October 20, 2021

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से पहले वहां के उपराष्ट्रपति अमरउल्लाह सालेह थे। अफगानिस्तान के कबुल पर कब्जे के बाद से तालिबानियों के खिलाफ अमरउल्लाह सालेह पंजशीर घाटी में चले गए थे। पंजशीर घाटी में ही रेजिडेंस फौज के साथ तालिबान के खिलाफ लड़ रहे थे। जब से पंजशीर पर तालिबान ने अपने कब्जे का दावा किया है. तब से अमरउल्लाह वहां नहीं है।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से पूरे विश्व में अफगानी लोगों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरी तरफ अजीबो-गरीब इस्लामिक कानून को बढ़ावा देना और बंदूक के दम पर अफगानिस्तान के अलग-अलग इलाकों पर तालिबान अपना कब्जा जमा चुका है। लोग के अंदर का डर हर दिन बढ़ता जा रहा है। खासकर महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए बेहद चिंतित हैं।

तालिबानियों के हाथ लगी सोने की ईंट-
तालिबानियों के द्वारा पंजशीर प्रांत में अमर उल्लाह सालेह के घर से एक  खजाना हाथ लगा है। इस बात की पुष्टि तालिबानियों ने एक वीडियो को शेयर करते हुए की है। हालांकि अभी तक पूर्व उपराष्ट्रपति अमरउल्लाह सालेह की इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमर उल्लाह अभी तक कहां है इसकी भी किसी को कोई जानकारी नहीं है।

तालिबान ने सालेह के घर से 6. 5 मिलियन डॉलर (लगभग 48 करोड रुपए) नकद और सोने की 18 सोने ईटें मिलने का भी दावा किया है। यह सब तालिबान को पंजशीर में चलाए गए ऑपरेशन के दौरान साहेल के घर से प्राप्त हुई है। एक वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह तालिबानी एक बैग में भरे अमेरिकी डॉलर  गिन रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति पर भी लगे थे पैसा ले जाने के आरोप
15 अगस्त को तालिबानियों द्वारा काबूल पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी पर भी आरोप लगे थे, कि वे देश का पैसा लेकर सऊदी अरब चले गए थे। उनका पैसा 4 कार और हेलीकॉप्टर में नहीं आया था। इसलिए उन्होंने कुछ पैसा छोड़ दिया था।

तजाकिस्तान में स्तिथ अफगानिस्तानी एंबेसी ने अशरफ गनी की गिरफ्तारी की मांग की थी। एंबेसी ने अशरफ गनी पर आरोप लगाया था, कि वे देश का पैसा लेकर भाग गए हैं। जो कि देश की जमा पूंजी है। हालांकि गनी ने इन सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया था।

उन्होंने कहा कि उनके ऊपर जितने भी आरोप लगाए गए हैं। ये सभी बेबुनियाद है, क्योंकि जब मैं अफगानिस्तान छोड़कर सऊदी अरब आया था तो पैसों तो छोड़ो, मैं दूसरे जूते तक नहीं पहन पाया था। यह सब मेरी चारित्रिक हत्या करने की कोशिश है। इसको लेकर कस्टम विभाग के अधिकारियों से भी पूछताछ करनी चाहिएं।

अमर उल्लाह के भाई को बर्बरतापूर्ण तरीके से मारा-
पंजशीर घाटी में अपने ऑपरेशन के दौरान तालिबानी अमर उल्लाह के घर में घुस गए और उनके भाई रोमुल्ला अजीज को भी मार डाला है। तालिबानियों ने रोमुल्ला को गोलियों से मारने के बाद उनके शव के साथ बर्बरता की। शव को दफनाया भी नहीं और ना ही परिवार वालों को सौंपा। शव को सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। अमर उल्लाह के घर से तलाशी लेते वक्त ही तालिबानियों के हाथ खजाना लगा और अमर उल्लाह के घर की लाइब्रेरी से एक तालिबानी ने अपना फोटो भी शेयर किया।

वही पंजशीर घाटी में तालिबान के कब्जे के बाद से अमर उल्ला सालेह और अहमद मसूद को बड़ा झटका लगा है।  दोनों ने पंजशीर घाटी को छोड़ दिया है। एक टीवी चैनल पर सालेह ने रोते हुए अपनी भाई की मौत का दुख प्रकट किया। जिसमें उनके आंसू भी नहीं रुक रहे थे। तालिबानियों ने आखिरी बार उन्हें देखने तक का मौका नहीं दिया।

पंजशीर घाटी वही जगह है जहां से सालेह और अहमद मसूद ने तालिबान के खिलाफ जंग जारी रखने के लिए आवाज उठाई थी और सालेह ने अपने आप को उपराष्ट्रपति घोषित किया था। अभी दोनों सुरक्षित जगह पर है। तालिबान के खिलाफ इनकी जंग जारी रहेगी या घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ेगा?

कासवर कलासरा ने TV9 को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि, किसी भी उपराष्ट्रपति के घर से इतना सोना और पैसा मिलना आम बात है बल्कि अब भी वो उपराष्ट्रपति है क्योंकि पंजशीर में वो डटे रहे। उन्होंने इसे लॉजिकली सोचने के लिए कहा। फोर्स में सभी सैनिक और उनके परिवार वालों की मदद भी कर रहे थे।

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Nidhi Arya