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शासक की तस्वीर जलने से नहीं बचा पाई महिला तो हो गई सज़ा 

शासक की तस्वीर जलने से नहीं बचा पाई महिला तो हो गई सज़ा 

नॉर्थ कोरिया जिसका नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले उस देश के तानाशाह शासक किम जोंग की छवि जोकि पूरे विश्व में एक क्रूर शासक के रूप में देखी जाती है। और इस देश की सबसे अजीबो-गरीब बात वहां के कानून प्रक्रिया है।

1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में जापानी आत्मसमर्पण के बाद, कोरिया को संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ द्वारा दो क्षेत्रों में विभाजित कर दिया गया। जहां पर इसके उत्तरी क्षेत्र पर सोवियत संघ तथा दक्षिण क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा कब्जा कर लिया गया। 1945 में जब दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो दोनों देशों के मध्य महज ढाई मिल की ये तारबंदी एक दूसरे से अलग करती है। इसके बावजूद इसे दुनिया के सबसे खौफनाक बॉर्डर के तौर पर जाना जाता है ‌।

उत्तरी कोरिया जिसका शासक तानाशाह के रूप में पूरे विश्व में विख्यात है। उसी तरह इस देश की कानून व्यवस्था और प्रक्रिया को सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। जहां पर एक आम नागरिक से छोटी सी गलती हो जाने पर उसकी तीन पीड़ियों को सजा भुगतनी पड़ती है। ऐसे कानूनों का चर्चा का विषय बनना लाज़मी है।

किम-जोंग-उन की तस्वीर घर में लगाना है अनिवार्य

नॉर्थ कोरिया में 5 साल में एक बार चुनाव होते हैं और किम जोंग के खिलाफ कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं होता है। इस तरह से बीते वर्षों से किम जोंग उन ही नॉर्थ कोरिया की सत्ता पर काबिज है। प्रत्येक घर में किम जोंग के परिवार की फोटो लगाना अनिवार्य है और जिसमें किम इल सुंग और किम जंग इन  की तस्वीर है।

उस पर धूल जमने पर भी उम्र कैद की सजा हो सकती है। पिछले साल जनवरी में एक महिला के घर में आग लगने पर उसने अपने बच्चे और पति को तो बचा लिया परंतु उसने उन तस्वीरों को नहीं बचाया। जिसकी वजह से महिलाओं को सजा मिली थी।

गरीबों की फोटो लेना है सख्त मना 

रिपोर्ट के मुताबिक वहां के लोग 7 दिन तक नौकरी करते हैं एक भी दिन छुट्टी का नहीं होता है। 6 दिन जॉब के और एक दिन देश के लिए काम करते है। नॉर्थ कोरिया के नागरिकों के लिए न्यूज़ पेपर बस स्टैंड पर लगा दिया जाता है और वही उनके यहां सिर्फ 3 चैनल ही टीवी पर दिखाई जाते हैं। गरीबों की फोटो लेना वहां पर सख्त मना है। आम लोगों के लिए वहां पर इंटरनेट की भी सुविधा नहीं है। सिर्फ बड़े नेता और मिलिट्री के अधिकारियों के लिए नेट की सुविधा उपलब्ध है।

Kong meow और red star नाम का अपना एक एक्सेस है। यहां के लोगों के लिए सिर्फ 28 हेयर स्टाइल अपनाने की इजाजत है। जिसमें किम जोंग का हेयर स्टाइल सबसे बेहतर है। कोई भी व्यक्ति किम जोंग का नाम अपने परिवार में नहीं रख सकता है अगर रखता है तो उसे पूरी तरह से बदलना होगा ‌। नार्थ कोरिया दुनिया का इकलौता नास्तिक देश माना जाता है जहां पर बाइबल ,कुरान और धार्मिक किताबें भी नहीं ले जा सकता।

खुद को दिया भगवान का दर्जा 

किम-जोंग-उन ने अपनी बायोग्राफी में लिखते हुए खुद को भगवान का दर्जा दिया है। नॉर्थ कोरिया में 8 जुलाई और 17 दिसंबर को शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश का कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का सेलिब्रेशन नहीं कर सकता है। इनका कैलेंडर भी बहुत ही अलग है। जोकि 15 अप्रैल 1912 जब इनके किम इल सुंग का जन्म हुआ था। नार्थ कोरिया में इसी दिन से नये वर्ष की शुरूआत मानी जाती है। जहां दुनिया 2020 में जी रही है वहीं नॉर्थ कोरिया 109 साल मना रहा है।

आम आदमी से बात नहीं कर सकते टूरिरस्ट 

नॉर्थ कोरिया में टूरिस्ट किसी भी आम नागरिक से बात नहीं कर सकते हैं। टूरिस्ट हमेशा मिलिट्री की निगरानी में रहते हैं। टूरिस्ट का फोन भी एयरपोर्ट पर रख लिया जाता है, और जाते वक्त फोन वापस दे दिया जाता है। कई टूरिस्ट बताते हैं की नॉर्थ कोरिया अपने फेस्टिवल्स और अपने कल्चर को लेकर प्रसिद्ध है। नॉर्थ कोरिया में अभी भी कुल 100 लोगों पर ही कार का उपयोग देखने को मिलता है। आम आदमियों के कारें न के बराबर हैं। 

उत्तर कोरिया के लोगों का हमेशा से ही सिखाया जाता है कि किम जोंग उन सब कुछ जानते हैं और अगर उन्हें टीम के खिलाफ विचार रखने वाले किसी व्यक्ति के बारे में पता चले तो प्रशासन को इसकी जानकारी दें, फिर चाहे वह शक्स  उनके घर का ही क्यों ना हो। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया की सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने अब इन हालातों को और भी सख्त बनाने का फैसला किया है।

जिसके मुताबिक कोई भी शख्स साउथ कोरिया, अमेरिका और जापान से बड़ी तादाद में मीडिया से जुड़ी सामग्री के साथ पकड़ा जाता है तो उसे मौत की सजा हो सकती है। दक्षिण कोरिया की गालियों और आम बोलचाल की भाषा को भी बैन लिस्ट में शामिल किया गया है। इससे पहले विदेशी फैशन को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया था। लोगों को कहा गया कि उत्तर कोरिया की भाषा सर्वश्रेष्ठ है।

यही कारण है कि उत्तर कोरिया के लोग ज्यादातर अपना देश छोड़कर दूसरे देश में बसने की कोशिश करते हैं। इतनी सख्त कानून और अमानवीय व्यवहार के साथ-साथ शिक्षा में भी अपने ही इतिहास को पढ़ाया गया है। खास कर उनके तानाशाह शासक की बहादुरी के किस्सों के बारे में स्कूल में पढ़ाया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा नार्थ कोरियो दुनिया भर से अलग-थलग करके रखा जाता है।  यहाँ लोग बिना मानव अधिकारों के जीने को मजबूर हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में नॉर्थ कोरिया एक बंदीगृह बन जाएगा।

 

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Nidhi Arya