अर्थव्यवस्था

क्या मोदी सरकार के इस कदम से, कैश वितरण प्रणाली में विदेशी कम्पनियों का कब्ज़ा हो जायेगा ?

क्या मोदी सरकार के इस कदम से, कैश वितरण प्रणाली में विदेशी कम्पनियों का कब्ज़ा हो जायेगा ?

देश के लाखों कर्मचारियों पर रोजगार का संकट आ गया है ओर देशी कम्पनियो की जगह विदेशी कम्पनियों को बड़ी चतुराई से अंदर किया जा रहा है
देश की कैश इन ट्रांजिट यानी कैश वितरण प्रणाली के बिजनेस में शामिल साठ कंपनिया भारतीय रिजर्व बैंक के एक ताजा सर्कुलर से बन्द होने की कगार पर पुहंच गयी हैं ये कम्पनियां वो कम्पनियां है जो बैंक-एटीएम में पैसा डालती हैं या विभिन्न जगह से पैसा एकत्रित करके उन्हें बैंक या अन्य प्रतिष्ठान तक पहुंचाती हैं,
अपने ताजा सर्कुलर में रिजर्व बैंक ने कहा है कि कैश इन ट्रांजिट बिजनेस में शामिल कंपनियों, जो बैंक-एटीएम में पैसा डालते हैं या विभिन्न जगह से पैसा एकत्रित करके उन्हें बैंक या अन्य प्रतिष्ठान तक पहुंचाते हैं, के लिए यह जरूरी होगा कि उनका नेटवर्थ 100 करोड़ रुपये हो और उनके पास कारोबार करने के लिए 300 गाड़ियों का काफिला हो
हजारों लाखो पूर्व सैनिक इन कम्पनियो में काम करके रोजगार पा रहे है उनके आगे अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है एक खतरा ओर है जिसकी ओर अभी ध्यान नही दिया जा रहा कि अगर केवल विदेशी कंपनियों के हाथ में ही बैंकों, एटीएम और अन्य जगह पैसा पहुंचाने का कार्य चला जाता है तो यह देश की सुरक्षा को लेकर भी शंका उत्पन्न करता है। ये कंपनियां जिस दिन चाहेंगी उस दिन भारत में नकदी की समस्या उत्पन्न कर सकती हैं
यह देश की कैश वितरण प्रणाली पर परोक्ष रूप से विदेशी कंपनियों के नियंत्रण का मामला है

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Gireesh Malviya

गिरीश मालवीय एक विख्यात पत्रकार हैं, जोकि आर्थिक क्षेत्र की खबरों में विशेष रूप से गहन रिसर्च करने के लिए जाने जाते हैं। साथ ही अन्य विषयों पर भी गिरीश रिसर्च से भरे लेख लिखते रहते हैं।

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