कर्नाटक चुनाव के परिणाम आने के बाद लगभग तस्वीर साफ़ हो चुकी है. भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई है. वहीं जेडीएस की भूमिका किंगमेकर की हो गई है. जिसके बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन का ऐलान किया है.
चुनाव से पूर्व जेडीएस खुद को किंगमेकर मान रही थी, लेकिन परिणाम ने उसे किंग बना दिया है. इस बीच बीजेपी के पास एक आखिरी दांव बचा है, जेडीएस और कांग्रेस के विधायकों को खरीदकर भाजपा जेडीएस-कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है.
पिछले दिनों गोवा, मणिपुर और मेघालय में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी सरकार नहीं बना पाई. क्योंकि परिणाम आने के पहले से बीजेपी ने दूसरी पार्टियों से मिलकर काम करना शुरू कर दिया था और कांग्रेस बहुमत की आस में बैठी थी. परिणामस्वरूप कांग्रेस बड़ी पार्टी होकर भी सत्ता से चूक गई और बीजेपी की रणनीति काम कर गई.
कर्नाटक की डोर इस वक्त जेडीएस के हाथ में है. बीजेपी और कांग्रेस उससे ज्यादा सीटें जीतकर भी उसके आगे झुक रही है और अब कांग्रेस ने समर्थन का ऐलान भी कर दिया है.
भाजपा नेता येदियुरप्पा राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भाजपा 100 फीसदी राज्य में सरकार बनाने जा रही है.
वहीं दूसरी ओर राज्यपाल से मुलाकात के बाद सिद्धारमैया और कुमारस्वामी ने मीडिया से बात की. बातचीत के दौरान सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस ने बिना किसी शर्त के जेडीएस को समर्थन देने की बात कही है. उन्होंने कहा कि हमने राज्यपाल को बताया है कि हम सरकार बनाने की स्थिति में हैं. हमारे पास 118 सीट है और हम सरकार बना सकते हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस अगर जेडीएस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करती तो चुनावी नतीजे दूसरे होते. बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले भी ममता बनर्जी ने दोनों को गठबंधन करने की सलाह दी थी. लेकिन इस बार कांग्रेस राजी नहीं हुई थी.

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