भगवा वस्त्र, स्फटिक और रुद्राक्ष की माला, चंदन का टीका.. इस तस्वीर के लिए जाते वक्त प्रज्ञा कोर्ट की पेशी में जा रही हैं। मामला महाराष्ट्र के मालेगांव स्थित एक मस्जिद में बम ब्लास्ट का है, जिसमे 6 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। इस मामले में पहले महारास्ट्र पुलिस ने कुछ मुस्लिम तंजीमों से जुड़े लोग गिरफ्तार हुए किये थे। मगर बाद में एनआईए और मुंबई के एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड ने प्रज्ञा सहित कुछ और लोगो को गिरफ्तार किया। ये सभी लोग अभिनव भारत संगठन के सदस्य थे। ये नाम दिलचस्प है, विनायक सावरकर ने भी लन्दन में अपने संगठन का नाम अभिनव भारत रखा था।

वर्तमान में भोपाल से चुनी गई लॉ-मेकर, मैडम प्रज्ञा को इस केस में, कोई दौड़ाकर नही पकड़ा गया था। दरअसल उस वक्त वे मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “सुनील जोशी” नाम के एक संघ भाजपा कार्यकर्ता के हत्या के केस में पहले ही गिरफ्तार थीं। एटीएस के हेमंत करकरे, उस मामले में गिरफ्तार प्रज्ञा को इस मामले में गिरफ्तार करके ले गए थे। आप जानते हैं, कि इस पाप के कारण साध्वी ने उन्हें श्राप दिया, जिसके कारण वे अजमल कसाब की गोलियों का शिकार हुए।

हालांकि आप नही जानते कि सुनील जोशी मर्डर कांड में उनकी गिरफ्तारी तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने की, इसी कारण से शिवराज साहब का पोलिटिकल कॅरियर चौपट है। आपको बताया नही गया , ये जरा स्लो वर्किंग श्राप था।

आपको पता है कि आईपीएस संजीव भट्ट जैसे अपराधी जब सच्चे न्याय की कसौटी पर कसे जाते हैं, तो जेल में चक्की पीसिंग एंड पीसिंग होता है। यह सच्चा न्याय गुजरात के दूसरे आईपीएस डीजी वंजारा को, जो गुजरात दंगों में झूठे आरोपो में बन्द थे, बाइज्जत बरी भी करता है। एक वीडियो में अहिंसक तलवारों के साथ नृत्य करके वंजारा सर ने न्यायपालिका को सलामी भी दी थी।

सच्चे न्याय के इसी क्रम में मक्का मस्जिद ब्लास्ट के आरोपी साधु असीमानंद जी भी मुक्त हुए। असीमानंद भी नए भारत के “अभिनव भारतीय” थे। इन असीमानंद ने स्टिंग कैमरे पर साध्वी प्रज्ञा के मालेगांव ब्लास्ट और इस अवधि में हुए अज़मेर ब्लास्ट और समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में शामिल होने की बात कही थी। वे जब सबूतों के अभाव में छूटे, तो साध्वी प्रज्ञा के विरुद्ध भी मकोका का मामला बन्द हुआ।

उनपर UAPA (अन-लॉफुल-एक्टिविटी-प्रिवेंशन-एक्ट) के केस जारी है, हालांकि उन्हें और हमे यकीन है कि उन्हें इसमे भी सच्चा न्याय आखिरकार अवश्य मिलेगा। लेकिन भोपाल की प्रबुद्ध ,न्यायप्रिय जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधित्व दिया है। मुंम्बई के बाद दूसरे नम्बर पर 1993 के सबसे भयानक दंगे भोपाल में हुए थे। जाहिर है, उन्हें प्रतिनिधि चुनने के इंतजार में भोपाल का जन जन बरसो से बेताब था।

योग्यता के सभी पैमानों पर साध्वी खरी उतरती भी हैं। भिंड के एक गरीब स्वयंसेवक के घर मे जन्म लेकर, हिन्दू जागरण मंच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, दुर्गा वाहिनी, बजरंग दल आदि संगठनों की सदस्य रहीं। इसके बाद हमारी संसद की सदस्य एवम रक्षा मामलों की स्थायी समिति की सदस्य हैं।

सदस्य तो वे, मुम्बई एटीएस के कहे अनुसार अभिनव भारत की भी। यह उत्साहजनक नाम एक जमाने मे वीर सावरकरजी के संगठन का था। शहीद मदनलाल ढींगरा इसी के सदस्य, व सावरकर शिष्य थे। नासिक कलेक्टर जैक्सन को मारने वाले शहीद श्री अनंत कन्हारे भी अभिनव भारत के सदस्य थे। सावरकर के तीसरे यशस्वी भवित शिष्य श्री नाथूराम जी गोडसे थे।

इस नाते गुरुभाई को देशभक्त कहना उनकी स्वाभाविक भावना है। मुझे उनसे कोई शिकवा नही। भोपाल की जनता अपने प्रतिनिधि पर अवश्य गौरवान्वित होगी। आखिर किसी का प्रतिनिधि उसकी दमित/प्रदर्शित भावनाओ का रूपक होता है। भोपाल उन्हें डिजर्व करता हैं। आह भोपाल, वाह भोपाल।