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निर्दलीय रहे यूपी निकाय चुनाव के किंग, राजनैतिक दलों के लिए चिंतन का समय

निर्दलीय रहे  यूपी निकाय चुनाव के किंग, राजनैतिक दलों के लिए चिंतन का समय

क्या अब देश की जनता का राजनीतिक पार्टियों से विश्वास उठने लगा है ? यह सवाल सुनकर आप चौंक सकते हैं. पर आपका चौंकाना ज़रूरी है.क्योंकि उत्तरप्रदेश के नगरीय निकाय के जो परिणाम आये हैं. वह राजनीतिक पार्टियों के लिए चिंता का विषय है. परिणाम के दिन जब सारे चैनल्स नगर निगम चुनाव के आधार पर भाजपा को इस लड़ाई में अव्वल बता रहे थे. तब किसी ने भी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के परिणामों पर गौर करने की ज़हमत न की. नगर पालिका अध्यक्षों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर जिस तरह से निर्दलीय प्रत्याशियों ने प्रदर्शन किया है, उसे आपको जानना चाहिए !

देखें चुनाव आयोग की वेबसाईट से लिए गए इन आंकड़ों को

चुनाव आयोग की वेबसाईट से लिए गए आंकड़े

अब देखिये चुनाव आयोग की ही वेबसाईट से लिए गए निर्दलियों के आंकड़े

चुनाव आयोग की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

वरिष्ठ लेख़क एवं इतिहासकार अमरीश मिश्रा कहते हैं- उत्तर प्रदेश नगर निकायों में नम्बर 1 पर रहें हैं निर्दलीय! जी हां.

  • नगर निगम की कुल सीटें 16; भाजपा जीती 14, बसपा 2
  • नगर पालिका परिषद की कुल सीटे 198; भाजपा जीती 70; सपा 45; निर्दलीय 43; बसपा 29; कांग्रेस 9
  • नगर पंचायत की कुल सीटें 438; निर्दलीय जीते 182; भाजपा जीती 100, सपा 83; बसपा 45; कांग्रेस 17 .
  • मतलब कुल 652 सीटों में, निर्दलीय 224 सीट जीत कर नम्बर 1 पर रहे! और भाजपा 184 जीत कर दूसरे पर.

भाजपा के वोट प्रतिशत में आई भारी कमी

इतना ही नहीं, लेख़क एवं किसान क्रान्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरेश मिश्रा वोट प्रतिशत पर भी बात करते हुए कहते हैं,कि – भाजपा ने 2017 विधान सभा चुनावों में 42% वोट लिये थे। तीनो निकायों को मिला कर भाजपा कुल पोल हुए 4 करोड़ वोटों में 30% में सिमट कर रह गयी। निर्दलियों का वोट प्रतिशत भाजपा से बढ़ कर 32% है।

पुरानी राजनीति से ऊब गए हैं लोग

अमरेश मिश्रा जी आगे कहते हैं –

सपा तीसरे और बसपा चौथे पर। तो मतलब अब उत्तर प्रदेश की राजनिती नई ताक़तो के उभरने का समय आ गया है। महिलायें, छात्र, युवा पुरानी राजनिती से ऊब गये हैं। उत्तर प्रदेश के लोगों ने भाजपा को खारिज किया। उत्तर प्रदेश के लोगों ने योगी को खारिज कर दिया। भाजपा ने EVM में बदमाशी की। मुसलमानो और दलितों को वोट नही डालने दिया। झांसी नगर निगम में बसपा के जीतते हुए उम्मीदवार को प्रशासन ने हरवाया। EVM की गड़बड़ी का नंगा नाच हुआ।

आज यदि चुनाव हो जाएँ तो

आगे अमरेश मिश्रा जी कहते हैं. कि आज अगर UP में चुनाव हो जायें, तो BJP 150 नही पार कर सकती। सांसदी में 30-35 सीट से भाजपा नही ला सकती।  इस बार ब्राहमण, यादव, मुस्लिम और दलित ने भाजपा के खिलाफ वोट किया. अजय सिंह उर्फ योगी के जाना तय है

सच्चाई यह है, कि भाजपा दूसरे नंबर रही है-

उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी भी नही बन पायी! ये नोटबन्दी से ज़्यादा बड़ा स्कैम है। अभी तक आपने बूथ कब्ज़ा इत्यादी देखा और सुना होगा। पर यह क्या है? की सच्चाई ही को गायब कर दो! सच्चाई के एक छोटे पहलू को दिखाओ जिसमे तुम्हारा फायदा है। और सच्चाई गोल कर जाओ।

न्यूज़ चैनल्स पर दिन भर चला झूठ –

दिन भर टीवी पर क्यूं चला की BJP SWEEPS LOCAL BODY POLLS! झूट, झूट, झूट, झूट, झूट, झूट, झूट. इन्तिहा कर दी। असल  के सामने अपनी एक फ़ेक, पैरेरल रियलिटी खड़ी कर दी! सब लोग इस साज़िश में शामिल हैं। किसी ने ये नही कहा की भाजपा बुरी तरह हार गयी है। सच सुनने को तैयार हो जाईये अगर झेल सकें तो. उत्तर प्रदेश नगर निकायों में नम्बर 1 पर रहें हैं निर्दलीय! जी हां.

योगी के वार्ड में निर्दलीय से हारी भाजपा

निर्दलीय प्रत्याशियों का जादू किसक़दर हावी रहा इसका एक नमूना उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह ज़िले गोरखपुर में देखने को मिला. जहाँ पर गोरखनाथ मंदिर के वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी को पटखनी दी. जिसके बाद विरोधियों की ओर से कुछ इस तरह की प्रतिक्रियाएं आईं कि योगी जी , जब अपना वार्ड नहीं जिता सके तो गुजरात क्या जिताएंगे.
विरोधी दलों के अनुसार गुजरात चुनाव में भाजपा की खस्ता हालत की वजह से यह कोशिश की गई, ताकि यूपी के नगरीय निकायों के नाम पर गुजरात में फ़ायदा उठाया जा सके.

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