सोहराबुद्दीन केस आपको याद होगा.

गुजरात पुलिस ने एक कथित फेक एनकाउंटर रच कर सोहराबुद्दीन को मार डाला था. स केस में अमित शाह का भी नाम शामिल था. सोहराबुद्दीन केस मुंबई की सीबीआई अदालत के जज बृजगोपाल हरिकृष्ण लोया के पास था. 2014 में मोदी सरकार बन जाने के बाद अचानक जज साहब की बेहद संदेहास्पद परिस्थिति में मृत्यु हो गयी…!

एक अंग्रेजी पत्रिका कारवाँ ने यह खबर छापी है –

कि जज लोया के परिवार ने अब इस समूचे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाए हैं…परिवार का कहना है की जज की मौत के पीछे गहरी साज़िश है….परिवार का कहना है संदेहास्पद परिस्थितियों में जस्टिस लोया का शव नागपुर के सरकारी गेस्टहाउस में मिला था…इस मामले में तत्कालीन भाजपा सरकार ने हार्टफेलियर का रूप दिया था…!!!

परिवार ने इस संदिग्ध मौत पर निम्न सवाल उठाए हैं…

1-जस्टिस लोया की मौत कब हुई, इस पर अफसर से लेकर डॉक्टर तक खामोश क्यों हैं…?
तमाम छानबीन के बाद भी अब तक मौत की टाइमिंग का खुलासा क्यों नहीं हुआ…???
2- 48 वर्षीय जस्टिस लोया की हार्ट अटैक से जुड़ी कोई से मेडिकल हिस्ट्री नहीं थी,फिर मौत का हार्टअटैक से कनेक्शन कैसे…???
3-जस्टिस लोया को वीआइपी गेस्ट हाउस से सुबह के वक्त आटोरिक्शा से अस्पताल क्यों ले जाया गया…???
4-हार्टअटैक होने पर परिवार को तत्काल क्यों नहीं सूचना दी गई…हार्टअटैक से नेचुरल डेथ के इस मामले में अगर पोस्टमार्टम जरूरी था तो फिर परिवार से क्यों नहीं पूछा गया…???
5-पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के हर पेज पर एक रहस्मय दस्तख्वत हैं, ये दस्तख्वत जस्टिस लोया के कथित रिश्तेदार मैय्याताचाचुलतभउ के बताए जाते हैं…जिन्हें जस्टिस का ममेरा भाई बताया गया है…परिवार का कहना है-इस नाम का जस्टिस का कोई ममेरा भाई नहीं है…!!!!
6-अगर इस रहस्यमय मौत के पीछे कोई साजिश नहीं थी तो फिर मोबाइल के सारे डेटा मिटाकर उनके परिवार को ‘डिलीटेड डेटा’ वाला फोन क्यों दिया गया…???
कहा जाता है कि जज की मृत्यु हो जाने के बाद मात्र 30 दिनों में नए जज ने मुकदमे में अमित शाह को क्लीन चिट दे दी थी…!!!

About Author

Gireesh Malviya

गिरीश मालवीय एक विख्यात पत्रकार हैं, जोकि आर्थिक क्षेत्र की खबरों में विशेष रूप से गहन रिसर्च करने के लिए जाने जाते हैं। साथ ही अन्य विषयों पर भी गिरीश रिसर्च से भरे लेख लिखते रहते हैं।

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