विचार स्तम्भ

राजनीति का सीडी काल और हवा होते मुद्दे

राजनीति का सीडी काल और हवा होते मुद्दे

आजकल आप टीवी पर, अखबारों में जो भी खबरें देखते या सुनते है उसमें कुछ बदलाव आया होगा जिसे देखकर शायद आपको राजनीति पर अधारित किसी बेकार सी फ़िल्म की याद आए या फिर “पॉलिटिक्स इस अ डर्टी गेम” कहकर आप आगे बढ़ जाते होंगे, ऐसा होना भी चाहिए। भारतीय राजनीति कुछ ऐसे ही दौर से गुज़र रही है। आने वाले कुछ दिनो में देश का एक महत्वपूर्ण राज्य अपनी नई सरकार चुनने के लिए मतदान कर रहा होगा। आप समझ गए होंगे हम गुजरात की बात कर रहे है।
गुजरात में अभी तक चुनावों से संबंधित क्रियाकलाप, आरोप प्रत्यारोप सिर्फ जाती, धर्म, वर्ग तक ही सीमित थी हालांकि इनको हम अच्छा नहीं कह सकते लेकिन कुछ और भी था जो निहायती निचले स्तर की राजनीति का प्रमाण देने वाला था। एक दूसरे की तांक झांक कोई करने की प्रवर्ती राजनीति के क्षेत्र में आजकल अधिक दिखाई पड़ने लगी है, कोई नेता अपने घर मे क्या व कैसे करता है, किसके साथ रहता है अपने निजी कक्ष में वह क्या क्या क्रियाकलाप करता है, किसके साथ करता है सब जानने की उत्सुकता के बढ़ने का कारण किसी दल विशेष का अपनी हार का गम ना झेल पाना हो सकता है।
कुछ ही दिनों पहले गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता व एक युवा हार्दिक पटेल का विडियो सामने आया है जिसमे उनके कुछ निजी पलों को दिखाया गया है। इस विडियो के सामने लाने के क्या कारण रहे होंगे यह हम सब जानते है राजनीति में टांग पकड़ कर खींचने की आदत में नहीं है परंतु इसको लेकर जो प्रतिक्रिया देखने की मिल रही है, वह पहले से अलग लगती है। एक समय वेह था जब किसी नेता की इस प्रकार की सीडी सामने आने पर समाज उनको समाज व राजनीति के लिए कलंक मान लेता था पर जैसे जैसे अज़ादी, निजता जैसे विषयों पर लोगो ने चर्चा करना व समझना सीखा वैसे वैसे एक दूसरे की समानता व स्वतंत्रता का सम्मान करना भी समाज में आया है, इसी कारण हार्दिक पटेल की इस सीडी पर सोची गई प्रतिक्रिया से अलग विचार देखने का मिल रहे है। उनको साथी नेताओ ने उसका बचाव कर इस विचार को मज़बूती दी है।
निजता का अधिकार हर व्यक्ति के जीवन में मेहत्वपूर्ण स्थान रखता है और जब एक व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होता है तब खतरा सम्पूर्ण समाज पर भी होता है। चूंकि मामला राजनीति से जुड़ा है तो राजनीति की गरिमा को बचाए रखने का दायित्व निभाना भी ज़रूरी होता है अन्यथा भारत में चुनाव मुद्दों पर ना होकर निजी कार्यो के आधार पर होने शुरू हो जाएंगे। जिस राजनीतिक चाह में यह विडियो जनता के समक्ष लगाया गया था, हार्दिक का समर्थन कर जनता ने उस चाह को तेज़ झटका दिया है। कोई बालिग एंव स्वतंत्र व्यक्ति अपनी निजी जिन्दगी मेज किसके साथ क्या करता है
यह राजनीति या किसी संगठन का विषय नहीं होना चाहिए। दो व्यक्तियो के मध्य सहमति से हुई किसी भी क्रिया से किसी तीसरे पक्ष को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए खासकर तब जब मामला कोई राष्ट्र सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति या समाज से जुड़ा ना हो जिसमे किसी को कोई हानि ना पहुंच रही हो। इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा द्वारा रचा गया यह षड्यंत्र उनपर भारी पड़ गया है परंतु प्रश्न यह है कि इस अपराध ले लिए क्या उनको हार के रूप सज़ा नहीं मिलनी चाहिए जिससे उनको यह पता चल जाए कि वर्तमान समाज के लोग पुराने और घटिया राजनीतिक परपांचो में अब नहीं आने वाले। समाज में खुलापन आने के कारण लोग बदले है, समाज बदला है, राजनीति बदली है और अब इन लोगो को भी बदल जाना चाहिए अन्यथा राजनीति से ऐसे लोगो का बहिष्कार लगभग तय ही है।

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Ankita Chauhan

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