जिग्नेश मेवानी चुनाव जीत गए और बहुत से महत्वपूर्ण सवाल उन लोगों के दिमाग में छोड़ गए कि “क्या ये मुमकिन है” मैं कहता हूँ मुमकिन है,जिग्नेश मेवानी बहुत कम खर्च पर मामूली से तरीकों से विधायक बने है तो हर एक मेहनती और ज़मीनी इंसान विधायक बन सकता है,सासंद बन सकता है और मुख्यमंत्री भी बन सकता है ठीक वेसे ही “अरविंद केजरीवाल” ने करके दिखाया था।

क्या आप भूल गए? भूल गए है तो याद करिये केसे वो शख्स मुख्यमंत्री बन सकता है जिसे “बराबर” भी नही माना जा रहा था? केसे आखिर एक मामुली सी सरकारी नोकरी करने वाले मान्यवर कांशीराम देश को “बहुजन” राजनीति वाला दल खड़ा करके दिखा सकतें है और ये बता सकतें है कि हां मैं भी ऐसा कर सकता हूँ,क्या कार्ल मार्क्स ने बस ऐसे ही सब कुछ कर दिया था?

नही वो भी एक छात्र था उसने ये सब हासिल किया काबिलियत से,मज़दूरों से मिलकर बात करके और दुनिया को दिखाया,या नही? दिखाया क्योंकि कोई भी चीज़ आपसे बाहर है ही नही,और होगी भी क्यों?

क्या आप भूल गए एक मामूली से स्वयंसेवक ने सिर्फ अपनी काबिलियत पर पहले संसद में जगह पायी और देश का प्रधानमंत्री बना क्या भूल गए अटल बिहारी वाजपेयी को?

तमाम वैचारिक मतभेदों को परे रखिये और हरएक से सीखिये की हां उन्होंने ये सब जो भी किया अपने आप किया,ज़रा अंदाज़ा लगाइये भारत जैसे विशाल देश पर “मुग़ल साम्राज्य” स्थापित करना छोटी बात थी मगर बाबर ने ये करके दिखाया और आज इतिहास में उंसे याद किया जाता है पता है क्यों?

क्योंकि शुरू से लेकर आखिर तक और अब से लेकर जब तक मेहनत से,काबिलियत से और अपने काम के लिए ईमानदारी को लेकर किया गया काम “बेकार” नही जाता,इसलिए थोड़ा सोचिये की क्या क्या मुमकिन है और क्या क्या हो सकता है।

#वंदे_ईश्वरम