राजनीति

जब कांग्रेस ने कराई थी ओवैसी की गिरफ्तारी

जब कांग्रेस ने कराई थी ओवैसी की गिरफ्तारी

साल 2013 में असदुद्दीन ओवैसी को कर्नाटक में गिरफ्तार कर लिया गया था। हमेशा की तरह उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप था। हालांकि ओवैसी के मुताबिक उन्हें गलत आधार पर गिरफ्तार किया गया था।

उस समय कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज थे जो कांग्रेस के नेता थे,वहीं देश मे कोंग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी। इन दोनों की चर्चा यहाँ दिलचस्प इसलिए है क्योंकि यूपीए की सरकार में जहाँ ओवैसी को गिरफ़्तार किया गया था वहीं उन्हें जेल से निकलने में कांग्रेस के नेता और कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज का हाथ था।

ओवैसी ब्रदर्स आने बयानों के लिए जाने जाते हैं

AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी अपने तीखे प्रहार के लिए जाने जाते हैं। इसी बात को लेकर विपक्ष उनपर हमलावर भी रहती है। लेकिन ओवैसी भी कहा चूक करते हैं।केंद्र में चाहे एनडीए की गवर्मेंट हो या यूपीए की, ओवैसी उनपर अक्सर निशाना साधा करते हैं।

यूपीए की गवर्मेंट में हुए थे गिरफ्तार

जनसत्ता के हवाले से ,ओवैसी ने एक बार खुलासा किया था कि 2013 में कर्नाटक से उन्हें गलत आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया था।इस समय देश मे यूपीए सरकार थी वही कर्नाटक में हंसराज भारद्वाज हुआ करते थे।उन्हें जब मेरी गिरफ्तारी की बात पता चली तो पार्टी से अलग लाइन में चलकर उन्होंने मुझे जेल से निकालने में मदद की थी। एक मात्र उनका हस्तक्षेप ही था जिसके कारण मैं और मेरे समर्थक बाहर आ पाए।

भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की भी हुई थी गिरफ्तारी

2013 में ही असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की भी गिरफ्तारी की गई थी। उनकी गिरफ्तारी भी भड़काऊ भाषण देने के आरोप में हैदराबाद से की गई थी। हालांकि बाद में इस उन्हें जमानत मिल गयी थी।अकबरुद्दीन हैदराबाद के चंद्रयान गुट से एआईएमआईएम के विधायक केंडिडेट हैं। वहीं अपने भाई की भांति अकबरुद्दीन भी अपने तीखे प्रहार और बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं।

भड़काऊ भाषण का था आरोप

अकबरुद्दीन ओवैसी पर आरोप था कि उन्होंने हैदराबाद के आदिलाबाद के निर्मल टाऊन में अपने भाषण में भड़काऊ बातें कही थी। इनसे हिन्दू और मुस्लिमो के बीच नफरत पैदा हो सकती थी वहीं धार्मिक भावनाओं को ठेस भी पहुंच सकती थी।

बीबीसी की रिपोर्ट लिखती है कि दोनों भाइयों ने इस पर कोई टिका टिप्पणी नहीं कि थी।उनका कहना था कि मामला अदालत में हैं और विचाराधीन हैं।इसलिए पार्टी की तरफ से कोई टिका टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

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Ankit Swetav