नौसेना के जहाज पर, राजीव गांधी के साथ, विदेशी नागरिक गये थे या नहीं इस पर अलग अलग खबरें आ रही हैं। सरकार ही सच क्या है बता सकती है। सरकार को सच की जांच करके बताना चाहिये। करदाताओं और नागरिकों का यह अधिकार है कि राजकीय धन, साधन आदि के दुरूपयोग पर सभी तथ्यों से अवगत रहें। वैसे भी सभी रक्षा प्रतिष्ठान विशेष सुरक्षित ज़ोन होते हैं। वहां कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति या पास के नहीं जा सकता है। यही नहीं बल्कि केंटोनमेंट क्षेत्र में भी सामान्य आवाजाही पर प्रतिबंध रहता है। अगर राजीव गांधी ने कोई नियम विरुद्ध कार्य किया है तो अब भी सरकार उसकी जांच कराकर तथ्य सामने ला सकती है। उन आरोपों का कोई मतलब नहीं जिनकी जांच ही न करायी जा सके, या सत्य ही न सामने लाया जा सके।

आईएनएस सुमित्रा पर विदेशी नागरिक अक्षय कुमार गये थे। यह लगभग सच साबित हो चुका है। यह यात्रा सरकार की जानकारी और उसकी अनुमति से ही हुयी थी। हालांकि अक्षय कुमार भारतीय मूल के हैं, कनाडा के नागरिक होने के नाते बस तकनीकी आधार पर विदेशी कहे जा सकते हैं। उनपर कोई विशेष विवाद भी नहीं है। वे एक अच्छे और लोकप्रिय फ़िल्म अभिनेता हैं। उनकी अधिकतर फिल्में हिंदी में बनती रहती हैं। पर जब आरोप विदेशी मेहमानों द्वारा सैनिक क्षेत्रों में जाने का लगेगा तो इस आरोप से वह भी नहीं बच पाएंगे। बाद, प्रतिवाद के दौर में उनपर यह आरोप लग ही रहा है। अब सरकार को ही यह बताना है कि उन्हें यह अनुमति क्यों और किसने दी थी।

पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर 2 जनवरी 2016 को तड़के सुबह 3:30 बजे भारी मात्रा में असलहा बारूद से लैस आतंकवादियों ने आक्रमण कर दिया। पाक खुफिया एजेंसी जैश ए मोहम्मद  के आतंकियों से मुठभेड़ में 2 जवान शहीद हो गये जबकि 3 अन्य घायल सिपाहियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। सभी हमलावर आतंकी भी मारे गये। जैश ए मोहम्मद ने इसकी जिम्मेदारी ली। भारत ने पाकिस्तान से प्रतिवाद भी किया। पाकिस्तान सरकार ने अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा पठानकोट एयरबेस का निरीक्षण करने और सुबूतों की पड़ताल करने की पेशकश की। भारत ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। पर पठानकोट एयरबेस पर धमाके और आतंकी हमले के बाद एक ऐसी विदेशी खुफिया एजेंसी जो अपने जन्म से ही भारत को विखंडित करने के लिये हर तरह का अभियान चला रही है, को उसी धमाके की जांच के लिये देश की मज़बूत सरकार ने अनुमति दी, क्या यह उचित और परिपक्व कदम था ?

आईएसआई ने न केवल पठानकोट एयरबेस का भ्रमण किया बल्कि बल्कि धमाके की जांच भी की। जिस हमले को आईएसआई ने खुद ही जैश ए मोहम्मद द्वारा कराया उसी आईएसआई को जांच के लिये एक संवेदनशील प्रतिष्ठान में जाने, घूमने, और जांच करने की अनुमति क्यों दी गयी ? और जो एजेंसी खुद ही हमले में शामिल है वह भला कैसे खुद के भेजे गए आतंकी लड़कों को दोषी ठहरा देगी ? यही हुआ।आईएसआई ने हमला कराया, आईएसआई ने घटनास्थल पर आकर मौका मुआयना किया और खुद को दोषमुक्त बता दिया। ‘ मुल्ज़िम का पता नहीं चला। जरिये एफआर विवेचना समाप्त।’ क्या सरकार ने यह मान कर अनुमति दी थी, कि आईएसआई आएगी और मौका मुआयना के बाद जैश के आतंकियों को जिन्होंने हमला किया था, पकड़ कर हमें दे देगी ? अगर सरकार ने यह सोचा था तो यह सरकार, सरकार चलाने  लायक तो, बिल्कुल नहीं है।

बाद में जब भारत सरकार ने पाकिस्तान में आईएसआई मुख्यालय जाकर सुबूतों को दिखाते हुए बात करने का प्रस्ताव पाकिस्तान सरकार को दिया तो पाकिस्तान ने कह दिया कि ” हम मुतमइन हैं कि यह घटना हमारे यहां से गये किसी आतंकी संगठन ने नहीं की है। ” उनकी अनुमति ही नहीं मिली।  हम कुछ कर भी नहीं पाए। वे हमारा एयरबेस देख गये और हम उनके कार्यालय भी नहीं जा पाए। हालांकि सरकार ने यह कहा था कि बस हमले की जगहों पर ही आईएसआई के विवेचकों को ले जाया गया था, और अन्य जगहों पर नहीं। एक बेहद संवेदनशील एयरबेस में कोई सरकार कैसे किसी घोषित दुश्मन देश के खुफिया एजेंसी को प्रवेश करने की अनुमति दे सकती है ? लेकिन यह भी सत्तर साल में पहली बार हुआ है।

© विजय शंकर सिंह