खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

हम डर रहे हैं यह स्वीकार करने से कि हमें गांधी की अब ज़रूरत नहीं बची है।ऐसा इसलिए नहीं कि गांधी अब प्रासंगिक नहीं रहे हैं, वे अप्रासंगिक कभी होंगे भी नहीं। हम गांधी की ज़रूरत को आज के संदर्भों में अपने साहस के साथ जोड़ नहीं पा रहे हैं। राजनीतिक परिस्थितियों के साथ समझौते […]

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 1947 के दंगों के समय मीडिया के रोल पर महात्मा गांधी के विचार

1947 के दंगों के समय मीडिया के रोल पर महात्मा गांधी के विचार

1947 में जब भारत विभाजन हुआ तो उसके पहले से ही साम्प्रदायिक दंगे भड़कने शुरू हो गए थे। साम्प्रदायिक दंगों का इतना बीभत्स रूप सामने आएगा, इसका अंदाज़ा शायद अंग्रेजों को भी नहीं था, और देश बांटने की कवायद में लिप्त, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं को भी शायद यह आभास नहीं था, कि […]

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 1934 से 1948 तक, महात्मा गांधी की हत्या के कई प्रयास हो चुके थे

1934 से 1948 तक, महात्मा गांधी की हत्या के कई प्रयास हो चुके थे

गांधी की हत्या के प्रयास 1934 से ही किये जा रहे थे। गांधीजी भारत आये उसके बाद उनकी हत्या का पहला प्रयास 25 जून, 1934 को किया गया। पूना में गांधीजी एक सभा को सम्बोधित करने के लिए जा रहे थे, तब उनकी मोटर पर बम फेंका गया था। गांधीजी पीछे वाली मोटर में थे, […]

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 जब द.अफ़्रीका में महात्मा गांधी ने नागरिकता कानून का किया था विरोध

जब द.अफ़्रीका में महात्मा गांधी ने नागरिकता कानून का किया था विरोध

वर्ष 1906  में, दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने एक नया कानून बनाया जिसमे भारतीय मूल की आबादी को पंजीकृत कराना अनिवार्य किया गया था। यह एक प्रकार का नागरिकता के कानून जैसा ही था। गांधी जी ने समानता के अधिकार के उल्लंघन के विंदु पर उस कानून के विरोध करने का निश्चय किया। सत्याग्रह की […]

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 व्यंग – आह भोपाल, वाह भोपाल

व्यंग – आह भोपाल, वाह भोपाल

भगवा वस्त्र, स्फटिक और रुद्राक्ष की माला, चंदन का टीका.. इस तस्वीर के लिए जाते वक्त प्रज्ञा कोर्ट की पेशी में जा रही हैं। मामला महाराष्ट्र के मालेगांव स्थित एक मस्जिद में बम ब्लास्ट का है, जिसमे 6 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। इस मामले में पहले महारास्ट्र पुलिस ने कुछ […]

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 गांधी टोपी का इतिहास

गांधी टोपी का इतिहास

गांधी कैप या गांधी टोपी का सम्बंध भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह एक सामान्य से किश्ती या नाव के आकार की टोपी है जो आज़ादी की लड़ाई के दौरान सुराजी, ( यह शब्द उन सभी सत्याग्रहियों के लिये प्रयुक्त होता था जो गांधी जी के आदर्शों पर अंग्रेज़ो के […]

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 व्यक्तित्व – जब बतक़ मियाँ ने बचाई बापू की जान

व्यक्तित्व – जब बतक़ मियाँ ने बचाई बापू की जान

आज जब के देश महात्मा गांधी जी की 71 वीं बरसी मनाने में मगन है और पूरा सोशल मीडिया गांधी जी को श्रद्धांजली अर्पित कर रहा है,ऐसे समय में एक हस्ती और है जिसको याद किए बग़ैर यह चर्चा ही अधूरी है. मैं बात कर रहा हूं भारत के महान सपूत और स्वतंत्रता सेनानी बत्तख़ […]

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 कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

कैसे थे महत्मा गांधी और बिड़ला परिवार के सम्बन्ध?

गांधी भी अजीब हैं। जो उनसे नफरत करते हैं वे भी उन जैसा बनना चाहते हैं। वे न उगलते बनते हैं न निगलते। न उन्हें खारिज किये बनता है, न उन्हें अपनाए। खारिज़ करें तो दुनिया सवाल करने लगती है, अपनाएं तो आत्मा की शुचिता और दौर्बल्य आड़े आता है। दुनिया के इतिहास में किसी […]

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 व्यक्तित्व – "गोपाल कृष्ण गोखले" को गांधी जी और जिन्ना मानते थे अपना राजनीतिक गुरु

व्यक्तित्व – "गोपाल कृष्ण गोखले" को गांधी जी और जिन्ना मानते थे अपना राजनीतिक गुरु

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी  रहे गोपाल कृष्ण गोखले की 9 मई को 149 वीं जयंती है.गोपाल कृष्ण गोखले एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे. गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1866 ई में  महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिला, तालुका गुहागर के कोथलुक नामक गांव में […]

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 23 मार्च को शहीद हुए थे "भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु"

23 मार्च को शहीद हुए थे "भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु"

23 मार्च 1931.. शहीद दिवस के रूप में जाना जाने वाला यह दिन यूं तो भारतीय इतिहास के लिए काला दिन माना जाता है, पर स्वतंत्रता की लड़ाई में खुद को देश की वेदी पर चढ़ाने वाले यह नायक हमारे आदर्श हैं. इन तीनों वीरों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए ही हर साल […]

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