असम में आज 40 लाख लोगों का नाम नागरिकता की लिस्ट में नही है . कुछ लोग राजनाथ सिंह के बयान के आधार पर बता रहे है की सब कुछ ठीक है पैनिक नही लेना चाहिए लेकिन असम में अफरातफरी का माहौल है पूरे असम में धारा 144 लागू है. केवल बराक वैली के तीन शहरों में ही नहीं 100 प्लाटून रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स तैनात ह, फ्लैगमार्च किया जा रहा है ये पैनिक सरकार क्यो फैला रही है?

  • सरकार कह रही है ये फाइनल लिस्ट नही है अगर ये फाइनल लिस्ट नही है तो इसको जारी करके माहौल खराब करने की क्या ज़रूरत थी.
  • असम के DGP पुलिस क्यो पत्रकारों को धमकी दे रहे हैं, क्यो आउटलुक और न्यूज़ क्लिक को मुक़दमा क़ायम करने की धमकी दी गयी है.
  • जो लोग सुप्रीम कोर्ट की बात कर रहे है वो भी इस मामले को देख ले
    सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम पंचायत के सर्टिफिकेट को प्रॉपर डॉक्यूमेंट माना, वहाँ पर NRC ने उसको मानने से इनकार किया. दोबारा सुप्रीम कोर्ट गए उन्होंने 1 सितंबर का डेट दिया जबकि वकील कहते रहे ही 30 तारीख को तो लिस्ट आनी है, लेकिन सुना नही गया.
  • 4 साल से एक ही जज उज्ज्वल भुइयां ही क्यो सारे मामले वो ही क्यो देख रहे थे क्यो रोटेशन पालिसी नही हुई क्यो उज्ज्वल भुइयां लगातार फॉरेन ट्रिब्यूनल को ब्रीफ करते थे.
  • पिछली लिस्ट आने में 71 लोगो ने आत्महत्या करी थी,इस बार फाइनल लिस्ट में ये तादाद ज़्यादा हो सकती है इसका जिम्मेदार कौन होगा.
  • जो लोग कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कर रहे है उनको ये भी बता दे की बार काउंसिल के प्रेसिडेंट शहज़ाद की पत्नी और वाईस प्रेसिडेंट अजीजुल का खुद का नाम विदेशी की लिस्ट में है, वो खुद परेशान घूम रहे हैं.
  • ग्वालपाड़ा में एक मामले एक ही तरह के चार पेपर होने पे असमी को भारतीय और बंगला बोलने वाले मुस्लमान को विदेशी. जिस से इस तरह के कई मामलों से गुस्साये वकीलों ने जज पर हमला कर दिया था. आज भी वकील जेल में हैं.
  • जब पिछली बार उनके मामले को सही से हैंडल नही किया गया तो क्या दोबारा वो सही हो जाएगा क्या?

बॉर्डर पुलिस के रिटायर्ड SP को, डिप्टी स्पीकर और मशहूर स्वाधीनता संग्राम सेनानी के परिवार को और सैकड़ो सरकारी कर्मचारियों को विदेशी बना कर लिस्ट से बाहर कर दिया गया.

40 लाख 70 हज़ार लोग जिसमे से बड़ी आबादी गरीब है, वो दो रोटी के लिए मेहनत करेगी कि मुक़दमे लड़ेगी, सैकड़ो लोगो से मैं खुद मिला हूँ जिनके सारे पेपर होने के बावजूद फेक दिए गए. लोगो को नोटिस नही मिला. एक्स पार्टी जजमेंट के आधार पर गिरफ्तार है.

अगर सब सही है तो जो 3 हज़ार लोग जेल भेज दिए गए डाउटफुल के नाम पर् उनको क्यो गिरफ्तार किया गया जो 30 हज़ार लोगो के गिरफ्तार करने की लिस्ट 15 दिन पहले जारी हुई है वो क्यो हुई है. बाकी लिखने को बहुत कुछ है कल सुप्रीम कोर्ट की तारीख है उसके बाद अज़मा से आये हुए साथियों के मीटिंग के बाद क्या किया जाए ये तय होगा.

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