क्या सिंधिया कांग्रेस छोड़ने वाले हैं ?

क्या सिंधिया कांग्रेस छोड़ने वाले हैं ?

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर गर्मागर्मी के बीच कई नई खबरे सामने आ रही है,लेकिन एक और बड़ी खबर मध्यप्रदेश से आ रही है,जहां कांग्रेस के महासचिव और पूर्व सांसद ने अपने ट्विटर अकॉउंट में ज़रा सा बदलाव कर सनसनी फैला दी है। दरअसल सुबह सुबह मध्यप्रदेश से आई इस खबर ने दिल्ली में […]

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 मैं रवीश कुमार का फैन नही हूँ…

मैं रवीश कुमार का फैन नही हूँ…

रवीश कुमार उन चंद शख़्सियतों में से एक है जिन्होंने मुझे उस वक़्त मुतासिर किया था जब मैं ग्यारहवीं क्लास में था और हिस्ट्री और पोलिटिकल साइंस को अपना फेवरेट सब्जेक्ट बनाने की कोशिश कर रहा था,और जर्नलिज़म(पत्रकारिता) का मतलब न के बराबर समझता था। लेकिन फिर एक दिन टीवी चैनल्स बदलते हुए मुझे एनडीटीवी […]

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 नज़रिया – जनता किसी गिनती में भी है क्या ?

नज़रिया – जनता किसी गिनती में भी है क्या ?

आपकी तादाद सिर्फ “वोट” के लिए गिनी जाती है,की ये इतनी आबादी है,वरना बताइये कहा है आपकी गिनती? क्या समझते है आप 110000 हज़ार करोड़ के घोटालें,9000 करोड़ का गबन और 2 लाख करोड़ का स्कैम ये जो बड़ी बड़ी गिनतियां आपको गिनाई जा रही है ये क्या है। ये इतनी बड़ी बड़ी रकमें मज़ाक […]

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 चौराहों पर अपना समय बर्बाद करते युवा

चौराहों पर अपना समय बर्बाद करते युवा

इस समाज मे,सोसायटी में तमाम तरह के लोग होतें है,अलग अलग फील्ड के लोग सबकी पसन्द,अलग अलग होती है,और एक ही जिस्म होता और दिमाग़ भी एक ही होता है,अब ये अलग अलग तरह के लोग किस तरह अपने दिमाग का इस्तेमाल कहा करतें है ये अहम है। इस बात को समझा जाना बहुत अहम […]

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 साहित्य – हज़ारों किताबों के निचोड़ कि तरह है "सलाम बस्तर"

साहित्य – हज़ारों किताबों के निचोड़ कि तरह है "सलाम बस्तर"

इस किताब यानी “सलाम बस्तर” को पढ़ कर जैसे मैं सत्तर के दशक में घूम आया हूँ और वो मेरे सामने से ही निकला चला गया,जहाँ तमाम विवादित गतिविधियों ने पेर पसारे थे और विरोध और समर्थन हुए थे,जी हां बात हो रही है,भारत के माओवादी आंदोलन की जहां एक बीहड़ जंगल मे बैठ कर […]

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 मेरा अपना भारत

मेरा अपना भारत

मेरा अपना भारत मेरे बचपन से शुरु होता है,बिजनोर में गुज़रे हुए वक़्त से,जहां बस से उतर जाने के बाद अपने ननिहाल के मुस्लिम मोहल्ले में घुसने से पहले वहां की शुरुआत “राम” के चौराहे से होती थी,जहाँ कोने ही पर एक मंदिर मौजूद था,और यकीन मानिए वो बिजनौर के सबसे बड़े इलाकों में से […]

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 जब साथ आये थे कांशीराम और मुलायम

जब साथ आये थे कांशीराम और मुलायम

बाबरी मस्जिद राम मंदिर विवाद के दौर की बात है,बाबरी मस्जिद ढहा दी गयी थी,चारों तरफ हाहाकार सा मचा हुआ था,राजनितिक स्थिति भी बेहतर नही थी,और बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद बर्खास्त हो चुकी सरकार को दोबारा चुने जाने के लिए चुनाव होना था | भाजपा पूरी तेयारी में थी क्यूंकि उसके पास “राम […]

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 क्योंकि किसी का भी मरना हमारे लिए कोई मायने है ही नही

क्योंकि किसी का भी मरना हमारे लिए कोई मायने है ही नही

हम उस दौर में है जहाँ “मायनों” की मौत हो चुकी है,मुझे नही पता उन्हें दफ़न किया गया है या जलाया गया है,लेकिन वो मर गए है,उनकी मौत ही ने हमे खोखला कर दिया है। क्योंकि अब हमें हैरत ही नहीं होती है किसी की मौत पर,ये एक मामूली बात हो गयी है,क्योंकि ये चीज़ […]

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 संघ जो छवि पेश करता है, उसे पर्दे और टीवी पर फैला रहे निर्माता

संघ जो छवि पेश करता है, उसे पर्दे और टीवी पर फैला रहे निर्माता

“पद्मावत” रिलीज़ भी हो गयी और उसकी कमाई ने कई रिकॉर्ड्स तोड़ नए नए कीर्तिमान भी दर्ज कर दिए,इस फ़िल्म की शुरुआत में कुछ एक सिनेमाघरों को छोड़ दें तो,”पद्मावत” रिलीज़ हो गयी है,फ़िल्म एक फ़िल्म के ऐतबार से केसी है इसको लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है,क्योंकि जिस तरह कड़ी सुरक्षा के बीच […]

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 गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

गांधी के साथ,या गांधी के ख़िलाफ़?

एक एक कर बारी बारी चारों गोलियाँ सीने को चीरते हुए उसमे समा गई और महज़ उन बंदूक से निकले बारूद ने एक युग को,एक समाज को और एक विचारधारा को महज कुछ गोलियों से ढेर कर दिया,वो बूढ़ा जिस्म वही ढेर हो गया,और “हे राम” के साथ एक महात्मा को एक “हैवान” ने मौत […]

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