विचार स्तम्भ

रक्षा क्षेत्र में फेल साबित हो रही "मोदी सरकार"

रक्षा क्षेत्र में फेल साबित हो रही "मोदी सरकार"

मोदी सरकार 2014 के चुनावों में जब सत्ता में आई थी. उस समय नरेन्द्र मोदी का पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने और लव लेटर वाले और एक के बदले 10 सिर वाले जुमले  खूब वायरल हुये थे. लेकिन मोदी के सत्ता संभालने के बाद की असलियत कुछ और है.

आतंकी हमले और मुठभेड़ में हुई बढ़ोतरी

  • पिछले साल और इस साल कश्मीर में असंतोष बढ़ा है.
  • आंतकी हमलों और समान्य मुठभेड़ की घटनाएं बढ़ी है.
  • सीजफायर उल्लंघन, घुसपैठ बढ़ी है.
  • एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई और आतंकवादी हमले बढे हैं.

हालांकि सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कड़े कदम भी उठाये है, पर इससे कुछ विशेष फायदा नजर नहीं आ रहा है. आंकड़ों पर ही नजर डाले, एक RTI के जवाब में इसी साल के आंकड़ों पर ही नजर डाले तो-

  • मई, 2014 से अक्टूबर 2017 तक जम्मू कश्मीर में 183 जवान शहीद हो चुके हैं.
  • वहीं 2 महीने की बात की जाए यानि कि नवंबर और दिसंबर की तो आंकड़ा 200 तक पहुँचता नज़र आता है.
  • वहीं 2016 में भारत को दुश्मन से बचाते हुए भारतीय आर्मी के 60 जवान साल 2016 में शहीद हुए हैं.
  • जबकि साल 2014 में 32 जवान और 2015 में 33 जवान शहीद हुए थे.

2016 में हुए थे दो बड़े हमले

साल 2016 में भी आतंकी हमलों की तादाद बढ़ी है. कश्मीर के मुद्दे की वजह से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल रहा है. इसका खामियाजा भारतीय सेना के  जवानों को भुगतना पड़ा है.

2016 के  दो बड़े हमलों की वजह से हमारे ज्यादा जवान शहीद हुए है. एक उरी हमला और दूसरा नगरोटा हमला. इन दोनों हमलों को मिलाकर कुल 26 जवान शहीद हुए  थे. 

  • उरी हमले में भारत के 19 जवानों की जान चली गई थी.
  • इसके कुछ ही दिनों बाद भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर पाकिस्तान से बदला ले लिया था.
  • सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान की तरफ से भारत-पाक सीमा पर लगातार सीजफायर का उल्लघंन हो रहा है.
  • सीमापार से आए दिन गोलीबारी, मोर्टार आदि चलाए जाते हैं. भारत भी जवाबी कार्रवाई करता रहा है.

अभी 2017 बात करें तो वर्ष के अंतिम दिन ही आंतकियों ने एक बड़ें हमले को अंजाम दिया था, जिसमें हमारे 5 जवानों की जान चली गयी.

सरकार रक्षा के मुद्दे पर विफल साबित हो रही है, सैनिकों की मृत्यु या किसी आतंकवादी हमले के बाद , बस निंदा करके अपना कर्तव्य पूरा करती दिख रही है, जबकि चुनाव से पहले वाले भाजपाई तेवर अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं!

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Ashok Pilania

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