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तालिबान ने अमरीका को दिखाई आंख

तालिबान ने अमरीका को दिखाई आंख

काबुल अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान ने अमरीका को आंखे दिखाना शुरू कर दिया है।  तालिबान ने अमरीका को धमकाते हुए कहा कि अगर जो बाइडन सरकार ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को 31 अगस्त तक वापस नहीं बुलाया, तो उसे  गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

अफगानिस्तान में अपनी सरकार बनाने के लगातार प्रयास कर रहे तालिबान अब अपना अधिपत्य स्थापित करना शुरू कर दिया है, साथ ही उसने अमरीका को भी चेतावनी दे दी है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहली 11 सितंबर 2021 तक अमरीकीसैनिकों की वापसी की डेडलाइन रखी थी और कहा था कि अमरीका के सबसे लंबे युद्ध को समाप्त करने का समय आ गया है। 

अफगानिस्तान से अधिकतर अमरीकीसैनिक वापस भी लौट चुके हैं। तालिबान ने अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन को धमकी दी है कि वह 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से अपने बचे हुए सैनिकों वापस बुला ले, वरना उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

लोगों को वापस बुलाने का काम है कठिन-जो बाइडन

इसी बीच अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बयान दिया था, उन्होंने कहा था कि काबूल से हजारों लोगों की वापस लाने का काम कठिन और पीड़ादायक होगा। चाहे इस काम की शुरुआत कभी भी की जाए। टीवी पर दिखाई जा रही दर्दनाक एवं दिल दहला देने वाली तस्वीरों के बिना नहीं सारे लोगों को निकालने का कोई तरीका नहीं था।

तालिबान की चेतावनी के बाद अब अमरीका ने भी 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से अपनी सेना को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है । यही नहीं, जिन अमरीकीसैनिकों को अफगानी लोगों को निकालने के लिए भेजा गया था, उन्हें भी  31 अगस्त तक अमरीका से निकालने योजना बनाई जा रही  है।

अमरीका के सहयोगी देश गिड़गिड़ा रहे हैं कि नागरिकों को निकालने की समय सीमा को बढ़ाया जाए लेकिन तालिबान के इस बयान के बादअमरीकीराष्ट्रपति का 31 अगस्त तक की समय सीमा पर कायम बने हुए हैं।

दरअसल, अमरीकीखुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर ने तालिबान के नेता मुल्लाह बरादर से मुलाकात की थी लेकिन 31 अगस्त की समय सीमा को बढ़ाने पर कोई सहमति नहीं बन पाई। तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने भी अमरीका को धमकी दी है कि वह सेना 31 अगस्त तक हटा ले। अगर अमरीका ऐसा नहीं कर पाया, तो उसे गंभीर परिणाम होंगे।

अब और लोगों को देश नहीं छोड़ने देगा तालिबान 

इस दौरान तालिबान ने अफगानिस्तान छोड़ने वाले लोगों को लेकर काफी अहम घोषणा की है। उसने कहा है कि अब वह अफगान लोगों को और ज्यादा देश नहीं छोड़ने देंगे। खबरों के अनुसार तालिबान ने अफगान लोगों को चेक पॉइंट पर रोकना शुरू कर दिया है।

इस बीच अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अफगानिस्तान से 31 अगस्त तक अमरीकीसैनिकों की वापसी का अभियान तेजी से चल रहा है। लेकिन इसका तय समय सीमा पर पूरा होना तालिबान के सहयोग पर निर्भर करेगा।

काबुल के हमिद कर्जई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमरीका के अभी करीब 5800 सैनिक है। बाइडन ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, अभी हम 31 अगस्त तक निकासी अभियान पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

हम जितनी जल्दी इसे पूरा करेंगे, उतना अच्छा होगा। अभियान में हर दिन हमारे सैनिकों के लिए जोखिम बढ़ रहा है। लेकिन 31 अगस्त तक इसका पूरा होना तालिबान के सहयोग, लोगों को हवाई अड्डे तक पहुंचने की अनुमति और हमारे अभियान में बाधा उत्पन्न ना करने पर निर्भर करता है।

