शायद यह जीवन में पहली बार है कि किसी फ़िल्मी सितारे के जाने पर मेरी आँखें नम हुई है। इरफ़ान खान बिल्कुल अपने जैसे लगते थे। उनकी बातें, उनकी सूरत, उनकी शक़्ल… सब हम आम लोगों जैसी ही थी। इसलिए अपने लगते थे।

हिंदी मीडियम उनकी मुझे सबसे बेहतरीन फ़िल्म लगी। वह शायद भारतीय सिनेमा की एक यादगार फ़िल्म रहेगी। इरफ़ान खान का बुलंदियों पर पहुंचने का वक़्त शुरू ही हुआ था कि फिर बकौल उन्हीं के उनकी बॉडी में कुछ अनवॉन्टेड मेहमान आ गए। उन मेहमानों से बातचीत चल रही है और नतीजा क्या करवट लेता है हमें इत्तला दे दी जाएगी… वेट फ़ॉर मी। इत्तला हमें मिली और यह इत्तला वाक़ई दिल को दुखाने वाली इत्तला है।

इस वक़्त अफवाहों का बाज़ार गर्म है तो हम सब का दिल सोच रहा था कि कहीं से कोई खबर आजाए कि हाँ ये भी अफवाह थी। कुछ नहीं हुआ है इरफ़ान खान को। वह ठीक है, लेकिन अफ़सोस कि ये अफ़वाह नहीं थी। उनकी ही एक और खूबसूरत फ़िल्म कारवां के गीत के बोल हैं- सब रुक सा गया, वक़्त थमसा गया।

बहुत हिम्मत करके मेरे प्यारे दोस्त इमरान भाई (इरफ़ान खान के छोटे भाई) को अभी फ़ोन लगाया। मोबाइल की रिंग जा रही थी तब भी दिल कह रहा था कि, इमरान भाई कहेंगे अरे नहीं अबरार भाई सब अफवाह है (क्योंकि दो साल पहले भी ऐसी अफ़वाह आई थी)। लेकिन वे पहाड़ जैसा सब्र वाले होने के बावजूद सिसक रहें थे। मैं ज़्यादा देर बात नहीं कर पाया बस इतना कहा कि सब्र से काम लेना है। देखिए वे कितने ज़्यादा महोब्बत करने लायक थे कि आज पूरा इंडिया उनके लिए रो रहा है, उन्होंने जवाब में कहा कि हाँ भाई। उनकी ज़िंदगी एक कामयाब ज़िन्दगी थी।

इरफ़ान खान को अपनी वालिदा से कितनी मोहब्बत थी इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है, कि वे अपनी माँ से 3 दिन भी दूर नहीं रह पाए और चले गए उनके साथ ही एक दूसरी दुनिया में। अलविदा #इरफ़ान……  अल्लाह आपको जन्नत अता करे। आमीन।

~आपका एक बहुत छोटा सा फैन..

About Author

Dr Abrar Multani