पहलू खान को आप शायद भूल गए होंगे, मैं याद दिला देता हूँ। साल 2017 में अलवर में एक भीड़ ने गो-तस्करी के शक में पहलू खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस घटना का वीडियो बहुत वायरल हुआ था लेकिन उसके बावजूद उसे सुबूत नही माना गया।
पिछले साल अगस्त 2019 में पहलू ख़ान की हत्या के मामले में अलवर ज़िला न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए मामले के सभी बालिग आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन नाबालिग आरोपियों की सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट में हो रही थी। उस सुनवाई में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने शुक्रवार को पहलू खान लिंचिंग केस में तीन नाबालिग दोषियों को सजा सुनायी और उन्हें ‘सुरक्षित बाल गृह’ में 3 साल के लिए भेजने का फैसला सुनाया।
यानी जहाँ पहलू खान लिंचिंग केस में अलवर के जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने संदेह के लाभ में सभी छह बालिग आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया था। वही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने तीन नाबालिग आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने फैसले में कहा है, कि ’21वीं सदी में, जहां भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सेक्यूलर देश है, वहां कुछ गैर-सामाजिक तत्व युवाओं को धर्म के नाम पर भड़काने और उन्हें एक अवैध ग्रुप में शामिल करने से नहीं हिचकिचाते और कानून व्यवस्था को हाथ में लेकर किसी की हत्या कर देते हैं।’
पहलू खान लिंचिंग केस में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने पहलू खान का इलाज करने वाले डॉक्टर्स की तीखी आलोचना की। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़ ने फैसले में लिखा कि “यदि मृतक पहलू खान के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था, तो फिर डॉक्टरों के बयान एक जैसे होने चाहिए लेकिन डॉक्टर्स ने अलग-अलग बयान दिए।

पहलू खान की हत्या में जो बात सबसे ज्यादा विचलित करने वाली थी वो थी उसकी पोस्ट मार्टम रिपोर्ट

दरअसल पहलू खान के केस में पुलिस ने चार्जशीट में दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगाई ओर कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साबित नहीं हो पा रहा है, कि पहलू खान की मौत कैसी हुई है? सरकारी अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कैलाश अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह को लेकर अंतर है। पहलू खान की बॉडी का पोस्ट मार्टम कम्युनिटी हेल्थ सेंटर बहरोर के तीन डॉक्टर्स की टीम ने किया था. जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था, कि पहलू की मौत सदमे के चलते हुई थी और ये सदमा उन्हें उनकी चोटों के कारण लगा था। पहलू खान की 13 पसलियां टूटी थीं, लेकिन दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा हुआ है कि मौत की वजह हार्टअटैक है।
पुलिस का यह कथन छह बालिग आरोपियों के लिए बेहद सहायक सिद्ध हुआ लेकिन जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पुलिस की थ्योरी पर ही सवाल उठा दिए और कहा कि पुलिस ने ठीक से जाँच नही की।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने फैसले में कहा है, कि “कैलाश हॉस्पिटल के डॉक्टर अखिल सक्सेना, डॉ. बीडी शर्मा, डॉ. आरसी यादव और डॉ. जितेन्द्र बुटोलिया को नोटिस जारी होना चाहिए और उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए कि मौत का कारण गंभीर चोटों के बजाय हृदयघात बताने का क्या उद्देश्य था।”
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़ ने फैसले में लिखा कि “यदि मृतक पहलू खान के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था। तो फिर डॉक्टरों के बयान एक जैसे होने चाहिए लेकिन डॉक्टर्स ने अलग-अलग बयान दिए हैं। जिससे लगता है कि डॉक्टर्स ने पहलू खान के शरीर को डमी की तरह ट्रीट किया गया।”
जिस तरह से पुलिस ने पहलू खान के केस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सहारा लेकर पूरी जांच की दिशा बदल दी। यदि यही पध्दति दिल्ली हिंसा में मृतक अंकित शर्मा के साथ आजमाई जाए तो आपको कैसा लगेगा दिल पर हाथ रख कर जरा सोचिए?