अपनी समय सीमा पर कायम रहे अमरीका

अमरीका ने 31 अगस्त तक अपने सभी सैनिक वापिस बुलाने की घोषणा की थी और तालिबान ने इससे 2 सप्ताह पहले 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। तालिबान ने अमरीका को 31 अगस्त तक अपना निकासी अभियान पूरा करने को लेकर आगाह भी किया है।

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने काबुल में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमरीका अपनी खुद तय की गई समय सीमा पर कायम रहे।

समृद्ध जीवन के लिए पश्चिमी देशों में बसना चाहते हैं लोग

काबुल एयरपोर्ट पर लोग देश छोड़ने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं। तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह चिंतित या डरने के मामले नहीं है। वो पश्चिमी देशों में रहना चाहते हैं क्योंकि अफगानिस्तान एक गरीब देश है। 

अफगानिस्तान के 70 फ़ीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं। इसलिए हर कोई पश्चिमी देशों में एक समृद्ध जीवन के लिए बसना चाहता है। उल्लेखनीय है कि व्हाइट हाउस की ओर से रविवार को जारी बयान में कहा गया था कि सी-17  और एक सी-130 अमरीकीसैन्य विमानों ने दोपहर 3:00 बजे तक 12 घंटे की अवधि में अमित करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब 1700 यात्रियों को निकाला गया है।

राष्ट्रपति जो बाइडेन का कहना है कि अफगानिस्तान में अमरीकीलोगों की मदद करने वालों को हम अपने अमरीका में स्वागत करेंगे। इसके बयान के बाद अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए अमरीका के दरवाजे खुल गए हैं। इससे उन लोगों को सहूलियत होगी जो अमरीका में जाकर स्थाई रूप से वहां रहना चाहते हैं।

वहीं, अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगान नीति का एक बार फिर बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की वापसी का उनका फैसला सही है। बाइडन ने कहा, ‘इतिहास इस फैसले के लिए हमें सही ठहरायेगा’। बता दें कि अफगानिस्तान से अमरीकी बलों की पूर्ण वापसी को लेकर बाइडन को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

तालिबान से लड़ने के लिए अमरीका ने खर्च किए अरबों डॉलर-

अमरीका ने तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए अक्टूबर, 2001 में अफगानिस्तान पर आक्रमण किया था। अमरीका का आरोप था कि अफगानिस्तान में तालिबान हुकूमत ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से जुड़े दूसरे आतंकवादी संगठनों को पनाह दे रहा है।

अमरीका अपने यहां आतंकी हमलों के लिए लादेन और अलकायदा को जिम्मेदार मानता है। अमरीका अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर चुका है। इसके लिए अमरीका ने बड़ी संख्या में अमरीकी सैनिक भेजे थे।  इतना ही नहीं अमरीका ने अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण पर भी काफी खर्च किया है। 

 

उन्होंने कहा, इसके बाद हम अफगानिस्तान के लोगों को निकासी उड़ानों में जाने की अनुमति नहीं देंगे’। बाइडन ने कहा कि उन्होंने पेंटागन में और गृह मंत्रालय से संबंध में बात की है। उन्होंने कहा,’ मैं यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं कि हम अपने मिशन को पूरा करें.. मैं बढ़ते खतरे को लेकर भी सतर्क हूं।’ बड़ी चुनौतियां हैं, जिन पर हमें ध्यान देने की जरूरत है। हम जितने लंबे समय तक रुकेंगे, अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से संबंध आईएसआईएस के हमले और बढ़ते जाएंगे। जो तालिबान का भी शत्रु है। बाइडन ने कहा कि हालांकि तालिबान सहयोग कर रहा है ताकि हम अपने लोगों को बाहर निकाल सके’। लेकिन यह समय काफी कठिन है।

 

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Nidhi Arya