November 29, 2021
न्यायपालिका

क्या इस फ़ैसले से "राष्ट्रवाद के नाम पर गुंडागर्दी" पर लगाम लगेगी

क्या इस फ़ैसले से "राष्ट्रवाद के नाम पर गुंडागर्दी" पर लगाम लगेगी

सिनेमाहाल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाये जाने के अपने फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया है. अब शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सिनेमाहाल में राष्ट्रगान बजाना जरूरी नहीं है. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख बदलने के बाद माना जा रहा था कि कोर्ट भी अपना फैसला बदल सकता है.
केंद्र ने की बदलाव की अपील
केंद्र सरकार ने सोमवार को कोर्ट से कहा था कि अदालत को अपने आदेश में बदलाव करना चाहिए.केंद्र ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि इस मुद्दे पर इंटर मिनिस्ट्रियल कमिटी का गठन किया गया है ताकि वह नई गाइडलाइंस तैयार कर सके.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार के हलफनामे को स्वीकार कर लिया.कोर्ट ने कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने संबंधी अंतिम फैसला केंद्र द्वारा गठित कमिटी लेगी.सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि कमिटी को सभी आयामों पर व्यापक रूप से विचार करना चाहिए.
इस फैसले के बाद फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना या न बजाना सिनेमाघरों के मालिकों की मर्जी पर निर्भर होगा.कोर्ट ने कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने से दिव्यांगों को छूट मिलती रहेगी.
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 23 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि राष्ट्रगान नहीं गाने को राष्ट्र विरोधी नहीं कहा जा सकता है.देशभक्ति दिखाने के लिए राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है.साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि देशभक्ति के लिए बांह में पट्टा लगाकर दिखाने की जरूरत नहीं है.
2016 को जारी हुआ था आदेश
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर 2016 के आदेश में सिनेमाहाल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान के बजाने को अनिवार्य कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला श्याम प्रसाद चौकसे की याचिका पर सुनाया था. उनकी मांग थी कि आम जन में राष्ट्र के प्रति सम्मान जगाने का यह कारगर तरीका है.
23 अक्टूबर को अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सिनेमाहाल में राष्ट्रगान बजाने का फैसला बेहतरीन है और इससे सारे देश में एकता का भाव पैदा होता है, लेकिन यह काम सरकार पर छोड़ना चाहिए कि राष्ट्रगान कैसे बजाया जाए और लोग किस तरह से उसके प्रति सम्मान दर्शाएं.
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद उस दौरान लोगों को हर हाल में खड़े होना था.हालांकि बाद में दिव्यांगों के लिए अदालत ने अपने आदेश में संशोधन भी किया था.
फैसले का हुआ विरोध
राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र के रवैये पर कई लोगों द्वारा सवाल उठाए गए थे.सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी.विरोध करने वालों को देशद्रोही माना जाने लगा था. कहा गया था कि लोग मनोरंजन के लिए फिल्म देखने जाते हैं, वहां उनपर इस तरह देशभक्ति थोपी नहीं जानी चाहिए.
हिंसक घटनाएं भी सामने आयीं
वहीँ इस फैसले को लेकर देशभर से हिंसा की कई घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसमें भीड़ ने किसी कारण से खड़े नहीं होने पर लोगों को पीट दिया था.कुछ ऐसी भी घटनाएं सामने आईं, जिसमें शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति राष्ट्रगान के समय सिनेमाहाल में खड़ा नहीं हो सका और भीड़ ने उसे निशाना बना दिया. इस तरह की घटनाओं को लेकर सरकार को कड़ी आलोचनाएं झेलनी पड़ीं थी.

About Author

Durgesh Dehriya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *