व्यक्तित्व

दुनिया को रौशनी की तरफ़ ले जाने वाला वैज्ञानिक

दुनिया को रौशनी की तरफ़ ले जाने वाला वैज्ञानिक

आज एक ऐसे वैज्ञानिक का जन्मदिन है जिसने दुनिया को रोशनी का उपहार दिया. हालांकि ख़ुद उसकी आधी ज़िन्दगी अंधेरों में संघर्ष के बीच बीती. जी हाँ बात हो रही है थॉमस अलवा एडिसन की.
11 फ़रवरी 1847 को अमेरिका के ओहियो राज्य में जन्में एडिसन ने इतने आविष्कार किए की उसे आविष्कारों का बादशाह कहा जा सकता है. अमेरिका में 1093 पेटेंट उसके नाम दर्ज हैं. इंग्लैंड, जर्मनी तथा दूसरे देशों के पेटेंट इनमें शामिल नहीं हैं. उनका  सबसे प्रसिद्ध अविष्कार बिजली का बल्ब है. जो आज घर-घर की शोभा है. एडिसन ने ही इलेक्ट्रिक पॉवर को घर और उद्योगों तक पहुंचाने की पद्धति विकसित की. उन्होंने ने ही पहली बार वस्तुओं को औद्योगिक पैमाने पर बनाने का फ्रेमवर्क तैयार किया, और पहली औद्योगिक प्रयोगशाला की बुनियाद रखी.

चार साल की आयु तक एडिसन ने बोलना नहीं सीखा था. एडिसन जब  प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे तब एक दिन स्कूल में टीचर ने एडिसन को एक मुड़ा हुआ कागज दिया और कहा कि यह ले जाकर अपनी मां को दे देना. एडिसन घर आए और अपनी मां को वह कागज देते हुए कहा, ‘टीचर ने यह आपको देने को कहा है.’
मां ने वह कागज हाथ में लिया और पढ़ने लगी. पढ़ते-पढ़ते उनकी आंखों से आंसू बहने लगे.एडिसन ने मां से पूछा, ‘इसमें क्या लिखा है मां? यह पढ़कर तुम रो क्यों रही हो?’ आंसू पोंछते हुए मां ने कहा, ‘इसमें लिखा है कि आपका बेटा बहुत होशियार है और हमारा स्कूल नीचे स्तर का है. यहां अध्यापक भी बहुत शिक्षित नहीं हैं.इसलिए हम इसे नहीं पढ़ा सकते. इसे अब आप स्वयं शिक्षा दें.’
उस दिन के बाद से मां खुद उन्हें पढ़ाने लगीं और मां के ही मार्गदर्शन में एडिसन पढ़ते रहे, सीखते रहे. कई वर्षों बाद मां गुजर गई.मगर तब तक एडिसन प्रसिद्ध वैज्ञानिक बन चुके थे.

एक दिन फुर्सत के क्षणों में वह अपने पुरानी यादगार वस्तुओं को देख रहे थे. तभी उन्होंने आलमारी के एक कोने में एक पुराना खत देखा और उत्सुकतावश उसे खोलकर पढ़ने लगे. यह वही खत था जो बचपन में एडिसन के शिक्षक ने उन्हें दिया था. उन्हें याद था कि कैसे स्कूल में ही उन्हें अत्यधिक होशियार घोषित कर दिया गया था. मगर पत्र पढ़ कर एडिसन अचंभे में पड़ गए.

उस पत्र में लिखा था, ‘आपका बच्चा बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर है. इसलिए उसे अब स्कूल ना भेजें.’ अचानक एडिसन की आंखों से आंसू झरने लगे. वह घंटों रोते रहे और फिर अपनी डायरी में लिखा,

एक महान मां ने बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर बच्चे को सदी का महान वैज्ञानिक बना दिया.’

बचपन से ही एडिसन को  तरह के प्रयोग करने का शौक था. इसके लिए पूँजी जुटाने के लिए उसने समाचार पत्र और सब्जियां भी बेचीं.आविष्कारक के रूप में एडिसन का पहला पेटेंट इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर था. हालांकि उसके इस अविष्कार को खरीदने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई. इसके बाद उसने हारमोनिक टेलीग्राफ का अविष्कार किया, जिससे प्रेरणा पाकर अलेक्जेंडर बेल ने बाद में टेलीफोन का अविष्कार किया.

एडिसन की टेलीग्राफिक थ्योरी के आधार पर पर ही माइक्रोफोन और फैक्स मशीन जैसी वस्तुएं अस्तित्व में आईं. टेलीफोन के रिसीवर में प्रयोग होने वाला कार्बन माइक्रोफोन एडिसन का ही अविष्कार था जो पूरे सौ साल तक प्रयोग होता रहा. किंतु एडिसन का सबसे चर्चित अविष्कार निस्संदेह विद्युत बल्ब है. पूरे दो साल की जीतोड़ मेहनत के बाद एडिसन ने ऐसा बल्ब बनाने में सफलता प्राप्त की जो सस्ता, टिकाऊ था और जिसका बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन किया जा सकता था.उन्होंने बल्ब का आविष्कार करने के लिए हजारों बार प्रयोग किए थे तब जाकर उन्हें सफलता मिली थी.

एक बार जब वह बल्ब बनाने के लिए प्रयोग कर रहे थे तभी एक व्यक्ति ने उनसे पूछा आपने करीब एक हजार प्रयोग किए लेकिन आपके सारे प्रयोग असफल रहे और आपकी मेहनत बेकार हो गई. क्या आपको दुख नहीं होता?
तब एडिसन ने कहा,

“मैं नहीं समझता कि मेरे एक हजार प्रयोग असफल हुए है. मेरी मेहनत बेकार नहीं गई क्योंकि मैंने एक हजार प्रयोग करके यह पता लगाया है कि इन एक हजार तरीकों से बल्ब नहीं बनाया जा सकता. मेरा हर प्रयोग, बल्ब बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है और मैं अपने प्रत्येक प्रयास के साथ एक कदम आगे बढ़ता हूं.”

कोई भी सामान्य व्यक्ति होता तो वह जल्द ही हार मान लेता लेकिन थॉमस एडिसन ने अपने प्रयास जारी रखे और हार नहीं मानी. आखिरकार एडिसन की मेहनत रंग लाई और उन्होंने बल्ब का आविष्कार करके पूरी दुनिया को रोशन कर दिया. यह थॉमस एडिसन का विश्वास ही था जिसने आशा की किरण को बुझने नहीं दिया नहीं और पूरी दुनिया को बल्ब के द्वारा रोशन कर दिया.

इस बल्ब में कार्बन फिलामेंट का प्रयोग किया गया था. वर्तमान में टंगस्टन का फिलामेंट प्रयोग होता है. एक्सरे रेडिओग्राफ उतरने के लिए एडिसन ने फ्लोरोस्कोप का अविष्कार किया. वर्तमान में यही तकनीक इस्तेमाल होती है.
फ़िल्म मीडिया में भी एडिसन ने उल्लेखनीय कार्य किए. उन्होंने आवाज़ की रिकॉर्डिंग व पुनरुत्पादन के यंत्र फोनोग्राफ का अविष्कार किया, जो बाद में ग्रामोफोन के नाम से लोकप्रिय हुआ. उसका बनाया काइनेटोग्राफ़ विश्व का पहला मूवी कैमरा था.
अमेरिका को विकसित राष्ट्र और महाशक्ति बनाने में एडिसन जैसे कर्मठ वैज्ञानिकों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है.

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Durgesh Dehriya

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