October 20, 2021
स्वास्थ्य

नौकरी करते हुए जा रही है लोगों की जान: विश्व स्वास्थ संगठन

नौकरी करते हुए जा रही है लोगों की जान: विश्व स्वास्थ संगठन

कोरोना में विश्व भर होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। यही नहीं कोरोना के अलावा कई ऐसे कारण हैं जिनके कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।  संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीबन 20 लाख लोग अपने व्यवसाय से संबधित कारणों के कारण मौत का शिकार हो जाते हैं।

दरअसल रिपोर्ट में यह बात सामने आई  है कि लंबे समय तक काम करने और वायु प्रदूषण के कारण लोग अनेकों बीमारियों का शिकार हो जाते हैं, जिसके चलते उनकी जान भी चली जाती है। वहीं शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी देते हुए कहा है कि महामारी से स्थिति और भी खराब होने की संभावना है।

 जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार बढ़ रही है गर्मी 

लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी बढ़ती जा रही है। जिसमें वायु प्रदूषण अहम भूमिका निभाता है। दमा जैसी बीमारी आसानी से व्यक्ति को अपनी चपेट में ले रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि 2016 में 1.9 मिलियन लोगों की मौत के लिए काम से संबंधित बीमारियां और चोटें जिम्मेदार थी।

एक अध्ययन में पाया गया है कि 19 व्यावसायिक जोखिम भरे कामों पर जब विचार किया गया, तो पाया गया कि मौत का आंकाड़ा उन व्यक्तियों में सबसे ज्यादा था जो लंबे समय तक अपना काम करते हैं। इसके अलावा अपने काम के लिए ऑफिस जाने के दौरान वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से भी लोगों की सेहत पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण अस्थमा,कोर्सिनोजेंस जैसी घातक बीमारियों को जन्म देता है, जो मौत का कारण बनती है।

इन सभी आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण पूर्वी एशिया और पश्चिमी प्रांत क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों में, पुरुषों में और 54 वर्ष से अधिक उम्र के श्रमिकों में काम से संबंधित मौतों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

डब्ल्यूएचओ के अध्ययन के पहले के निष्कर्ष पर आधारित एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक काम करने पर स्ट्रोक और हृदय रोग के कारण 1 साल में लगभग 7,45,000 लोगों की मौत हो रही है। इस रिपार्ट में कहा गया है कि सबसे बड़ा हत्यारा हमारा कार्य स्थल है जहां वायु प्रदूषण जैसी गैसों और धुएं के साथ-साथ औद्योगिक उत्सर्जन से व्यक्ति छोटे कणों के संपर्क में आ जाता है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट में पाया गया कि 2016 में 4,50,000 मौतों के लिए वायु प्रदूषण ही जिम्मेदार था।

इसके अलावा चोटों ने 3,60,000 लोगों की जान ले ली। अगर 2000 और 2016 के बीच इस आंकड़े को जनसंख्या के अनुसार देखा जाए, तो काम से संबंधित मौतों में 14% की गिरावट दर्ज की गई  है। रिपोर्ट की मानें तो यह कार्यस्थल स्वास्थ है। साथ ही सुरक्षा में सुधार को दर्शा रही है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा कि बीमारी का काम संबंधी बोझ शायद अनुमान से “काफी बड़ा” है। 

नौकरी करते हुए लोगों का मरना चौंकाने वाला: टेड्रोस एडनाॅम

लंबे समय तक काम करने पर मौतों के आंकड़ों को देखते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक  टेड्रोस एडनाॅम घेब्येयियस ने एक वीडियो बयान में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “इतने सारे लोगों को सचमुच उनकी नौकरी से मरते हुए देखना बहुत ही चौंकाने वाला है, उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य के लिए रिपोर्ट “वेक अप कॉल” साबित होगी। 

एडनाॅम का कहना यह भी है कि महामारी काल में भी लोगों ने अपने व्यवसायियों को खोया है और उससे संबंधित तनाव भी लोगों की जान का दुश्मन बना है। कोरोना के बाद काम में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए घंटों काम करना भी श्रमिकों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

डब्ल्यूएचओ के तकनीकी अधिकारी फ्रैंक पेगा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बढ़ती गर्मी से होने वाली मौतों सहित अन्य मौतों को वर्तमान में शामिल नहीं किया गया था, और कोविड-19 से हई मौतों के आंकड़ों को भी इस रिपोर्ट में सम्मलित नहीं किया गया था। गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ‌

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Nidhi Arya