क्या रेमडेसिवर कोरोना रोगियों के लिए संजीवनी है?

क्या रेमडेसिवर कोरोना रोगियों के लिए संजीवनी है?

मीडिया पर खबरे और उनके साथ विज़ुअल बार बार दिखाए जा रहे हैं जिसमें लोगों की लंबी कतार है जो अपने रिश्तेदारों के लिए रेमडेसिवर लेने के लिए खड़े हैं। इस खबर से आम लोगों के ज़हन में यह बात घर कर जाती है कि यही दवाई है बस इस रोग के ख़िलाफ़ और इसे […]

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 मधुमेह को हराकर ज़िन्दगी बनाएं मधुर

मधुमेह को हराकर ज़िन्दगी बनाएं मधुर

14 नवम्बर को इंसुलिन के खोजकर्ता के सम्मान में उनके जन्मदिन पर पिछले दो दशकों से विश्व डायबिटीज़ दिवस हर साल मनाया जाता है। विश्व भर में मनाए जाने वाले विभिन्न रोगों के नाम पर दिवसों के नाम रखने का मक़सद केवल और केवल रोगों के प्रति लोगों को शिक्षित और जागरूक करना है, डराना […]

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 धारणाएं बहुत शक्तिशाली होती हैं, गलत धारणा से बचिए !

धारणाएं बहुत शक्तिशाली होती हैं, गलत धारणा से बचिए !

धारणाएं बहुत शक्तिशाली होती हैं। किसी के खिलाफ धारणा बनवाकर आप उसके खिलाफ कोई भी सच्चे झूठे इलज़ाम लगाइये, लोग फौरन उसे सच मान लेंगे। मैंने अपने बचपन में देखा है कि, पास के एक गांव की एक जाति विशेष के लोग वहां चोरी के लिए कुख्यात थे। एक बार एक व्यक्ति के खेत पर […]

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 गैजेट्स के ‘काले आईनों’ में दिखता हमारा भविष्य

गैजेट्स के ‘काले आईनों’ में दिखता हमारा भविष्य

नेटफ्लिक्स की एक प्रसिद्ध वेब सीरीज ‘ब्लैक मिरर’ में टेक्नोलॉजी का भविष्य और उसके दुष्परिणामों को दिखाया गया है। उसमें एक से बढ़कर एक रोचक एपिसोड हैं लेकिन, मुझे सबसे बेहतरीन लगा- ‘मेन अगेंस्ट द फायर’। इस एपिसोड में फौजियों में एक एप्लीकेशन इंस्टॉल की जाती है- ‘मास नामक’। मास का मक़सद एक नस्ल विशेष […]

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 अलविदा इरफान

अलविदा इरफान

शायद यह जीवन में पहली बार है कि किसी फ़िल्मी सितारे के जाने पर मेरी आँखें नम हुई है। इरफ़ान खान बिल्कुल अपने जैसे लगते थे। उनकी बातें, उनकी सूरत, उनकी शक़्ल… सब हम आम लोगों जैसी ही थी। इसलिए अपने लगते थे। हिंदी मीडियम उनकी मुझे सबसे बेहतरीन फ़िल्म लगी। वह शायद भारतीय सिनेमा […]

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 कोरोना के मामले में कितना कन्फ़्यूज़ हैं विशेषज्ञ ?

कोरोना के मामले में कितना कन्फ़्यूज़ हैं विशेषज्ञ ?

स्वास्थ्य संगठनों और उनके कर्ताधर्ताओं ने पिछले दो माह में जितना दुनिया को भ्रमित किया है उतना एक साथ इतने कम समय में इतने सारे लोगों को कभी किसी विशेषज्ञों द्वारा नहीं किया गया। कोरोना को लेकर सभी संदेह में हैं। फर्क बस यह है कि आम लोग ज़्यादा और विशेषज्ञ उनसे थोड़ा कम सन्देह […]

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 अंतिम यात्रा की भीड़ और मन की शांति का सम्बंध

अंतिम यात्रा की भीड़ और मन की शांति का सम्बंध

मरने वालों को यह बात यकीनन सांत्वना देती है कि उनके अंतिम संस्कार में हज़ारों की भीड़ जमा होगी। यह एक अनोखा मनो अनुभव है। मरने वाले के परिजनों को भी यह बात कुछ शांति पहुंचाती है कि उनके अपने की अंतिम यात्रा में हज़ारों की भीड़ थी। उनके दुःख के हज़ारों सांझा हैं। उन्हें […]

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 कोरोना से इतना डराना कहीं घातक तो नहीं?

कोरोना से इतना डराना कहीं घातक तो नहीं?

सबसे पहले आप इस व्हाट्सएप वायरल मैसेज को पढ़िए- चेतावनी– अगर किसी को कोरोना हो गया तो आप सब से विनती है कि निम्नलिखित पर गौर करें : इलाज के लिए अकेले को ही ले जाया जाएगा। आइसोलेशन में अकेले को ही रखा जायेगा। मरीज़ को कोई नहीं मिल पायेगा। देखरेख के लिये परिवार का […]

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 आख़िर क्या है ये ‘हर्ड इम्युनिटी’ ?

आख़िर क्या है ये ‘हर्ड इम्युनिटी’ ?

कोरोना से निपटने के लिए अलग अलग देश अपने संसाधनों की क्षमता के अनुसार अलग अलग तरीक़े से लड़ रहें हैं। सबसे आम और अब तक सफल है – ‘वुहान शहर का लॉक डाउन मॉडल’। मतलब सब लोग घरों में बंद और सबकी ज़िम्मेदारी सरकार की। सबको यह मॉडल ठीक लग रहा है, लेकिन स्वीडन […]

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 क्या कोरोना की अल्पमृत्युदर को हल्के में लिया जाना चाहिए ?

क्या कोरोना की अल्पमृत्युदर को हल्के में लिया जाना चाहिए ?

कोरोना का डर अब लगभग हर एक के दिल में थोड़ा या ज़्यादा है। बुज़ुर्गों में ज़्यादा है और युवाओं में कम। वजह है मृत्यु का आंकड़ा। लोग कह रहें हैं केवल 1 से 3 प्रतिशत ही तो है। और वह भी अधिकतर मरने वाले बुज़ुर्ग हैं या फिर किसी जीर्ण रोग से शीर्ण हो […]

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