नज़रिया – इंतज़ार कीजिये, भीड़ आपके दरवाज़े पर कब दस्तक देती है

नज़रिया – इंतज़ार कीजिये, भीड़ आपके दरवाज़े पर कब दस्तक देती है

इतिहास साक्षी है के प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप में अराजकता का चरम था. युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी थी. युवा वर्ग बेरोज़गारी के कारण बदहवास था और वर्तमान सत्ता से निराश आम जनों का विश्वास लोकतंत्र पर कमज़ोर हो रहा था. विरोध के स्वर उठ रहे थे. प्रदर्शन हड़तालों की सिलसिला […]

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 तिरंगा और भगवा का घातक घालमेल

तिरंगा और भगवा का घातक घालमेल

कासगंज का दंगा उस दिन हुआ, जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा था। इसे हिंदू भी मना रहे थे, तो मुसलमान भी पीछे नहीं थे। लेकिन इस पर भी सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा दिया गया। अभी ठीक ठीक किसी को नहीं मालूम कि दंगा क्यों भड़का? आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है। लेकिन इस हकीकत […]

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 क्या इस फ़ैसले से "राष्ट्रवाद के नाम पर गुंडागर्दी" पर लगाम लगेगी

क्या इस फ़ैसले से "राष्ट्रवाद के नाम पर गुंडागर्दी" पर लगाम लगेगी

सिनेमाहाल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाये जाने के अपने फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया है. अब शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सिनेमाहाल में राष्ट्रगान बजाना जरूरी नहीं है. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख बदलने के बाद माना जा रहा था कि कोर्ट भी अपना […]

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