December 2, 2021
दिल्ली हिंसा

दंगाईयों से मंदिर बचाने के लिए 72 घंटे तक नहीं सो पाये शकील अहमद

दंगाईयों से मंदिर बचाने के लिए 72 घंटे तक नहीं सो पाये शकील अहमद

आप वारिस पठान जैसे सिरफिरे को तो जानते हैं, लेकिन शकील अहमद को नहीं जानते जो एक मंदिर बचाने के लिए 72 घंटे तक नहीं सो पाये। वही शकील जिन्होंने एक मोहल्ले का भरोसा नहीं मरने दिया।
जब तमाम व​हशियों की भीड़ शिव विहार को जला रही थी, तब उसी शिव विहार एक शख्स था शकील अहमद जो इस आग पर पानी डाल रहा था। चमन पार्क के पास एक शिव मंदिर है, वहीं पर एक मस्जिद भी है।
हथियारबंद उपद्रवी मस्जिद की तरफ बढ़ रहे थे, शकील अहमद उन्हें देखकर घबराए नहीं। उन्होंने स्थानीय लोगों को इकट्ठा किया । आधे लोगों को मोर्चा लेने मस्जिद की तरफ भेजा, आधे लोगों लेकर मंदिर की तरफ रुक गए।
मंदिर पर उपद्रवियों ने हमला किया, लेकिन शकील और उनके मोहल्ला वासियों ने मिलकर सभी को भगा दिया। भीड़ ने वहां मौजूद घरों पर भी हमला करने की कोशिश की लेकिन शकील और उनके साथियों ने सभी को खदेड़ दिया। मोहल्ला में कुछ छोटे-छोटे देव स्थान भी हैं, उनको भी बचाया गया।
शकील गर्व से बता रहे हैं कि ‘हम लोगों ने उपद्रिवों को न मंदिर पर हमला करने दिया, न ही ​मस्जिद पर हमला करने दिया। मुस्लिम बहुल मोहल्ले में अगर एक मंदिर तोड़ दिया जाता तो यह हमारे लिए शर्म की बात होती। हमने उनको मोहल्ले में घुसने तक नहीं दिया।‘
मोहल्ले के राम सेवक ने बताया है कि ‘मैं यहां 35 साल से रह रहा हूं।  इस इलाके में सिर्फ एक या दो ही हिंदू परिवार रहते हैं, लेकिन हमें कभी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। हिंसा के समय मेरे मुस्लिम भाइयों ने मुझसे कहा कि अंकल जी, आप आराम से सो जाइए, आपको कोई नुकसान नहीं होगा।’
राम सेवक से किसी ने पूछा कि क्या आप यहां से कहीं और रहने जाएंगे? राम सेवक ने कहा, हम कहीं नहीं जा रहे। हम अपने पड़ोसियों के बीच सुरक्षित हैं।
जिसका परिवार उजड़ गया, उसे हम वापस नहीं बसा सकते। ​लेकिन जिन गलियों में श्मशान सा सन्नाटा है, जिन गलियों में 42 लाशें मिली हैं, उन्हीं गलियों में से 42 हजार उम्मीदें भी निकल रही हैं। ये उम्मीदें हमारा आपका भरोसा जगाएंगी।
जिन सियासी वहशियों के बारे में आप रोज बहस करते हैं, जिनका समर्थन विरोध करते हैं, जिनके लिए मरने-मारने को तैयार हैं, वह बंद कर दीजिए। शकील अहमदों और प्रेमकांतों के साथ रहना शुरू कर दीजिए। उनसे कहिए कि हम आपका इस्तकबाल करते हैं कि आपने इंसानियत की लाज रख ली।
क्या आपको भी दाढ़ी और टोपी देखकर पेट में मरोड़ उठता है? अगर हां तो आपको यह पोस्ट पढ़ने के बाद किसी कुशल मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए। आपके दिमाग में जहर भर गया है और आप पागल होने के बेहद करीब हैं।

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Krishna Kant

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