका काम है ज़हर को बैलेंस करना

एक तबका है, जिसका काम है ज़हर को बैलेंस करना

एक तबका है,जिसका काम “बैलेंस” करना है,जिसका काम डैमेज कंट्रोल करना है,जिसकात काम “ज़हर” फ़ैलाना है,जिसका काम किसी भी मुद्दे को घुमाना है,ये तबका बहुत चालाकी से किसी भी मुद्दे के सामने कोई भी मुद्दा खड़ा कर देता है,यानी “जुनेद” की बात होगी तो उसके सामने अय्यूब पंडित को खड़ा कर देगा,ठीक वैसे ही जैसे […]

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 एक सभ्य खेल की कवरेज को इतना असभ्य क्यों बना रहे हैं टीवी एन्कर्स

एक सभ्य खेल की कवरेज को इतना असभ्य क्यों बना रहे हैं टीवी एन्कर्स

भारत और पाकिस्तान का मैच है,पूरी तेयारी है आखिर क्रिकेट का सबसे बड़ा मुकाबला जो ठहरा,और इससे भी ज्यादा 1947 से लेकर आज तक के तमाम हालात भी सामने है,मगर खेल है हो रहा है और दसूरे मुल्क में हो रहा है तो मसला अलग है,मगर खेल तो खेल ही रहा है और हमेशा ही खेला […]

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