देश के जानेमाने उद्योगपति गौतम अडानी “दि इकोनामिक एंड पोलिटिकल वीकली” के खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा हार गए हैं.
गुजरात की एक स्थानीय कोर्ट ने साप्ताहिक अंग्रेजी पत्रिका “दि इकोनामिक एंड पोलिटिकल वीकली” के पूर्व एडिटर-इन-चीफ प्रणंजय गुहा ठाकुरता, तीन और पत्रकारों समेत न्यूज़ पोर्टल “द वायर” के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने बचाव पक्ष को 3500 शब्दों के लेख से केवल एक वाक्य और एक क्रिया विशेषण को हटाने के लिए कहा है.
मैगजीन “दि कारवां” के हवाले से आयी खबर में बताया गया है कि 16 नवंबर के अपने एक आदेश में कच्छ स्थित भुज के प्रिंसिपल वरिष्ठ सिविल जज जैमिनकुमार आर पंडित ने प्रकाशकों और लेखकों के खिलाफ दायर मानहानि की अपील को खारिज कर दिया था.
परन्तु मुकदमे के हाईप्रोफाइल होने के बावजूद मीडिया ने इस खबर को दरकिनार कर दिया था. हालांकि जज ने “ हाईकोर्ट को गुमराह किया गया था और सेज से डीटीए तक की बिजली के कस्टम ड्यूटी को गलत तरीके से दर्ज किया गया था जिससे वो पैमाने पर खरा नहीं उतरेगा क्योंकि उससे दोहरे कर का रास्ता खुल जाएगा.” के वाक्य को लेख से हटाने के लिए कहा था.
इसके साथ ही जज ने उसी पैराग्राफ से क्रिया विशेषण के तौर पर इस्तेमाल शब्द “आश्चर्यजनक” को भी हटाने का निर्देश दिया था.
ज्ञात रहे कि अडानी ने गुजरात की एक स्थानीय कोर्ट ने साप्ताहिक अंग्रेजी पत्रिका “दि इकोनामिक एंड पोलिटिकल वीकली” के पूर्व एडिटर-इन-चीफ प्रणंजय गुहा ठाकुरता, तीन और पत्रकारों समेत न्यूज़ पोर्टल “द वायर” के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे किया था.

क्या था मामला ?

अंग्रेजी पत्रिका दि इकोनामिक एंड पोलिटिकल वीकली (ईपीडब्ल्यू)  ने  “मोदी सरकार का अडानी समूह को 500 करोड़ का तोहफा” शीर्षक से ये लेख 17 जून, 2017 के में प्रकाशित हुआ था और उसके बाद 19 जून को “द वायर” ने भी इसे प्रकाशित किया था.
इस खबर के छपने के बाद अडानी इतने नाराज हो गए थे कि ईपीडब्ल्यू को एडिटर-इन-चीफ प्रणंजय गुहा ठाकुरता को हटाना पड़ गया था.
इसके बाद पहले 24 जून और फिर 5 जुलाई को अडानी समूह ने ईपीडब्ल्यू के प्रकाशक समीक्षा ट्रस्ट और लेख के लेखकों प्रणंजय गुहा ठाकुरता, अबीर दासगुप्ता, अद्वैत राव पलेपू और शिंजानी जैन को मानहानि को नोटिस भेजा था.
 

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